Vikram Samvat 2083 की शुरुआत आज चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर हो चुकी है। Hindu New Year और नए विक्रम संवत के साथ-साथ चैत्र नवरात्रि का पर्व भी सुबह 6:52 बजे से शुरू हो गया है। इस बार नए संवत्सर का नाम “रौद्र” है, जिसका अर्थ है क्रोध और उग्रता से भरा हुआ। नए संवत के राजा बृहस्पति (Jupiter) हैं और मंत्री मंगल (Mars) हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह संवत्सर देश के लिए प्रगति और चुनौतियों दोनों का मिश्रण लेकर आया है।
“रौद्र” संवत्सर का क्या मतलब है?
Vikram Samvat 2083 का नाम “रौद्र” रखा गया है। हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार रौद्र का अर्थ होता है जो क्रोध में हो, जो गुस्से में हो। जिस प्रकार भगवान शिव को रुद्र कहा जाता है और जब वे क्रोधित होते हैं तो उनका रौद्र रूप प्रकट होता है, ठीक उसी तरह इस संवत्सर में भी उग्रता और तीव्रता के संकेत हैं।
ज्योतिष शास्त्र में हर संवत्सर का एक विशेष नाम होता है और उस नाम के अनुसार ही पूरे साल की दिशा तय होती है। रौद्र नाम से स्पष्ट है कि इस साल कुछ उतार-चढ़ाव, विवाद और चुनौतियां आ सकती हैं, लेकिन साथ ही साहस और पराक्रम भी देखने को मिलेगा।
राजा बृहस्पति: धर्म और समृद्धि का संकेत
Hindu New Year 2025 के इस नए संवत में बृहस्पति ग्रह को राजा बनाया गया है। ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति को धर्म, ज्ञान और समृद्धि का कारक माना जाता है। बृहस्पति देवताओं के गुरु हैं और उनकी कृपा से विद्या, बुद्धि और सम्पन्नता में वृद्धि होती है।
ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि बृहस्पति के राजा होने से देश की प्रगति होगी। धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी, शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छुई जा सकती हैं। आम जनता के लिए यह शुभ संकेत है कि बृहस्पति की कृपा से आर्थिक और सामाजिक स्थिति में सुधार की संभावना है।
मंत्री मंगल: साहस के साथ उग्रता का भी खतरा
Vikram Samvat 2083 में मंगल ग्रह को मंत्री पद मिला है। मंगल को साहस और पराक्रम का प्रतीक माना जाता है। लेकिन मंगल की प्रकृति उग्र भी होती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मंगल के मंत्री होने से कुछ चिंताजनक स्थितियां भी पैदा हो सकती हैं।
मंगल के प्रभाव से उग्रता, विवाद और क्रोध बढ़ सकता है। समाज में आपसी टकराव और तनाव की स्थितियां देखने को मिल सकती हैं। इसके साथ ही रक्त से संबंधित बीमारियों के बढ़ने का भी खतरा है। सुरक्षा और सेहत के नजरिए से इस साल कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
आम लोगों पर इसका सीधा असर यह हो सकता है कि स्वास्थ्य के प्रति अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत होगी। ब्लड प्रेशर, एनीमिया और अन्य रक्त संबंधी समस्याओं से बचाव के लिए नियमित जांच करवाते रहना बेहद जरूरी रहेगा।
17 मई से 15 जून 2026 तक रहेगा अधिक मास: शादी-ब्याह पर लगेगा ब्रेक
Vikram Samvat 2083 में एक बहुत अहम बात यह है कि 17 मई से 15 जून 2026 तक अधिक मास रहेगा। यह ज्येष्ठ का अधिक मास होगा, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है।
Hindu New Year से जुड़ी इस जानकारी का सीधा असर लाखों परिवारों पर पड़ेगा, क्योंकि अधिक मास के दौरान कोई भी शुभ कार्य जैसे विवाह, शादी, जनेऊ संस्कार, मुंडन आदि नहीं किए जाते। इस दौरान केवल भगवान की पूजा, पाठ और उपासना ही उचित मानी जाती है।
जो परिवार मई-जून 2026 में शादी या अन्य शुभ कार्यों की योजना बना रहे हैं, उन्हें अभी से अपनी तारीखें बदलनी होंगी। यह जानकारी विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो आने वाले समय में कोई बड़ा आयोजन करने की सोच रहे हैं।
अप्रैल-मई में भीषण गर्मी, मानसून में देरी की आशंका
ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस Vikram Samvat 2083 में अप्रैल और मई में भीषण गर्मी पड़ने की संभावना है। तापमान सामान्य से काफी ऊपर जा सकता है और लू का प्रकोप भी बढ़ सकता है।
इसके अलावा मानसून की शुरुआत सामान्य से देर से होने की संभावना जताई गई है। अगर मानसून में देरी होती है तो इसका सीधा असर किसानों की खरीफ फसलों पर पड़ेगा। पानी की किल्लत, सूखे की स्थिति और कृषि पर निर्भर करोड़ों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। आम जनता को इस गर्मी में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी।
अभी तक घट स्थापना नहीं कर पाए? अभिजीत मुहूर्त में कर लें
चैत्र नवरात्रि का शुभ पर्व सुबह 6:52 बजे से शुरू हो चुका है। लेकिन जो भक्त किसी कारणवश सुबह कलश स्थापना (घट स्थापना) नहीं कर पाए हैं, उनके लिए चिंता की कोई बात नहीं है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ऐसे लोग अभिजीत मुहूर्त में घट स्थापना कर सकते हैं। अभिजीत मुहूर्त का समय दोपहर 12:05 से दोपहर 12:53 तक है। यह मुहूर्त अत्यंत शुभ माना जाता है और इसमें राहु काल या किसी अन्य दोष की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
अभिजीत मुहूर्त को सभी दोषों का नाश करने वाला माना जाता है। इसलिए जो भी भक्त अभी तक कलश स्थापित नहीं कर पाए हैं, वे निश्चिंत होकर इस मुहूर्त में विधि-विधान से घट स्थापना कर सकते हैं।
नवरात्रि के नौ दिन: मां दुर्गा की उपासना का पावन समय
चैत्र नवरात्रि के इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा से शुरुआत होती है और नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की आराधना के साथ नवरात्रि का समापन होता है।
Hindu New Year और Vikram Samvat 2083 की शुरुआत नवरात्रि के साथ होना अपने आप में बेहद शुभ संकेत माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि नवरात्रि में की गई पूजा-अर्चना का फल कई गुना बढ़कर मिलता है। भक्तों को इन नौ दिनों में व्रत, उपवास और मां दुर्गा की विशेष उपासना करनी चाहिए।
क्या कहता है इतिहास: विक्रम संवत की परंपरा कितनी पुरानी
विक्रम संवत भारत का सबसे प्राचीन कालगणना पद्धति है, जिसकी शुरुआत सम्राट विक्रमादित्य ने की थी। यह कैलेंडर ग्रेगोरियन कैलेंडर से लगभग 57 साल आगे चलता है। हिंदू धर्म में विक्रम संवत को ही असली नव वर्ष माना जाता है और चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से इसकी शुरुआत होती है।
आज जब Vikram Samvat 2083 शुरू हो रहा है तो इसका मतलब है कि भारतीय कालगणना के अनुसार हम ग्रेगोरियन कैलेंडर से 57 साल आगे हैं। यह हमारी सनातन संस्कृति की समृद्ध विरासत का प्रमाण है।
मुख्य बातें (Key Points)
- Vikram Samvat 2083 की शुरुआत आज चैत्र नवरात्रि के साथ हुई, इस संवत का नाम “रौद्र” है जो उग्रता और चुनौतियों का संकेत देता है।
- नए संवत के राजा बृहस्पति (धर्म और समृद्धि) और मंत्री मंगल (साहस और पराक्रम) हैं; मंगल के कारण विवाद और रक्त संबंधी बीमारियां बढ़ने का खतरा है।
- 17 मई से 15 जून 2026 तक ज्येष्ठ का अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) रहेगा, जिसमें शादी-ब्याह जैसे शुभ कार्य वर्जित रहेंगे।
- जिन भक्तों ने घट स्थापना नहीं की है वे अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:53 के बीच कर सकते हैं।







