US Iran Tension: अमेरिका (USA) और ईरान (Iran) के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की चेतावनी के बाद अमेरिका ने ईरान के चारों ओर अपनी सैन्य ताकत भारी तादाद में बढ़ा दी है। खबर है कि अमेरिका ने F-22 रैप्टर और F-35 लाइटनिंग जैसे अत्याधुनिक स्टील्थ लड़ाकू विमानों का एक विशाल बेड़ा क्षेत्र में तैनात कर दिया है। ऐसे में अटकलें तेज हो गई हैं कि अमेरिका किसी भी वक्त ईरान पर बड़ा हमला कर सकता है।
जिनेवा में कूटनीतिक बातचीत के बावजूद दोनों देशों के बीच कोई समझौता नहीं हो पाया है। अमेरिका चाहता है कि ईरान उसकी शर्तों पर बातचीत करे, जबकि ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिकी धमकियों से नहीं डरेगा और पलटवार करने के लिए तैयार है। ट्रंप ने सोमवार को साफ कहा था, “मुझे नहीं लगता कि वे (ईरान) समझौता न होने के परिणामों को भुगतना चाहते हैं।” यानी अमेरिका ने डिप्लोमेसी के साथ-साथ मिलिट्री एक्शन का रास्ता भी खुला रखा है।
F-22 से F-35 तक: ईरान के लिए तैनात अमेरिकी ताकत का पूरा खाका
वॉर स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी वायुसेना ने ईरान की ओर रुख करते हुए अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों की बड़ी खेप भेज दी है। फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा से पता चलता है कि दर्जनों लड़ाकू जेट और सहायक विमान जॉर्डन के मुवफ्फक साल्टी एयरबेस और सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर तैनात किए जा चुके हैं। इन विमानों में शामिल हैं:
F-22 रैप्टर: दुनिया का सबसे एडवांस स्टील्थ फाइटर जेट।
F-35 लाइटनिंग II: मल्टीरोल स्टील्थ फाइटर।
F-15 और F-16: जमीन पर हमले और हवाई श्रेष्ठता के लिए तैनात।
E-3 एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS): हवाई निगरानी और कमान संभालने वाला विमान।
E-11 बैटलफील्ड एयरबोर्न कम्युनिकेशंस नोड: युद्धक्षेत्र में संचार व्यवस्था संभालने वाला विमान।
इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक युद्धक विमानों से लदा एक और विमान वाहक पोत भी ईरान की ओर रवाना हो चुका है।
नौसेना और थलसेना भी तैयार, ट्रंप की अंतिम मोहर का इंतजार
सिर्फ वायुसेना ही नहीं, बल्कि अमेरिकी नौसेना (US Navy) ने भी पूरी ताकत झोंक दी है। संभावित अभियान की सहायता के लिए मध्य पूर्व और पूर्वी भूमध्य सागर में 13 युद्धपोत तैनात किए गए हैं। इनमें सबसे बड़ा विमान वाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन (USS Abraham Lincoln) भी शामिल है। बैलिस्टिक मिसाइलों से बचाव में सक्षम नौ विध्वंसक पोत भी इस बेड़े का हिस्सा हैं।
यानी आसमान, जमीन और समंदर, तीनों ओर से अमेरिका ने ईरान को घेर लिया है। विश्लेषकों का मानना है कि बड़े हवाई अभियान की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और अब सिर्फ राष्ट्रपति ट्रंप की अंतिम मोहर का इंतजार है। ट्रंप चाहते तो हैं कि ईरान बिना युद्ध के उनकी शर्तें मान ले, लेकिन दबाव बनाने के लिए सैन्य तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
क्या है अमेरिकी हमले का मकसद?
सवाल यह है कि अगर अमेरिका हमला करता है तो उसका मकसद क्या होगा? क्या वह सिर्फ ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नष्ट करना चाहता है और उसकी मिसाइल शक्ति को कमजोर करना चाहता है, या फिर वहां की सरकार को उखाड़ फेंकने की भी योजना है? गौरतलब है कि ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी (Reza Pahlavi) इस वक्त अमेरिका में ही मौजूद हैं और वे लगातार ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) की सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का आह्वान करते रहे हैं।
विश्लेषण: जंग के मुहाने पर दुनिया?
अमेरिका और ईरान के बीच यह तनाव अब सिर्फ शब्दों की जंग नहीं रह गया है। अमेरिका ने जिस पैमाने पर अपनी सैन्य ताकत झोंक दी है, उससे साफ है कि वह ईरान पर हमले की तैयारी पूरी कर चुका है। दूसरी ओर, ईरान ने भी होर्मुज जलडमरूमध्य में रूस और चीन के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास कर अमेरिका को संदेश दे दिया है कि वह अकेला नहीं है। अब बस ट्रंप के एक इशारे की देर है कि मध्य पूर्व में एक और बड़ा युद्ध छिड़ जाए। ऐसे में पूरी दुनिया की निगाहें व्हाइट हाउस पर टिकी हैं। यह देखना होगा कि ट्रंप कूटनीति का रास्ता चुनते हैं या फिर तबाही का।
मुख्य बातें (Key Points)
अमेरिका (USA) ने ईरान (Iran) के खिलाफ F-22, F-35 समेत दर्जनों अत्याधुनिक लड़ाकू विमान तैनात किए।
जॉर्डन और सऊदी अरब के एयरबेस पर अमेरिकी वायुसेना की तैनाती, यूएसएस अब्राहम लिंकन भी पहुंचा।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान को आखिरी चेतावनी देते हुए कहा कि समझौता न होने के परिणाम गंभीर होंगे।
अमेरिकी नौसेना ने 13 युद्धपोत और विध्वंसक मध्य पूर्व में तैनात किए, तीनों सेनाएं अलर्ट पर।
जिनेवा वार्ता के विफल होने के बाद अब सैन्य कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है।








