US Sanctions on Iran: एक हाथ से सुलह की पेशकश और दूसरे हाथ से आर्थिक कोड़ा—अमेरिका ने ईरान के साथ कुछ ऐसा ही खेल खेला है। जब पूरी दुनिया को लग रहा था कि दोनों देशों के बीच तनाव कम होगा और बातचीत से कोई हल निकलेगा, तभी वाशिंगटन से आई एक खबर ने तेहरान को हिलाकर रख दिया है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी ‘सख्त रणनीति’ का मुजायरा करते हुए नए और कड़े प्रतिबंधों का ऐलान कर दिया है।
बातचीत की मेज पर धोखा?
बड़ी खबर यह है कि एक तरफ जहां America और Iran के बीच कूटनीतिक बातचीत का दौर चल रहा था, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने ईरान की आर्थिक नब्ज दबाने की कोशिश की है। जब दोनों देशों के प्रतिनिधि आमने-सामने बैठकर मुद्दों को सुलझाने की कोशिश कर रहे थे, ठीक उसी वक्त अमेरिका ने ईरान-विरोधी बैन की एक नई लिस्ट जारी कर दी।
इस कदम को अमेरिका की ‘डबल गेम’ या सख्त रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। इसका सीधा संदेश है कि अमेरिका बातचीत तो करेगा, लेकिन दबाव कम नहीं होने देगा।
किस-किस पर गिरी गाज?
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग (US Treasury Department) ने आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि उन्होंने अपनी ब्लैकलिस्ट में नए नाम जोड़े हैं। इस नई कार्रवाई में ईरान के:
2 व्यक्ति (Individuals)
15 कंपनियां (Companies)
14 संस्थाएं (Entities)
इन सभी को ईरान-विरोधी प्रतिबंधों की सूची में शामिल किया गया है। इसका मतलब है कि अब ये लोग और संस्थाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार या लेनदेन नहीं कर पाएंगे और उनकी संपत्ति फ्रीज हो सकती है।
आम जनता पर असर
जब भी किसी देश पर इस तरह के कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगते हैं, तो उसका सबसे बुरा असर वहां की आम जनता पर पड़ता है। इन प्रतिबंधों से ईरान में महंगाई और बढ़ सकती है, जरूरी सामानों की किल्लत हो सकती है और आम ईरानी नागरिक का जीवन और मुश्किल हो सकता है, जो पहले से ही आर्थिक तंगी झेल रहा है।
‘जानें पूरा मामला’
अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर लंबा विवाद चल रहा है। हाल ही में दोनों देशों के बीच ओमान में बातचीत की खबरें आई थीं। उम्मीद थी कि इससे तनाव कम होगा। लेकिन इस बीच, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा लगाए गए ये नए प्रतिबंध बताते हैं कि अमेरिका ईरान पर ‘मैक्सिमम प्रेशर’ (Maximum Pressure) की नीति को छोड़ने के मूड में नहीं है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
कार्रवाई: अमेरिका ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए।
टार्गेट: 2 व्यक्ति, 15 कंपनियां और 14 संस्थाएं ब्लैकलिस्ट।
समय: यह कदम तब उठाया गया जब दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही थी।
रणनीति: इसे अमेरिका की दबाव बनाने की सख्त रणनीति माना जा रहा है।








