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The News Air - NEWS-TICKER - Varicose Veins Treatment: पैरों में उभरी नसों से लेकर Nipah Virus तक, जानें सबकुछ

Varicose Veins Treatment: पैरों में उभरी नसों से लेकर Nipah Virus तक, जानें सबकुछ

वैरिकोज वेन्स का लेजर से इलाज संभव, बंगाल में निपाह के दो संदिग्ध मामले, ओटजेम्पिक ड्रिंक का सच जानें

The News Air Team by The News Air Team
गुरूवार, 15 जनवरी 2026
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Varicose Veins Treatment
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Varicose Veins Treatment : पैरों में उभरी हुई टेढ़ी-मेढ़ी नीली नसें यानी वैरिकोज वेन्स आजकल एक बहुत आम समस्या बन गई हैं। फोर्टिस हॉस्पिटल गुरुग्राम के वैस्कुलर सर्जरी विभाग के डायरेक्टर डॉ. हिमांशु वर्मा ने बताया कि इसका इलाज अब बहुत आसान हो गया है और लेजर या ग्लू के जरिए किया जा सकता है। इसी बीच पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के दो संदिग्ध मामले सामने आए हैं जिससे स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है। साथ ही सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ओटजेम्पिक ड्रिंक की सच्चाई भी सामने आई है।


वैरिकोज वेन्स क्या होती हैं

वैरिकोज वेन्स वो खून की नसें हैं जो पांव में मोटी, फूली और उभरी हुई दिखाई देती हैं। आमतौर पर ये नसें नीली, गहरी हरी या बैंगनी रंग की दिखती हैं। शुरू में ये नसें हल्की दिखती हैं लेकिन धीरे-धीरे मोटी होती जाती हैं और इनमें दर्द होने लगता है। ज्यादातर वैरिकोज वेन्स पैर में ही होती हैं।

डॉ. हिमांशु वर्मा बताते हैं कि इसकी और भी स्टेजेस होती हैं। पतली दिखने वाली वेन्स जिन्हें रेटिकुलर वेन्स कहते हैं वो भी इसी का हिस्सा हैं। पांव में स्वेलिंग जो बहुत देर खड़े होने के बाद आती है वो भी इसी से जुड़ी है। पांव के एंकल के आसपास काला रंग होना और कभी-कभी कोई ऐसा घाव बन जाना जो महीनों या सालों से नहीं भर रहा हो यह सब वैरिकोज वेन्स का ही स्पेक्ट्रम है।


वैरिकोज वेन्स क्यों होती हैं

वेन्स में जब खून नीचे से ऊपर हार्ट की तरफ जाता है तो वैल्व नाम का एक स्ट्रक्चर होता है। वैल्व का काम है कि जब हम खड़े हैं या चल रहे हैं तो खून ग्रेविटी के कारण वापस नीचे न आ जाए। कोई भी चीज जिसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाए वो खराब हो सकती है।

लॉन्ग स्टैंडिंग जॉब में वैल्व लगातार काम करते रहते हैं। प्रेगनेंसी में खासकर आखिरी तीन महीनों में यूट्रस लगातार दबाव बना रहा होता है तो वैल्व को ज्यादा काम करना पड़ता है। मोटापे में खून को बॉडी वेट के अगेंस्ट चढ़ना होता है। ऐसी सभी स्थितियों में जहां वैल्व को बहुत ज्यादा काम करना पड़ता है वहां वैल्व फेल हो सकते हैं और वैरिकोज वेन्स हो सकती हैं।


क्या वैरिकोज वेन्स खतरनाक हैं

डॉ. हिमांशु वर्मा कहते हैं कि वैरिकोज वेन्स बेहद आम समस्या है और इसके बारे में खतरनाक जैसा कोई शब्द नहीं होता। कई बार मरीज इसी डर से आते हैं कि नसें दिख रही हैं कहीं कोई दिक्कत न हो जाए, मर न जाऊं, क्लॉट न बन जाए।

वैरिकोज वेन्स से थ्योरेटिकली पांव में क्लॉट बनने का रिस्क बढ़ता है क्योंकि खून थोड़ा रुका हुआ होता है। लेकिन माइनर प्रिकॉशंस के साथ ही लाइफ रिस्क खत्म हो जाता है। वैरिकोज वेन्स से मुख्य रूप से क्वालिटी ऑफ लाइफ प्रभावित होती है। यह लाइफ थ्रेटनिंग सिचुएशन नहीं है।


किसे है वैरिकोज वेन्स का ज्यादा खतरा

वैरिकोज वेन्स का सबसे ज्यादा खतरा उन लोगों को है जो लॉन्ग स्टैंडिंग जॉब करते हैं क्योंकि लंबे समय तक खड़े रहने से वैल्व पर दबाव पड़ता है। प्रेगनेंट महिलाओं को भी खासकर आखिरी तीन महीनों में ज्यादा खतरा होता है क्योंकि यूट्रस का दबाव बना रहता है।

मोटापे से ग्रस्त लोगों में भी यह समस्या ज्यादा देखी जाती है क्योंकि खून को बॉडी वेट के खिलाफ चढ़ना पड़ता है। इसके अलावा एक्टिव स्मोकर्स को भी वैरिकोज वेन्स का ज्यादा खतरा होता है।


वैरिकोज वेन्स से बचाव कैसे करें

जो लोग हाई रिस्क पर हैं उन्हें अपनी लाइफस्टाइल अच्छी रखनी चाहिए। वॉकिंग बहुत जरूरी है क्योंकि जब वॉक करते हैं तो पिंडलियां कंप्रेस होती हैं और इसी से खून नीचे से ऊपर जाता है।

पानी का इंटेक अच्छा रखें। कम पानी पीने से खून गाढ़ा हो जाता है और जमने के चांसेस बढ़ जाते हैं। कम से कम इतना पानी पिएं कि यूरिन क्लियर रहे।

अगर सिम्टम्स हैं या हाई रिस्क जॉब है तो क्लास 2 कंप्रेशन स्टॉकिंग्स ले सकते हैं। ये वैस्कुलर सर्जन की सलाह के बाद साइज के अनुसार दी जा सकती हैं।


वैरिकोज वेन्स का इलाज

अगर पूरी तरह से वैरिकोज वेन्स हो चुकी हैं तो वैस्कुलर सर्जन से मिलकर सर्जरी के बारे में बात कर सकते हैं। इलाज बहुत सिंपल है और लेजर या ग्लू के जरिए किया जा सकता है।

डॉ. हिमांशु वर्मा कहते हैं कि बहुत बड़ा मिथ है कि बहुत बड़ी सर्जरी होती है। ऐसा नहीं है। इस सर्जरी में मरीज ऑपरेशन टेबल तक चल के जा सकता है और इमीडिएटली चल के वापस आ सकता है। न तो बेहोश करना होता है, न मेजर हॉस्पिटलाइजेशन की जरूरत होती है और न ही आईसीयू जाना होता है। अगले दिन ही काम पर लौट सकते हैं।

कुल मिलाकर वैरिकोज वेन्स को न तो इग्नोर करना है और न ही इनसे डरना है। अगर वैरिकोज वेन्स हैं तो डॉक्टर को दिखाएं और जो सलाह वो दें उसे मानें।


पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के दो संदिग्ध मामले

पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के दो संदिग्ध मामले सामने आए हैं। दोनों मामले उत्तर 24 परगना जिले के एक प्राइवेट अस्पताल में मिले हैं। मरीजों में शामिल हैं एक 22 साल के पुरुष और एक 25 साल की महिला। दोनों पेशे से नर्स हैं और इसी अस्पताल में काम करते हैं। फिलहाल दोनों का इलाज चल रहा है।

बीमार पड़ने के बाद दोनों के सैंपल एम्स कल्याणी की वायरस रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैब में भेजे गए थे। शुरुआती रिपोर्ट में निपाह वायरस इंफेक्शन का शक जताया गया है।


सरकार की तैयारी

पश्चिम बंगाल की चीफ सेक्रेटरी नंदिनी चक्रवर्ती का कहना है कि हेल्थ डिपार्टमेंट ने कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू कर दी है। दोनों नर्सेज पिछले दिनों जितने भी लोगों से मिले हैं सब तक पहुंचने की कोशिश जारी है। दोनों के परिवार वाले भी मेडिकल सर्विलेंस में हैं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि वायरस इन तक पहुंचा कैसे।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बताया कि निपाह वायरस के मामले बढ़ने से रोकने के लिए नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पांस टीम बनाई गई है। इस टीम में कई संस्थाओं के एक्सपर्ट शामिल हैं। पश्चिम बंगाल में मामले मिलने के बाद झारखंड सरकार भी सतर्क हो गई है और सभी जिलों के सिविल सर्जनों को अलर्ट मोड में रहने का निर्देश दिया गया है।

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निपाह वायरस क्या है

मेदांता हॉस्पिटल नोएडा के इंटरनल मेडिसिन विभाग के एसोसिएट कंसल्टेंट डॉ. सौरदीप चौधरी बताते हैं कि निपाह वायरस एक जूनोटिक वायरस है यानी यह जानवरों से इंसानों में फैलता है।

निपाह वायरस मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों से फैलता है। जब चमगादड़ फल खाते हैं तो उनके काटे हुए फल जमीन पर गिर सकते हैं। अगर यह फल कोई जानवर जैसे सूअर या कोई इंसान खा ले तो निपाह वायरस का इंफेक्शन हो सकता है।

संक्रमित व्यक्ति के बहुत पास रहने, उसकी लार, थूक, पेशाब या खून के संपर्क में आने से भी यह वायरल इंफेक्शन हो सकता है।


निपाह वायरस के लक्षण

निपाह वायरस के लक्षण वायरस के संपर्क में आने के 4 से 14 दिनों बाद दिखाई देते हैं। शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, सिर दर्द, उबकाई, उल्टी, गले में दर्द और थकान शामिल है।

गंभीर लक्षणों में चक्कर आना, सांस लेने में दिक्कत होना, भ्रम होना, दौरे पड़ना, बेहोशी या कोमा में जाना और दिमाग में सूजन आ जाना शामिल है। कई मामलों में हालत 48 घंटों के अंदर बिगड़ जाती है।


निपाह वायरस का इलाज और बचाव

अगर किसी व्यक्ति में इंफेक्शन का शक होता है तो आरटीपीसीआर टेस्ट किया जाता है। निपाह वायरस का कोई स्पेसिफिक इलाज नहीं है इसलिए लक्षणों के हिसाब से इलाज होता है। बुखार, दर्द और दौरे रोकने के लिए दवाएं दी जाती हैं। मरीज को भरपूर आराम करने को कहा जाता है। शरीर में पानी की कमी न हो इसका खास ख्याल रखा जाता है। सांस लेने में तकलीफ हो तो ऑक्सीजन या वेंटिलेटर पर रखा जा सकता है।

WHO के मुताबिक निपाह वायरस से इंफेक्ट होने वाले 40 से 75 प्रतिशत लोगों की मौत हो जाती है। इसलिए तुरंत इलाज कराना बहुत जरूरी है।

बचाव के लिए साफ-सफाई का खास ख्याल रखें और खाने से पहले हाथ जरूर धोएं। चमगादड़ और सूअर के संपर्क में आने से बचें। गिरे हुए या आधे कटे हुए फल न खाएं। निपाह से ग्रसित मरीजों से दूरी बनाएं और मास्क लगाएं। इस तरह आप खुद को निपाह वायरस से बचा सकते हैं।


पश्चिम बंगाल में निपाह का इतिहास

पिछले 3 सालों से लगातार निपाह वायरस के कुछ मामले केरल में मिले थे। पश्चिम बंगाल की बात करें तो सिलीगुड़ी में 2001 में निपाह आउटब्रेक हुआ था। तब 66 मरीजों में से 45 की मौत हो गई थी। 2007 में नदिया जिले में पांच लोगों को निपाह वायरस का इंफेक्शन हुआ था और सभी की मौत हो गई थी।


ओटजेम्पिक ड्रिंक का सच

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ओटजेम्पिक ड्रिंक को वजन घटाने वाली जादुई ड्रिंक कहा जा रहा है। इसका नाम ओज़ेम्पिक से मिलता-जुलता है और ऐसा जानबूझकर किया गया है। ओज़ेम्पिक डायबिटीज की एक दवा है जो वजन घटाने में बहुत असरदार है। दुनिया भर के कई सेलिब्रिटीज ने इसकी मदद से खूब वजन घटाया है।

ओटजेम्पिक ड्रिंक बनाने की कोई तय रेसिपी नहीं है। ज्यादातर लोग आधा कप ओट्स को एक गिलास पानी या दूध में मिलाते हैं और ब्लेंडर में डालकर पीस लेते हैं। कुछ लोग इसमें नींबू का रस और दालचीनी डालते हैं तो कुछ पहले से भीगे हुए ओट्स का इस्तेमाल करते हैं।

दावा है कि बिल्कुल ओज़ेम्पिक की तरह ओटजेम्पिक ड्रिंक भी तेजी से वजन घटाती है। इस ड्रिंक को पीने के बाद पेट देर तक भरा हुआ महसूस होता है और भूख कम लगती है जिससे वजन घटाने में मदद मिलती है। कई लोग तो ओटजेम्पिक को ओज़ेम्पिक का नेचुरल विकल्प भी बता रहे हैं।


क्या ओटजेम्पिक से वजन घटता है

डाइट्स एंड मोर की फाउंडर डाइटिशियन श्रेया कतियाल बताती हैं कि ओटजेम्पिक ड्रिंक में ओट्स का इस्तेमाल होता है। ओट्स बीटा ग्लूकन का अच्छा सोर्स है जो एक तरह का सॉल्युबल फाइबर है। यह फाइबर पानी में घुल जाता है और जेल जैसा पदार्थ बना लेता है। इसकी वजह से पाचन धीमा हो जाता है और पेट देर तक भरा महसूस होता है। जब भूख नहीं लगती तो व्यक्ति कम कैलोरीज खाता है जिससे वजन घटाने में मदद मिलती है।

लेकिन सिर्फ ओटजेम्पिक से वेट लॉस टारगेट पूरा करने की कोशिश न करें। ऐसा कोई साइंटिफिक प्रूफ नहीं है कि इससे कितना वेट लॉस होगा और इसके क्या फायदे होंगे।


ओटजेम्पिक की सीमाएं

सिर्फ ओट्स खाकर या पीकर हमेशा के लिए वजन नहीं घटाया जा सकता। यह कोई मैजिक ड्रिंक नहीं है। ओटजेम्पिक में फाइबर ज्यादा है लेकिन प्रोटीन, हेल्दी फैट और बाकी पोषक तत्व कम हैं। ज्यादा फाइबर से कुछ लोगों को ब्लोटिंग हो सकती है, गैस बन सकती है या पेट में ऐंठन हो सकती है।

हां, ओटजेम्पिक में डाले जाने वाले ओट्स हेल्दी डाइट का हिस्सा जरूर हो सकते हैं।


सही तरीके से वजन कैसे घटाएं

डाइटिशियन श्रेया कतियाल की सलाह है कि हेल्दी वेट लॉस के लिए किसी एक चीज के भरोसे न रहें। बैलेंस्ड खाना खाएं जिसमें प्रोटीन, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, हेल्दी फैट, विटामिंस और मिनरल्स सब कुछ हो। शुगर और प्रोसेस्ड चीजें खाना कम करें और पानी खूब पिएं। सबसे जरूरी बात रोज थोड़ी देर एक्सरसाइज जरूर करें ताकि मांसपेशियां कमजोर न हों।


मुख्य बातें (Key Points)
  • वैरिकोज वेन्स का इलाज अब बहुत आसान है और लेजर या ग्लू से किया जा सकता है जिसमें मरीज अगले दिन ही काम पर लौट सकता है
  • पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के दो संदिग्ध मामले मिले हैं जिसमें दोनों नर्स हैं और उनका इलाज चल रहा है
  • WHO के मुताबिक निपाह वायरस से संक्रमित 40 से 75 प्रतिशत लोगों की मौत हो जाती है इसलिए तुरंत इलाज जरूरी है
  • ओटजेम्पिक ड्रिंक कोई मैजिक ड्रिंक नहीं है और वजन घटाने के लिए बैलेंस्ड डाइट और एक्सरसाइज जरूरी है

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: वैरिकोज वेन्स का इलाज कैसे होता है?

वैरिकोज वेन्स का इलाज लेजर या ग्लू के जरिए किया जाता है। यह बहुत सिंपल प्रक्रिया है जिसमें मरीज को बेहोश नहीं करना पड़ता और अगले दिन ही काम पर लौट सकता है।

प्रश्न: निपाह वायरस कैसे फैलता है?

निपाह वायरस मुख्य रूप से चमगादड़ों से फैलता है। उनके काटे हुए फल खाने से या संक्रमित व्यक्ति की लार, थूक, पेशाब या खून के संपर्क में आने से यह फैल सकता है।

प्रश्न: निपाह वायरस से बचाव कैसे करें?

गिरे हुए या आधे कटे फल न खाएं, चमगादड़ और सूअर से दूर रहें, खाने से पहले हाथ धोएं, निपाह मरीजों से दूरी बनाएं और मास्क पहनें।

प्रश्न: क्या ओटजेम्पिक ड्रिंक से वजन घटता है?

ओटजेम्पिक में फाइबर होता है जो पेट देर तक भरा रखता है लेकिन यह कोई मैजिक ड्रिंक नहीं है। वजन घटाने के लिए बैलेंस्ड डाइट और एक्सरसाइज जरूरी है।

प्रश्न: वैरिकोज वेन्स किसे ज्यादा होती हैं?

लंबे समय तक खड़े रहने वाले लोग, प्रेग्नेंट महिलाएं, मोटापे से ग्रस्त लोग और स्मोकर्स को वैरिकोज वेन्स का ज्यादा खतरा होता है।

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