Vijaya Ekadashi 2026 Bhog: साल 2026 में फाल्गुन मास का पवित्र महीना भक्तों के लिए एक विशेष सौगात लेकर आ रहा है। अगर आप अपने हर काम में सफलता चाहते हैं और जीवन में आ रही रुकावटों से परेशान हैं, तो 13 फरवरी की तारीख आपके लिए बेहद खास होने वाली है। इस दिन विजया एकादशी का महाव्रत रखा जाएगा, जो सीधे तौर पर सुख, शांति और मोक्ष का रास्ता खोलता है।
सफलता की कुंजी है यह व्रत
हर साल विजया एकादशी का पर्व पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया जाता है। यह दिन जगत के पालनहार Lord Vishnu को समर्पित है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि जो भी भक्त इस पावन तिथि पर सच्चे मन से व्रत रखते हैं और पूजा-पाठ करते हैं, उन्हें अपने जीवन के हर क्षेत्र में विजय यानी सफलता मिलती है।
केवल सफलता ही नहीं, बल्कि इस व्रत का पालन करने से मनुष्य को अंत में मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। नारायण की कृपा पाने के लिए भक्त साल भर इस दिन का इंतजार करते हैं।
इन चीजों का भोग लगाने से बरसती है कृपा
अगर आप चाहते हैं कि Narayan आप पर अपनी विशेष कृपा बरसाएं, तो इस दिन उन्हें कुछ खास चीजों का भोग जरूर लगाएं। वीडियो में दी गई जानकारी के अनुसार, विजया एकादशी के दिन श्री हरि को पंचामृत, केला, पंजीरी और गुड़ का भोग लगाना बेहद शुभ माना जाता है।
इसके अलावा चने की दाल, पीली मिठाई, खीर और माखन-मिश्री का भोग लगाने से भगवान विष्णु बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं।
धन और वैभव का मिलता है आशीर्वाद
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी जातक इस दिन भगवान को इन बताई गई वस्तुओं में से कोई भी प्रसाद अर्पित करता है, उसे जीवन में सुख-शांति के साथ-साथ अपार धन और वैभव की प्राप्ति होती है।
श्री हरि का आशीर्वाद उस घर पर हमेशा बना रहता है। हालांकि, भक्तों को एक बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि भोग लगाते समय वहां आसपास किसी भी प्रकार की तामसिक चीजें मौजूद नहीं होनी चाहिए, वरना पूजा का फल नहीं मिलता।
शुभ मुहूर्त और तिथियों का गणित
वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 12 फरवरी को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 13 फरवरी को दोपहर 2 बजकर 25 मिनट पर होगा।
उदया तिथि के अनुसार, विजया एकादशी का व्रत 13 फरवरी को ही रखा जाएगा। जो भक्त व्रत रखेंगे, वे अपने व्रत का पारण (व्रत खोलना) 14 फरवरी को करेंगे।
जानें क्या है पूजा की सही विधि
इस पवित्र दिन की शुरुआत सुबह जल्दी स्नान करने के बाद श्री हरि की पूजा से करें। प्रभु को पीले फूल, ऋतु फल और तुलसी दल विशेष रूप से चढ़ाएं। पूजा के दौरान भगवान के मंत्रों का जाप करना बहुत फलदायी होता है।
इस दिन Vijaya Ekadashi की व्रत कथा का पाठ जरूर करें और अपनी क्षमता अनुसार विशेष चीजों का दान करें। घर और मंदिर की साफ-सफाई पर खास ध्यान दें और सात्विक भोजन का ही सेवन करें।
विजया एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि भगवान विष्णु की आराधना का एक ऐसा पर्व है जो हार को जीत में बदलने की शक्ति रखता है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली यह एकादशी भक्तों को उनके शत्रुओं और संकटों पर विजय दिलाने वाली मानी जाती है, इसलिए इसका नाम ‘विजया’ एकादशी पड़ा है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
व्रत की तारीख: विजया एकादशी का व्रत 13 फरवरी 2026 को रखा जाएगा।
भोग: भगवान विष्णु को केला, पंचामृत, पंजीरी, गुड़, चने की दाल और माखन-मिश्री का भोग लगाएं।
पारण का समय: व्रत का पारण 14 फरवरी को किया जाएगा।
सावधानी: पूजा के दौरान तामसिक वस्तुओं को दूर रखें और सफाई का विशेष ध्यान दें।








