Voter List Revision SC Hearing वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर तीखी बहस देखने को मिली। आरजेडी सांसद मनोज झा की याचिका पर सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के बीच जोरदार दलीलें पेश की गईं। सिब्बल ने पूरी प्रक्रिया को ‘व्यावहारिक रूप से अनुचित’ करार देते हुए कहा कि यह लाखों लोगों को उनके मताधिकार से वंचित कर सकता है।
मामला तब गरमाया जब सिब्बल ने तर्क दिया कि वोटर से उनके माता-पिता की नागरिकता का सबूत मांगना गलत है, खासकर तब जब उनके पास कोई दस्तावेज न हो या उनकी मृत्यु हो चुकी हो। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा, “अगर आपके पिता का नाम लिस्ट में नहीं है और आपने भी इस पर काम नहीं किया, तो शायद आप चूक गए।”
‘बीएलओ की शक्तियों पर उठाए सवाल’
कपिल सिब्बल ने कोर्ट में बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) की भूमिका और उनकी क्षमताओं पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या एक स्कूल टीचर (जो आमतौर पर बीएलओ होते हैं) यह तय करने में सक्षम है कि कोई व्यक्ति मानसिक रूप से विक्षिप्त है या नहीं? क्या उनके पास यह अधिकार होना चाहिए कि वे किसी की भारतीय नागरिकता पर फैसला सुना सकें?
सिब्बल ने कहा, “नागरिकता निर्धारित करने के लिए एक स्कूल शिक्षक को बीएलओ के रूप में तैनात करना मूल रूप से और प्रक्रियात्मक रूप से एक खतरनाक और अनुचित प्रस्ताव है।” उनका तर्क था कि बीएलओ के पास न तो वह कानूनी समझ है और न ही अधिकार क्षेत्र कि वे इतने संवेदनशील मुद्दे पर निर्णय ले सकें।
‘विदेशी नागरिक अधिनियम जैसा नियम’
सिब्बल ने कोर्ट में दलील दी कि एसआईआर के तहत लागू किए जा रहे नियम ‘विदेशी नागरिक अधिनियम’ (Foreigners Act) जैसे ही कठोर हैं। इसमें नागरिकता साबित करने का पूरा बोझ (Onus of Proof) व्यक्ति पर डाल दिया गया है, जो कि गलत है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई गणनाकर्ता वोटर से पूछता है कि उसके पिता का जन्म कब हुआ और उसका सबूत मांगता है, तो एक आम आदमी, जिसके पिता ने शायद 2003 में वोट न दिया हो या गुजर गए हों, वह इसका प्रमाण कैसे देगा? यह प्रक्रिया गरीबों और वंचितों के लिए एक बड़ी मुसीबत बन सकती है।
‘2 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई’
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जयमालिया बागची की बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अब अगली सुनवाई के लिए 2 दिसंबर की तारीख तय की है।
यह मामला आरजेडी के राज्यसभा सांसद मनोज झा द्वारा दायर किया गया है, जिनका कहना है कि एसआईआर की प्रक्रिया में कई खामियां हैं और इसे तुरंत सुधारा जाना चाहिए। अब देखना होगा कि अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट क्या रुख अपनाता है और क्या एसआईआर की प्रक्रिया में कोई बदलाव के निर्देश दिए जाते हैं।
‘जानें पूरा मामला’
चुनाव आयोग देश भर में वोटर लिस्ट को अपडेट करने के लिए ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) चला रहा है। इसका मकसद मतदाता सूची में गड़बड़ियों को ठीक करना है। लेकिन विपक्ष और कई याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इस प्रक्रिया के तहत बेवजह लोगों से पुराने दस्तावेज मांगे जा रहे हैं और गरीब, अशिक्षित व वंचित वर्ग के लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कटने का खतरा है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
कपिल सिब्बल ने एसआईआर प्रक्रिया को अनुचित बताते हुए बीएलओ की भूमिका पर सवाल उठाए।
सीजेआई ने टिप्पणी की कि अगर पिता का नाम लिस्ट में नहीं था और सुधार नहीं करवाया, तो यह चूक हो सकती है।
सिब्बल ने कहा कि नागरिकता साबित करने का बोझ वोटर पर डालना गलत है।
सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर को करेगा।








