US Russia Nuclear Treaty के खत्म होने से दुनिया एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है। अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों को नियंत्रित करने वाली आखिरी और सबसे अहम संधि New START Treaty अब समाप्त हो चुकी है। इसके साथ ही पहली बार ऐसा हुआ है कि बीते 50 वर्षों में दुनिया की दो सबसे बड़ी परमाणु ताकतों पर हथियारों की संख्या को लेकर कोई कानूनी पाबंदी नहीं रही।
क्या थी न्यू START संधि
न्यू START संधि अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों, खासतौर पर न्यूक्लियर वॉरहेड्स और मिसाइल सिस्टम की संख्या सीमित करने के लिए बनाई गई थी। इस संधि का मकसद परमाणु जंग के खतरे को कम करना और पारदर्शिता बनाए रखना था। इसे वर्ष 2010 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में साइन किया गया था और 2011 से यह लागू हुई थी।
अब हथियारों पर कोई कानूनी सीमा नहीं
संधि के खत्म होते ही अमेरिका और रूस के पास मौजूद परमाणु हथियारों की संख्या पर कोई औपचारिक निगरानी नहीं बची है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह सिर्फ हथियारों की गिनती का मामला नहीं, बल्कि भरोसे और पारदर्शिता के उस तंत्र का अंत है, जिसे दशकों में खड़ा किया गया था।
परमाणु ताकतों का मौजूदा आंकड़ा
फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट के अनुसार रूस के पास करीब 5,459 और अमेरिका के पास लगभग 5,177 न्यूक्लियर वॉरहेड होने का अनुमान है। वहीं चीन ने भी अपने परमाणु कार्यक्रम को तेज कर दिया है। अनुमान है कि चीन के पास करीब 600 परमाणु वॉरहेड हैं और 2030 तक यह संख्या 1,000 से ज्यादा हो सकती है।
चीन बन सकता है नई दौड़ का बड़ा खिलाड़ी
विशेषज्ञों को डर है कि न्यू START के खत्म होने से एक नई वैश्विक परमाणु हथियार दौड़ शुरू हो सकती है, जिसमें चीन एक बड़े खिलाड़ी के तौर पर उभरेगा। अब यह संकट सिर्फ अमेरिका और रूस तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा इससे जुड़ गई है।
पोप की अपील और नेताओं के अलग-अलग सुर
इस खतरे की गंभीरता को देखते हुए ईसाई धर्मगुरु पोप लियो ने अमेरिका और रूस से संधि को बचाने की अपील की है। उन्होंने डर और अविश्वास की राजनीति छोड़ने की बात कही।
दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अगर यह संधि खत्म भी होती है, तो इससे बेहतर और बड़ी डील की जा सकती है। वहीं रूस का आरोप है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रस्तावों पर अमेरिका की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं आया।
कोल्ड वॉर 2.0 का खतरा
मौजूदा संकेत बताते हैं कि परमाणु हथियारों की नई दौड़ शुरू हो चुकी है। अमेरिका और रूस दोनों नए और अत्याधुनिक हथियार विकसित कर रहे हैं। एआई सपोर्टेड हथियार, न्यूक्लियर टॉरपीडो और हाइपरसोनिक मिसाइल जैसी तकनीकें सामने आ रही हैं। जानकार इसे ‘कोल्ड वॉर 2.0’ की शुरुआत मान रहे हैं, जो पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक हो सकती है।
मानवता के लिए बड़ी चेतावनी
1986 में दुनिया में करीब 70,000 परमाणु हथियार थे, जो 2025 तक घटकर लगभग 12,000 रह गए थे। लेकिन अब जब हथियार नियंत्रण संधियां खत्म हो रही हैं और देश अपने हथियारों को आधुनिक बना रहे हैं, तो न्यू START का अंत मानवता के लिए एक बड़ी चेतावनी माना जा रहा है।
आखिरी रास्ता: बातचीत और नियंत्रण
विशेषज्ञ मानते हैं कि परमाणु युद्ध से बचने का एकमात्र रास्ता आपसी बातचीत, भरोसा और हथियार नियंत्रण ही है। अगर यह रास्ता बंद हुआ, तो दुनिया एक ऐसे दौर में प्रवेश कर सकती है, जहां एक छोटी चूक भी विनाशकारी साबित हो सकती है।
मुख्य बातें (Key Points)
- अमेरिका-रूस के बीच न्यू START संधि खत्म
- 50 साल बाद परमाणु हथियारों पर कोई कानूनी रोक नहीं
- चीन तेजी से बढ़ा रहा परमाणु जखीरा
- विशेषज्ञों को नई वैश्विक परमाणु दौड़ का डर








