UP Electricity Bill Hike: उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को फरवरी 2026 में बड़ा झटका लगने वाला है। जनवरी में उपभोग की गई बिजली के लिए उपभोक्ताओं को फरवरी में 10 प्रतिशत से अधिक बिल देना होगा। फ्यूल सरचार्ज (ईंधन अधिभार) के एवज में बिजली कंपनियां जनवरी के बिल के साथ विद्युत उपभोक्ताओं से ₹616.05 करोड़ रुपये अतिरिक्त वसूलेंगी। यह अब तक किसी एक महीने में लगाया गया सबसे बड़ा फ्यूल सरचार्ज है।
उपभोक्ता परिषद ने उठाए सवाल
हालांकि, उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने पावर कॉरपोरेशन (UPPCL) के रिकॉर्ड 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार वसूलने के आदेश पर गंभीर सवाल उठाते हुए महंगी बिजली खरीद की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
परिषद ने इस संबंध में विद्युत नियामक आयोग में लोक महत्व का प्रस्ताव दाखिल कर 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार वसूलने पर तत्काल रोक लगाने की भी मांग की है। उपभोक्ता परिषद का कहना है कि सामान्य मांग वाले नवंबर महीने में इतनी महंगी बिजली खरीद पूरी तरह से संदेहास्पद है।
स्वीकृत दर से ₹0.85 प्रति यूनिट महंगी खरीदी
पावर कॉरपोरेशन के संबंधित आदेश के मुताबिक, नवंबर 2025 में 8849.03 मिलियन यूनिट बिजली खरीदी गई। वास्तविक खरीद दर ₹5.79 प्रति यूनिट रही, जबकि उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा स्वीकृत टैरिफ में यह दर ₹4.94 प्रति यूनिट ही थी।
बिजली खरीद की दर में इसी ₹0.85 प्रति यूनिट के अंतर के आधार पर फरवरी में 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार शुल्क लगाकर उपभोक्ताओं से ₹616.05 करोड़ अतिरिक्त वसूली का आदेश जारी किया गया है।
एक महीने में सबसे बड़ी बढ़ोतरी
गौर करने वाली बात यह है कि यह अब तक किसी एक माह में सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। इससे पहले दिसंबर 2025 में 5.56 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी। जनवरी 2026 में जहां फ्यूल सरचार्ज के कारण 2.33 प्रतिशत बिजली का खर्च घटा था और उपभोक्ताओं को लगभग ₹141 करोड़ की राहत मिली थी, वहीं फरवरी में उपभोक्ताओं को रिकॉर्ड 10 प्रतिशत से ज्यादा बिल देना होगा।
नवंबर में महंगी खरीद पर सवाल
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधदेश वर्मा का कहना है कि नवंबर जैसे सामान्य मांग वाले महीने में ₹5.79 प्रति यूनिट की दर से महंगी बिजली खरीद पूरी तरह से संदेहास्पद है।
वर्मा ने बिजली खरीद के आंकड़ों में गंभीर गड़बड़ी की आशंका जताते हुए कहा कि पिछले वर्ष मई में जब भीषण गर्मी, बिजली संकट और रिकॉर्ड मांग थी, तब पावर कॉरपोरेशन ने ₹4.76 प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदी थी। लेकिन नवंबर जैसे सामान्य महीने में ₹5.79 प्रति यूनिट से बिजली खरीदना समझ में नहीं आता।
मल्टी-ईयर टैरिफ रेगुलेशन 2025
नियामक आयोग के मल्टी-ईयर टैरिफ रेगुलेशन 2025 के तहत जनवरी 2025 में बिजली कंपनियों को प्रत्येक माह स्वतः फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (FPPAS) तय करने का अधिकार मिलने के बाद से राज्य में लगातार बिजली महंगी या सस्ती हो रही है।
UPPCL चेयरमैन आशीष कुमार गोयल ने कहा कि फ्यूल सरचार्ज स्वचालित रूप से कोयले की लागत और बिजली उत्पादन खर्चों के आधार पर लागू होता है, जो UP विद्युत नियामक आयोग द्वारा अनुमोदित फॉर्मूले का पालन करता है। यह तंत्र उपभोक्ताओं से मासिक वसूली की अनुमति देता है और 2029 तक जारी रहेगा।
30% टैरिफ वृद्धि का भी प्रस्ताव
इस तत्काल सरचार्ज से परे, UPPCL ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए विभिन्न उपभोक्ता श्रेणियों में बिजली टैरिफ में औसतन लगभग 30 प्रतिशत की पर्याप्त वृद्धि का भी प्रस्ताव रखा है। यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो यह उपभोक्ताओं पर दोहरी मार होगी।
फ्यूल सरचार्ज क्या है?
फ्यूल सरचार्ज एक ऐसा तंत्र है जो बिजली कंपनियों को ईंधन (कोयला, गैस आदि) की लागत में उतार-चढ़ाव को उपभोक्ताओं पर डालने की अनुमति देता है। जब बिजली उत्पादन की वास्तविक लागत नियामक द्वारा स्वीकृत दर से अधिक होती है, तो यह अंतर फ्यूल सरचार्ज के रूप में उपभोक्ताओं से वसूला जाता है।
यह व्यवस्था सिद्धांत रूप में दोनों तरफ काम करती है – यदि बिजली सस्ती खरीदी जाती है तो उपभोक्ताओं को छूट मिलती है (जैसा कि जनवरी में हुआ), और यदि महंगी खरीदी जाती है तो अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है।
उपभोक्ताओं पर प्रभाव
यह 10 प्रतिशत की वृद्धि सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं – घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक – को प्रभावित करेगी। एक सामान्य घरेलू उपभोक्ता जो प्रति माह 200 यूनिट बिजली खपत करता है और सामान्यतः लगभग ₹1,000 का बिल भरता है, उसे फरवरी में लगभग ₹100 अतिरिक्त देना होगा।
व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और उद्योगों पर प्रभाव और भी अधिक होगा, जो उनकी परिचालन लागत को बढ़ा देगा।
मुख्य बातें (Key Points)
UP में फरवरी 2026 के बिजली बिल में रिकॉर्ड 10% फ्यूल सरचार्ज, ₹616.05 करोड़ की अतिरिक्त वसूली होगी।
नवंबर 2025 में बिजली ₹5.79 प्रति यूनिट खरीदी गई, जबकि स्वीकृत दर ₹4.94 प्रति यूनिट थी।
उपभोक्ता परिषद ने महंगी बिजली खरीद पर सवाल उठाए; स्वतंत्र जांच और सरचार्ज पर रोक की मांग की।
यह किसी एक महीने में अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी; UPPCL ने 30% टैरिफ वृद्धि का भी प्रस्ताव रखा है।








