V2V Technology India : भारत सरकार देश की सड़कों को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा तकनीकी कदम उठाने जा रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari ने बताया है कि 2026 के अंत तक पूरे देश में व्हीकल-टू-व्हीकल यानी V2V कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इस तकनीक का मकसद सड़क हादसों को रोकना, समय रहते अलर्ट देना और हजारों जानें बचाना है।

क्या है V2V कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी
V2V एक ऐसी वायरलेस टेक्नोलॉजी है, जिसमें गाड़ियां आपस में सीधे बातचीत करेंगी। इसके लिए न मोबाइल नेटवर्क की जरूरत होगी, न इंटरनेट और न ही सैटेलाइट कनेक्शन की। जैसे ही दो वाहन एक-दूसरे के बेहद करीब आएंगे, सिस्टम तुरंत सिग्नल भेजकर ड्राइवर को अलर्ट कर देगा।
कैसे करेगा काम यह सिस्टम
हर वाहन में सिम कार्ड जैसी एक खास डिवाइस लगाई जाएगी, जिसे ऑन-बोर्ड यूनिट कहा जाता है। यह यूनिट आसपास मौजूद गाड़ियों से लगातार सिग्नल लेगी और भेजेगी। इसके जरिए सड़क पर चल रहे सभी वाहनों के बीच एक सेफ्टी नेटवर्क बनेगा, जो 360 डिग्री काम करेगा यानी आगे, पीछे और दोनों तरफ से आने वाले वाहनों की जानकारी ड्राइवर तक पहुंचेगी।

कोहरे और तेज रफ्तार हादसों में बनेगा ‘तीसरी आंख’
यह तकनीक खासतौर पर घने कोहरे में, सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों से टकराने और पीछे से तेज रफ्तार में आने वाले वाहनों के कारण होने वाले हादसों को रोकने में मददगार होगी। जब विजिबिलिटी लगभग शून्य होती है, तब यह सिस्टम ड्राइवर के लिए तीसरी आंख की तरह काम करेगा।
सरकार की तैयारी और टाइमलाइन
V2V टेक्नोलॉजी पर राज्य परिवहन मंत्रियों की सालाना बैठक में विस्तार से चर्चा हो चुकी है। परिवहन मंत्रालय इसे 2026 के अंत तक नोटिफाई करने की तैयारी में है। शुरुआत में यह सिस्टम नई गाड़ियों में लगाया जाएगा, बाद में चरणबद्ध तरीके से अन्य वाहनों में भी लागू किया जाएगा।
₹5000 करोड़ की परियोजना, शुल्क अभी तय नहीं
सड़क परिवहन मंत्रालय के सचिव बी. उमाशंकर के मुताबिक यह रोड सेफ्टी की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब ₹5000 करोड़ बताई गई है। हालांकि उपभोक्ताओं से लिए जाने वाले शुल्क को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
ड्राइवर की जिम्मेदारी रहेगी अहम
सरकारी अधिकारियों ने साफ किया है कि यह तकनीक केवल चेतावनी देगी। अलर्ट मिलने के बाद गाड़ी रोकना या दिशा बदलना ड्राइवर की जिम्मेदारी होगी। यानी तकनीक मदद करेगी, लेकिन अंतिम फैसला इंसान को ही लेना होगा।
बसों की खराब डिजाइन पर भी चिंता
इस दौरान गडकरी ने बसों की खराब डिजाइन पर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि गलत बस बॉडी डिजाइन के कारण अब तक कम से कम छह बड़े हादसों में 135 लोगों की जान जा चुकी है। अब मौजूदा बसों में भी अतिरिक्त सेफ्टी फीचर्स जैसे फायर एक्सटिंग्विशर, ड्राइवर ड्राउननेस डिटेक्शन सिस्टम और यात्रियों के लिए इमरजेंसी हैमर लगाए जाएंगे।
विश्लेषण (Analysis)
V2V टेक्नोलॉजी भारत के लिए सिर्फ एक नई सुविधा नहीं, बल्कि रोड सेफ्टी में गेमचेंजर साबित हो सकती है। जहां आज हादसों की बड़ी वजह समय पर सूचना न मिलना है, वहीं यह सिस्टम सेकेंडों में अलर्ट देकर नुकसान को टाल सकता है। अगर इसे सही तरीके से लागू किया गया, तो यह तकनीक भारत को उन गिने-चुने देशों की कतार में खड़ा कर देगी जहां स्मार्ट और सुरक्षित ट्रैफिक सिस्टम मौजूद है।
मुख्य बातें (Key Points)
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2026 के अंत तक देशभर में V2V टेक्नोलॉजी लागू करने की योजना
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बिना इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क के गाड़ियां करेंगी आपस में बातचीत
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कोहरे और तेज रफ्तार हादसों को रोकने में मदद
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परियोजना की अनुमानित लागत ₹5000 करोड़
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बसों में भी अतिरिक्त सेफ्टी फीचर्स लगाने की तैयारी








