शनिवार, 28 मार्च 2026
The News Air
No Result
View All Result
  • होम
  • राष्ट्रीय
  • पंजाब
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • अंतरराष्ट्रीय
  • सियासत
  • नौकरी
  • LIVE
  • बिज़नेस
  • काम की बातें
  • स्पेशल स्टोरी
  • टेक्नोलॉजी
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
    • हेल्थ
    • धर्म
    • मनोरंजन
  • WEB STORIES
  • होम
  • राष्ट्रीय
  • पंजाब
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • अंतरराष्ट्रीय
  • सियासत
  • नौकरी
  • LIVE
  • बिज़नेस
  • काम की बातें
  • स्पेशल स्टोरी
  • टेक्नोलॉजी
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
    • हेल्थ
    • धर्म
    • मनोरंजन
  • WEB STORIES
No Result
View All Result
The News Air
No Result
View All Result

The News Air - Breaking News - US Iran War: एक महीने बाद भी नहीं थम रहा युद्ध, अमेरिका की बढ़ी मुश्किलें

US Iran War: एक महीने बाद भी नहीं थम रहा युद्ध, अमेरिका की बढ़ी मुश्किलें

अमेरिका के सर्जिकल स्ट्राइक के बावजूद ईरान ने पलटी बाजी, ट्रंप के 15 पॉइंट पीस प्रपोजल को किया सिरे से खारिज

The News Air Team by The News Air Team
शनिवार, 28 मार्च 2026
A A
0
US Iran War
104
SHARES
694
VIEWS
ShareShareShareShareShare

US Iran War का एक महीना पूरा होने को है और नतीजे हर किसी को चौंका रहे हैं, खासकर खुद अमेरिका को। 28 फरवरी को जब अमेरिका ने ईरान पर सर्जिकल स्ट्राइक की और आयतुल्लाह खामेनेई समेत 40 शीर्ष नेताओं को मार गिराया, तो दुनिया को लगा कि ईरान की कहानी यहीं खत्म हो जाएगी। सड़कों पर क्रांति आएगी, सत्ता पलट होगी और डोनल्ड ट्रंप खुद को विजेता घोषित कर देंगे। लेकिन 28 मार्च आते-आते कहानी पूरी तरह पलट चुकी है।

आज की तारीख में अमेरिका को पीछे धकेल दिया गया है। ईरान तय कर रहा है कि युद्ध होगा या नहीं, सीजफायर होगा या नहीं। एक लंबे युद्ध की तैयारी साफ दिख रही है और ट्रंप को बूट्स ऑन द ग्राउंड यानी अपने सैनिकों को जमीन पर उतारने की जरूरत महसूस हो रही है।

क्या ईरान जीत सकता है यह युद्ध?

एक महीने पहले यह सवाल मजाक लगता, लेकिन अब यह सवाल पूछना जरूरी हो गया है कि क्या ईरान इस US Iran War को जीत सकता है? जीत का मतलब यह नहीं कि मुजतबा खामेनेई वॉशिंगटन डीसी में ईरान का परचम लहराएंगे। जीत का मतलब है कि ईरान की कुछ लीडरशिप सुरक्षित बच जाए, उसका कमांड एंड कंट्रोल स्ट्रक्चर बना रहे, वो अपने बैलिस्टिक मिसाइल स्टॉकपाइल को जब चाहे इस्तेमाल कर सके, जहां चाहे हमला कर सके और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को कंट्रोल करके ग्लोबल इकॉनमी को अपनी मर्जी से चोक कर सके।

अगर इसी पैमाने पर देखें तो ईरान इस वक्त तकनीकी रूप से यह युद्ध जीत रहा है। वो अमेरिका को डिक्टेट कर रहा है और ट्रंप बेबसी में कभी सीजफायर का ऑफर दे रहे हैं, कभी धमकी दे रहे हैं और कभी बिल्कुल भ्रमित बातें कर रहे हैं।

ट्रंप का 15 पॉइंट पीस प्रपोजल रिजेक्ट, कोई बातचीत नहीं

पिछले 24 से 48 घंटों में स्थिति और भी बदल गई है। ईरान ने ट्रंप के 15 पॉइंट पीस प्रपोजल को सिरे से खारिज कर दिया है। न कोई बातचीत हो रही है, न कोई डायलॉग चल रहा है। भारतीय मीडिया में इस मसले पर काफी कवरेज हुई थी लेकिन हकीकत यह है कि ईरान इस वक्त ट्रंप को गंभीरता से ले ही नहीं रहा है।

इस बीच भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी कहा कि भारत मीडिएशन नहीं कराएगा, जबकि पिछले साल तक भारत यही कह रहा था कि वही एक देश है जो यूक्रेन, रूस, इजराइल और ईरान सबसे बातचीत कर सकता है।

IRGC की खुली धमकी: UAE और बहरेन के होटलों पर हमले की चेतावनी

ईरान ने अमेरिका की बूट्स ऑन द ग्राउंड स्ट्रैटेजी सुनकर सीधे तौर पर यूएई को निशाने पर ले लिया है। ईरान ने साफ कह दिया है कि अगर अमेरिका ने जमीनी हमला किया तो वो यूएई पर धावा बोल देगा, उसे कैप्चर कर लेगा और जो भी देश अमेरिका के ग्राउंड इन्वेजन को सपोर्ट करेगा उस पर हमला कर देगा।

IRGC ने एक खुली धमकी दी है कि आने वाले घंटों में वो यूनाइटेड अरब एमिरेट्स, बहरेन और दमिश्क में उन होटलों पर हमला करेगा जहां अमेरिकी सैनिक छुपे हुए हैं। दरअसल ईरान ने पहले ही गल्फ में 13 अमेरिकी सैन्य अड्डों को नष्ट कर दिया है। वहां अमेरिकी सैनिक न रह सकते हैं, न काम कर सकते हैं। जो बचे हुए सैनिक हैं वो सिविलियन इलाकों और होटलों में छुपे हुए हैं। तकनीकी रूप से देखें तो अमेरिकी सैनिक अरब की नागरिक आबादी को ह्यूमन शील्ड की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।

ईरान ने 10 लाख लड़ाकों को किया मोबिलाइज

US Iran War के एक महीने के भीतर ईरान ने युद्ध के दायरे को काफी बढ़ा दिया है। IRGC ने 10 लाख से ज्यादा लड़ाकों को मोबिलाइज किया है और यहां तक कि 12 साल के बच्चों को भी युद्ध में शामिल होने की अनुमति दे दी है। इस फैसले पर बहस हो सकती है कि यह सही है या गलत, लेकिन इजराइल जो लेबनान और गाजा में कर रहा है उसके सामने अच्छे-बुरे की सीमा रेखा पहले ही धुंधली हो चुकी है।

उधर IDF के चीफ ने खुद स्वीकार किया है कि इजराइल की सेना कोलैप्स कर सकती है क्योंकि उसके पास मैनपावर की भारी कमी हो रही है। दुनिया की सबसे ताकतवर मानी जाने वाली जेनोसाइड मशीनरी खुद को ओवरस्ट्रेच्ड महसूस कर रही है।

ट्रंप ने एनर्जी प्लांट पर बमबारी का प्लान 10 दिन के लिए टाला

पेंटागन 10,000 सैनिकों को ईरान भेजने पर विचार कर रहा है लेकिन अमेरिका रुक रहा है, सोच रहा है। बूट्स ऑन द ग्राउंड डालने से पहले शायद वो इतिहास को देख रहा है कि कहीं वियतनाम, इराक और अफगानिस्तान जैसा हाल फिर से न हो जाए।

इसीलिए ट्रंप ने ईरान के एनर्जी प्लांट पर बम गिराने का जो प्लान था उसे 10 दिन के लिए टाल दिया है। नई डेडलाइन 6 अप्रैल तय की गई है। ट्रंप कह रहे हैं कि ईरान ने उनसे भीख मांगी है जबकि ईरान का जवाब है कि उसने कोई पॉज नहीं मांगा है। ईरान कह रहा है: “Come to Iran, Habibi”। उधर हूती भी कह रहे हैं कि वो रेड सी को ब्लॉक करने के लिए तैयार हैं।

अमेरिका हारा तो क्या होगा? छह बड़े खतरे जो बदल देंगे दुनिया का नक्शा

अगर ईरान इसी तरह अपनी पोजीशन बनाए रखता है और अमेरिका इस होल्ड को नहीं तोड़ पाता तो अमेरिका के भविष्य और उसकी ग्लोबल इमेज पर गहरा असर पड़ेगा। यह US Iran War सिर्फ स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज खोलने की बात नहीं है, इसका दायरा बहुत बड़ा है:

पहला खतरा: पेट्रो डॉलर का क्षरण। जब ऑयल प्राइस इतनी अस्थिर होंगी और अमेरिका पर भरोसा कम होगा तो गल्फ देश अपनी सुरक्षा गारंटी के लिए रूस और चीन से बात करेंगे। सऊदी अरब चीन को युआन में तेल बेचना शुरू कर देगा। धीरे-धीरे अमेरिका की 1970 से चली आ रही वित्तीय सर्वोच्चता और डॉलर की वर्चस्वता खत्म होने लगेगी।

दूसरा खतरा: गल्फ सहयोगियों का भरोसा टूटना। गल्फ देशों को समझ आ चुका है कि अमेरिका पर अपनी सुरक्षा के लिए निर्भर नहीं रहा जा सकता। सऊदी अरब, यूएई और बाकी देश वॉशिंगटन से ध्यान हटाकर चीन और रूस से सुरक्षा की मांग करेंगे। इससे अमेरिका को गल्फ से धीरे-धीरे बाहर खदेड़ दिया जाएगा।

तीसरा खतरा: न्यूक्लियर प्रसार का संकट। ईरान अपने न्यूक्लियर रिकंस्ट्रक्शन को तेज करेगा। उसके पास पहले से ही इनरिच्ड यूरेनियम है जिसे ट्रंप नष्ट नहीं कर पाए हैं। इसे देखकर तुर्की, मिस्र और सऊदी अरब भी कहेंगे कि उनके पास भी न्यूक्लियर विकल्प होना चाहिए। जो नॉन प्रोलिफरेशन रिजीम इतने सालों तक न्यूक्लियर हथियारों के प्रसार को रोके रखा, वो और कमजोर हो जाएगा। यह इजराइल के लिए सबसे बड़ा दुःस्वप्न है क्योंकि उसने हमेशा यही माना कि सिर्फ उसी के पास न्यूक्लियर हथियार हो सकते हैं।

चौथा खतरा: प्रॉक्सी नेटवर्क की वापसी। हिजबुल्लाह, हूती, हमास और इराक की मिलिशिया सब और भी ज्यादा ताकत से वापस आएंगे। चीन और रूस इन्हें हथियार भी सप्लाई कर देंगे। इसका मतलब है कि अमेरिकी संपत्तियों, इजराइली ठिकानों और ग्लोबल शिपिंग पर अनिश्चितकालीन छोटे-मोटे हमले चलते रहेंगे।

पांचवां खतरा: स्ट्रैटेजिक डिस्ट्रैक्शन। अगर अमेरिका इस युद्ध में फंसा रहा तो चीन पैसिफिक में अपना दबदबा कायम करेगा। बीजिंग बैठकर नोट्स ले रहा है कि अमेरिकी ताकत कितनी खिंची हुई है। एक लॉन्ड्री रूम में आग लगने से अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर वापस लौट रहा है, तो अमेरिकी शक्ति और अजेयता कितनी बड़ी दिखावा है यह चीन और रूस दोनों समझ रहे हैं। जापान, फिलीपींस, ऑस्ट्रेलिया जैसे इंडो-पैसिफिक देश जो अमेरिका पर सुरक्षा के लिए निर्भर थे उन्हें अब कहीं और देखना पड़ेगा।

छठा खतरा: अमेरिकी घरेलू मोर्चे पर तूफान। अमेरिका में पेट्रोल के दाम पहले से बढ़ रहे हैं। अगर बूट्स ऑन द ग्राउंड किए गए तो सैनिकों की मौतें तय हैं। इससे अमेरिकी जनता और ज्यादा ट्रंप विरोधी हो जाएगी। मिडटर्म इलेक्शन में डेमोक्रेट्स ज्यादा ताकतवर हो सकते हैं, कांग्रेस फंडिंग काट सकती है और जैसा वियतनाम और अफगानिस्तान में हुआ था, अमेरिका को जबरन वापसी करनी पड़ सकती है।

ईरान की जमीन अमेरिका के लिए क्यों है मौत का जाल?

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेक्सेथ ने खुद कहा है कि यह युद्ध न इराक है न अफगानिस्तान और लंबे समय तक ईरान में रहने का कोई एजेंडा नहीं है। लेकिन सच्चाई यह है कि ईरान की भौगोलिक स्थिति किसी भी जमीनी हमले को बेहद खतरनाक बना देती है।

ईरान इराक से चार गुना बड़ा देश है जहां 8 करोड़ से ज्यादा लोग रहते हैं। ज़ाग्रोस और अल्बुर्ज पर्वत श्रृंखलाएं देश के 50 प्रतिशत हिस्से को कवर करती हैं जो प्राकृतिक किल ज़ोन और चोक पॉइंट्स बनाती हैं। ईरान के शहर और न्यूक्लियर साइट्स देश के अंदरूनी हिस्सों में हैं जिन्हें यही पहाड़ी इलाका सुरक्षा देता है। अगर अमेरिकी सेना को जमीनी स्तर पर अंदर घुसना होगा तो उन्हें पूर्वनिर्धारित बॉटलनेक से गुजरना पड़ेगा और इन्हीं बॉटलनेक पर उन्हें मार गिराया जाएगा। यही समस्या 1980 में इराक को झेलनी पड़ी थी और 2000 साल पहले रोमन सेनाओं को भी।

अमेरिकी रणनीतिकार यह बात जानते हैं कि इराक की तरह यहां सपाट रेगिस्तान नहीं है। यह एक पहाड़ी-रेगिस्तानी हाइब्रिड नरक है।

खर्ग आइलैंड पर कब्जे का प्लान भी उतना आसान नहीं

अमेरिका की एक योजना यह भी है कि खर्ग आइलैंड को कंट्रोल कर लिया जाए और ईरान से ब्लैकमेल किया जाए कि जब तक हॉर्मुज नहीं खोलोगे तब तक हम यह द्वीप नहीं छोड़ेंगे। लेकिन यह सोचने में जितना आसान लगता है, लॉजिस्टिक रूप से उतना ही भयानक है।

एलीट यूनिट्स, मरीन्स, 82nd एयरबोर्न, स्पेशल फोर्सेज भेजे जा सकते हैं लेकिन इनका काम रेड करना होता है। अगर ईरान के अंदर लंबे समय तक बैठे रहना है तो एक मजबूत और लंबी सप्लाई सपोर्ट लाइन चाहिए। लेकिन ईरान ने साफ कर दिया है कि जिस देश से अमेरिका सप्लाई लाइन बनाएगा, ईरान उस देश पर ही हमला बोल देगा।

IRGC की मोज़ेक डॉक्ट्रिन: 40 साल से इसी दिन की तैयारी

IRGC की जो मोज़ेक डॉक्ट्रिन है वो इस युद्ध को अमेरिका के लिए और भी खतरनाक बनाती है। इसमें स्वतंत्र कमांड कंट्रोल स्ट्रक्चर है। प्रांतीय स्तर पर सबको खुली आजादी है कि जो सही समझो वो करो। कोई आदेश तेहरान से नहीं आएगा, जैसा स्थानीय कमांडर सही समझेगा वैसा करेगा। यह इराक की तरह ढहने वाली सेना नहीं है। यह ईरान की सेना है जिसने 40 साल से इसी दिन की तैयारी की है। ईरान-इराक युद्ध, सीरिया युद्ध और इराक की प्रॉक्सी जंगों से इन्होंने सीखा है।

इसीलिए ट्रंप जो लिमिटेड ग्राउंड प्रेजेंस की बात सोच रहे हैं वो गुरिल्ला वॉरफेयर के सामने बुरी तरह मात खाएगी। यह स्थिति वियतनाम और अफगानिस्तान से चार गुना ज्यादा जटिल है और चार गुना ज्यादा जानें जा सकती हैं। IRGC के कमांडर खुलेआम कह रहे हैं कि वो ईरान को अमेरिकियों के लिए कब्रगाह बनाकर रखेंगे।

याद रखिए कि ईरान को इस युद्ध को जीतने की जरूरत नहीं है। उसे बस अमेरिका पर इतनी भारी कीमत थोपनी है कि वो वापसी को मजबूर हो जाए। हॉर्मुज पर माइन बिछा दो, अमेरिकी बेस पर हिट एंड रन अटैक कर दो, प्रॉक्सी स्ट्राइक कर दो और स्पेशल फोर्सेज के कुछ सैनिकों को भी अगर मार दिया तो अमेरिका में हाहाकार मच जाएगा।

नेतन्याहू ने ट्रंप को बनाया पोपट, दोनों के मकसद अलग

इस US Iran War में एक बात बिल्कुल साफ हो चुकी है कि इजराइल और अमेरिका के मकसद अलग-अलग हैं। बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप को बड़े-बड़े सपने दिखाए कि सत्ता पलट हो जाएगी लेकिन वो हुआ नहीं। अब इजराइल कह रहा है कि वो रुकने वाला नहीं क्योंकि उसके लिए यह अस्तित्व का सवाल है। इजराइल जानता है कि अगर ईरान इस बार बच गया तो उसका जीना दुश्वार हो जाएगा।

इसीलिए इजराइल युद्ध को खींचने पर आमादा है और ट्रंप फंस चुके हैं। अगर पीछे हटें तो अमेरिका की पूरी इमेज और वर्चस्वता खत्म हो जाएगी। इसके लिए अगर अमेरिकी सैनिकों को मरना भी पड़े तो ट्रंप को यह मंजूर है।

यह भी पढे़ं 👇

Kidney Stone Diet

Kidney Stone Diet: बीयर से पथरी निकलना है बड़ा मिथ, जानें क्या खाएं क्या नहीं

शनिवार, 28 मार्च 2026
Gold Price Crash 2026

Gold Price Crash 2026: सोना Crypto की तरह क्यों गिरा, 40 साल का सबसे बड़ा फॉल!

शनिवार, 28 मार्च 2026
India AI Opportunity

India AI Opportunity $450 Billion: IT सेक्टर खत्म नहीं, बल्कि हो रहा Rebirth!

शनिवार, 28 मार्च 2026
Petrol Diesel Excise Duty Cut

Petrol Diesel Excise Duty Cut: सरकार का बड़ा फैसला, डीजल पर टैक्स अब जीरो!

शनिवार, 28 मार्च 2026
रूस मुस्कुरा रहा है, चीन नोट्स ले रहा है, भारत को तैयार रहना होगा

इस पूरे संकट में रूस बैठकर मुस्कुरा रहा है। उसका ऑयल रेवेन्यू एक महीने के अंदर दोगुना होकर 24 बिलियन डॉलर हो गया है। चीन चुपचाप बैठकर नोट्स ले रहा है कि अमेरिका की असली क्षमता कितनी है ताकि जब ताइवान पर कब्जे का समय आए तो अमेरिका कुछ न कर सके।

भारत में भी तैयारी हो रही है एक बड़े ऑयल प्राइस हाइक के लिए। फिलहाल सरकार ने तेल पर ड्यूटी कम की है जिससे पेट्रोल पंप पर दाम स्थिर हैं, लेकिन चुनाव के बाद क्या होगा यह किसी को नहीं पता। US Iran War के धमाके पूरी दुनिया महसूस कर रही है। ऑयल की कीमतें, कच्चे माल की कमी, सप्लाई चेन टूट रहे हैं, कंपनियां एक देश से दूसरे देश भाग रही हैं।

अफगानिस्तान की गलती ईरान में दोहराने को तैयार नहीं अमेरिका

अफगानिस्तान को साम्राज्यों का कब्रिस्तान कहा जाता है। अंग्रेज आए, रूस ने कोशिश की, अमेरिका ने 20 साल कोशिश की। सबने सोचा कि कंट्रोल कर लेंगे, डेमोक्रेसी ला देंगे। लेकिन अफगान लोगों ने कहा कि मर जाएंगे लेकिन अपने ऊपर किसी को बैठने नहीं देंगे। आखिरकार अमेरिका को भी जाना पड़ा।

अब ईरान भी अमेरिकी साम्राज्य का कब्रिस्तान साबित हो सकता है। यही वजह है कि ट्रंप सोच रहे हैं, रुक रहे हैं, रीथिंक कर रहे हैं और रीइंफोर्समेंट्स मंगवा रहे हैं। 40,000 फीट की ऊंचाई से बम गिराना आसान है लेकिन सैनिकों को जमीन पर उतारना बिल्कुल अलग खेल है।

एक महीने बाद भी युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा

एक महीने बाद भी यह US Iran War खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। बल्कि यह एक और भीषण चरण में जाता दिख रहा है। ट्रंप का अमेरिका फर्स्ट एजेंडा इसी युद्ध की वजह से पटरी से उतर सकता है। ग्लोबल क्रेडिबिलिटी का सवाल सबसे बड़ा है। अमेरिका ने एक धारणा बनाई है कि वो दुनिया का यूनिपोलर बादशाह है लेकिन इस युद्ध ने दिखा दिया है कि वो कितना ओवरस्ट्रेच्ड है, कितनी तेजी से उसका पतन हो रहा है और उसके पास हथियार उतने नहीं थे जितनी हेकड़ी थी।

चीन, रूस और उत्तर कोरिया देख रहे हैं कि अमेरिका अजेय नहीं है। उसे आर्थिक रूप से भी कसा जा सकता है और सैन्य रूप से भी चुनौती दी जा सकती है। इस युद्ध का नतीजा जो भी हो, दुनिया का पावर इक्वेशन पूरी तरह बदलने वाला है।


मुख्य बातें (Key Points)
  • US Iran War को एक महीना पूरा होने को है लेकिन अमेरिका ईरान को हराने में नाकाम रहा है, उलटे ईरान अमेरिका को डिक्टेट कर रहा है।
  • ईरान ने ट्रंप के 15 पॉइंट पीस प्रपोजल को रिजेक्ट कर दिया है और IRGC ने UAE-बहरेन के होटलों पर हमले की खुली धमकी दी है।
  • अगर ईरान इस युद्ध में टिका रहा तो पेट्रो डॉलर का क्षरण, न्यूक्लियर प्रसार, गल्फ सहयोगियों का भरोसा टूटना और अमेरिकी वर्चस्वता का पतन तय है।
  • ईरान की पहाड़ी भौगोलिक स्थिति, IRGC की मोज़ेक डॉक्ट्रिन और 10 लाख मोबिलाइज्ड लड़ाके किसी भी अमेरिकी जमीनी हमले को मौत का जाल बना सकते हैं।

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सवाल 1: US Iran War में अभी तक कौन जीत रहा है?

तकनीकी रूप से ईरान इस वक्त बेहतर स्थिति में है। हालांकि अमेरिका ने ईरान की एयर डिफेंस और टॉप लीडरशिप को भारी नुकसान पहुंचाया है, लेकिन ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर कंट्रोल बनाए रखा है, 13 अमेरिकी बेस को नष्ट किया है और ट्रंप के पीस प्रपोजल को रिजेक्ट कर दिया है।

सवाल 2: क्या अमेरिका ईरान पर जमीनी हमला करेगा?

पेंटागन 10,000 सैनिक भेजने पर विचार कर रहा है लेकिन ईरान की पहाड़ी भूगोल, IRGC की गुरिल्ला रणनीति और वियतनाम-अफगानिस्तान जैसे अनुभवों की वजह से ट्रंप अभी रुके हुए हैं। रक्षा मंत्री पीट हेक्सेथ ने कहा है कि लंबे समय तक ईरान में रहने का कोई प्लान नहीं है।

सवाल 3: US Iran War का भारत पर क्या असर पड़ेगा?

सबसे बड़ा असर तेल की कीमतों पर पड़ेगा। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद होने से ग्लोबल ऑयल सप्लाई बाधित हो रही है। फिलहाल भारत सरकार ने तेल पर ड्यूटी कम की है जिससे पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर हैं, लेकिन चुनाव के बाद कीमतें बढ़ सकती हैं। सप्लाई चेन में भी बड़ा व्यवधान आने की आशंका है।

Google News
WhatsApp
Telegram
Previous Post

Gold Price Crash 2026: सोना Crypto की तरह क्यों गिरा, 40 साल का सबसे बड़ा फॉल!

Next Post

Kidney Stone Diet: बीयर से पथरी निकलना है बड़ा मिथ, जानें क्या खाएं क्या नहीं

The News Air Team

The News Air Team

द न्यूज़ एयर टीम (The News Air Team) अनुभवी पत्रकारों, विषय विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं का एक समर्पित समूह है, जो पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और त्वरित समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी टीम राजनीति, सरकारी योजनाओं, तकनीक और जन-सरोकार से जुड़े मुद्दों पर गहराई से विश्लेषण कर तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग करती है। 'द न्यूज़ एयर' का मुख्य उद्देश्य डिजिटल पत्रकारिता के उच्चतम मानकों को बनाए रखना और समाज के हर वर्ग को जागरूक करना है। हम हर खबर को पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ आप तक पहुँचाते हैं, ताकि आपको मिले केवल भरोसेमंद जानकारी।

Related Posts

Kidney Stone Diet

Kidney Stone Diet: बीयर से पथरी निकलना है बड़ा मिथ, जानें क्या खाएं क्या नहीं

शनिवार, 28 मार्च 2026
Gold Price Crash 2026

Gold Price Crash 2026: सोना Crypto की तरह क्यों गिरा, 40 साल का सबसे बड़ा फॉल!

शनिवार, 28 मार्च 2026
India AI Opportunity

India AI Opportunity $450 Billion: IT सेक्टर खत्म नहीं, बल्कि हो रहा Rebirth!

शनिवार, 28 मार्च 2026
Petrol Diesel Excise Duty Cut

Petrol Diesel Excise Duty Cut: सरकार का बड़ा फैसला, डीजल पर टैक्स अब जीरो!

शनिवार, 28 मार्च 2026
Trump Iran U-Turn

Trump Iran U-Turn से 5 मिनट पहले ₹840 करोड़ का Mystery Bet!

शनिवार, 28 मार्च 2026
Global Energy Crisis

Global Energy Crisis: 20 देशों में Fuel Lockdown, दुनिया पर मंडराया महासंकट

शनिवार, 28 मार्च 2026
Next Post
Kidney Stone Diet

Kidney Stone Diet: बीयर से पथरी निकलना है बड़ा मिथ, जानें क्या खाएं क्या नहीं

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

The News Air

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।

Google News Follow us on Google News

  • About
  • Editorial Policy
  • Privacy & Policy
  • Disclaimer & DMCA Policy
  • Contact

हमें फॉलो करें

No Result
View All Result
  • प्रमुख समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • सियासत
  • राज्य
    • पंजाब
    • चंडीगढ़
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • महाराष्ट्र
    • पश्चिम बंगाल
    • उत्तर प्रदेश
    • बिहार
    • उत्तराखंड
    • मध्य प्रदेश
    • राजस्थान
  • काम की बातें
  • नौकरी
  • बिज़नेस
  • टेक्नोलॉजी
  • मनोरंजन
  • धर्म
  • हेल्थ
  • स्पेशल स्टोरी
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
  • WEB STORIES

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।