UP Land Registry Rules: उत्तर प्रदेश में अपना घर या जमीन खरीदने का सपना देखने वालों के लिए एक बहुत बड़ी खबर है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की सरकार ने जमीन की खरीद-फरोख्त (Land Registry) के नियमों में एक ऐतिहासिक बदलाव कर दिया है। अब तक रजिस्ट्री दफ्तरों में कोई भी व्यक्ति गवाह बनकर खड़ा हो जाता था और बाद में अपनी बात से पलट जाता था, लेकिन अब ऐसा करना संभव नहीं होगा। सरकार ने फर्जीवाड़े की कमर तोड़ने के लिए ‘आधार सत्यापन’ (Aadhaar Verification) का नया और सख्त नियम लागू कर दिया है।
गवाहों पर कसा कानूनी शिकंजा
अक्सर देखा गया है कि उप-निबंधक (Sub-registrar) कार्यालयों में गवाहों की पहचान को लेकर हमेशा संशय बना रहता था। कई बार विवादित जमीनों को बेचने के लिए भू-माफिया फर्जी गवाह खड़े कर देते थे। लेकिन अब नई व्यवस्था के तहत गवाहों का Aadhaar सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है।
इसका मतलब है कि गवाह की पहचान हमेशा के लिए सरकारी डेटाबेस में दर्ज हो जाएगी। इससे भविष्य में अगर जमीन को लेकर कोई भी कानूनी विवाद होता है, तो गवाह अपनी जिम्मेदारी से मुकर नहीं पाएंगे और न ही अपनी गवाही से पलट सकेंगे।
लाखों मुकदमे और ‘मुकरते’ गवाह
सरकार को यह कदम क्यों उठाना पड़ा, इसके पीछे के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। एडीएम, एसडीएम, तहसीलदार और नायब तहसीलदारों के न्यायालयों में इस समय करीब 1,44,327 राजस्व मुकदमे लंबित हैं।
हैरानी की बात यह है कि इनमें से संपत्तियों की खरीद-फरोख्त में फर्जीवाड़े के 2,344 केस चल रहे हैं, जिनमें से 378 मामलों में गवाह कोर्ट में साफ मुकर चुके हैं। ये गवाह न्यायालय में कह देते हैं कि “मैं तो गवाह था ही नहीं” या “यह फोटो और हस्ताक्षर मेरे नहीं हैं।” अब बायोमेट्रिक सत्यापन से यह ‘झूठ’ नहीं चल पाएगा।
टेक्नोलॉजी बनेगी सबसे बड़ा हथियार
इस नई व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए टेक्नोलॉजी का भरपूर इस्तेमाल किया जाएगा। अब रजिस्ट्री के समय क्रेता (Buyer), विक्रेता (Seller) और गवाहों (Witnesses) का मौके पर ही बायोमेट्रिक मशीन से आधार सत्यापन किया जाएगा।
यही नहीं, सरकार ने हर स्थिति के लिए तैयारी की है। अगर किसी बुजुर्ग या मेहनत-मजदूरी करने वाले व्यक्ति के उंगलियों के निशान (Fingerprints) घिस जाने के कारण मशीन में मैच नहीं होते, तो उन्हें वापस नहीं भेजा जाएगा। उनके लिए Face Authentication (चेहरा पहचान) और आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर OTP का विकल्प भी उपलब्ध होगा।
भू-माफिया और बेनामी संपत्ति पर वार
एआईजी स्टाम्प प्रयागराज, राकेश चंद्र के अनुसार, शासन ने यह नया नियम जमीन के खेल में होने वाली धोखाधड़ी और भू-माफियाओं पर नकेल कसने के लिए बनाया है। इससे बेनामी संपत्तियों के पंजीकरण पर रोक लगेगी।
यह नियम रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश करने वाले आम आदमी के हितों की रक्षा करेगा। अब कोई भी जालसाज किसी दूसरे की जमीन को फर्जी गवाहों के दम पर नहीं बेच पाएगा, क्योंकि गवाह की गर्दन अब कानून की पकड़ में होगी।
‘जानें पूरा मामला’
उत्तर प्रदेश में आए दिन जमीन के फर्जीवाड़े की खबरें आती रहती थीं, जहां असली मालिक को पता ही नहीं चलता था और उसकी जमीन बिक जाती थी। इसमें सबसे बड़ा रोल उन ‘पेशेवर गवाहों’ का होता था जो पैसे लेकर गवाही देते थे और बाद में गायब हो जाते थे। योगी सरकार का यह फैसला इसी सिंडिकेट को तोड़ने के लिए है, ताकि कोर्ट में चल रहे लाखों मुकदमों का बोझ कम हो सके और आम जनता सुरक्षित महसूस करे।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
नया नियम: जमीन रजिस्ट्री में गवाहों का आधार सत्यापन अनिवार्य।
प्रक्रिया: बायोमेट्रिक, फेस ऑथेंटिकेशन या OTP के जरिए होगी पहचान।
मकसद: फर्जी गवाहों और बेनामी संपत्ति पर रोक लगाना।
विकल्प: फिंगरप्रिंट काम न करने पर चेहरे या OTP से होगा काम।
आंकड़े: प्रदेश में फर्जीवाड़े के हजारों केस गवाहों के पलटने की वजह से लंबित हैं।








