Donald Trump Unlimited Power : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दुनिया को चौंका दिया है। न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक धमाकेदार इंटरव्यू में उन्होंने दावा किया कि उनकी शक्ति की कोई सीमा नहीं है। अगर कोई चीज उन्हें रोक सकती है तो वह है सिर्फ उनका अपना दिमाग और उनकी अपनी नैतिकता। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जे की बात कर रहे हैं, मेक्सिको को धमका रहे हैं और यूरोप के नेताओं को बेकार बता रहे हैं।
ट्रंप का ‘असीमित शक्ति’ वाला बड़ा दावा
ट्रंप ने न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकार से साफ-साफ कहा कि उनके पावर की कोई हद नहीं है। उन्होंने बताया कि अगर कोई उन पर रोक लगा सकता है तो वह उनकी अपनी नैतिकता और उनका अपना दिमाग है। यह बात सुनने में भले ही अजीब लगे लेकिन ट्रंप अपने आप को बेहद गंभीरता से लेते हैं। मजबूत नेताओं की यही क्वालिटी होती है कि वे हमेशा खुद को लेकर सीरियस रहते हैं।

ग्रीनलैंड पर कब्जे की बात – जैसे सपना विहार का खाली प्लॉट हो
ट्रंप ग्रीनलैंड की बात ऐसे कर रहे हैं जैसे वह कोई खाली प्लॉट हो जिस पर किसी अथॉरिटी की नजर नहीं पड़ी। उनका कहना है कि ग्रीनलैंड वालों को पसंद हो या न हो वह कब्जा करने जा रहे हैं। उनकी दलील है कि अगर वह नहीं करेंगे तो रूस या चीन कर लेंगे। यह स्पिरिट बिल्कुल वैसी ही है जैसी भारत में कब्जा करने वालों की होती है। जो भी प्लॉट होता है वह कब्जे के लिए ही होता है और आप नहीं करोगे तो कोई और कर लेगा।
‘नमस्ते ट्रंप’ वालों के लिए बड़ा सवाल
साल 2020 में नरेंद्र मोदी स्टेडियम में लाखों लोग ट्रंप को नमस्ते करने गए थे। वे लोग घंटों पहले सिक्योरिटी चेकिंग की लाइन में लगे थे और खाली पेट स्टेडियम में बैठे थे। जिस ट्रंप को उस दिन नमस्ते किया वह आज ऐसे व्यवहार कर रहे हैं। सवाल यह है कि क्या उन लोगों को अब कोई पछतावा हो रहा है। जिन कलेक्टरों को ड्यूटी दी गई थी कि बसों में लोगों को लाओ वे आज क्या सोच रहे होंगे।
ईरान पर धमकी – प्रोटेस्टर्स को सपोर्ट और अपने देश में धमकी
ट्रंप ईरान के मामले में भी पूरी तरह उलझे हुए हैं। उन्होंने कहा कि हम स्थिति को बहुत ध्यान से देख रहे हैं और अगर उन्होंने लोगों को मारना शुरू किया जैसा पहले करते थे तो हम उन्हें बहुत जोर से मारेंगे। मजेदार बात यह है कि ट्रंप ईरान में प्रोटेस्ट करने वालों को सपोर्ट कर रहे हैं लेकिन अपने देश में प्रोटेस्ट करने वालों को कम्युनिस्ट बता कर धमका रहे हैं।
भारत और PM मोदी पर ट्रंप की नजर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह नहीं समझना चाहिए कि ट्रंप व्यस्त हैं तो उनका ध्यान भारत पर नहीं है। मेक्सिको पर अटैक की बात करते-करते अचानक इंडिया और मोदी का नाम आ जाता है। जैसे स्कूल का प्रिंसिपल आंखें बंद करके सोया हो और लड़के भागने की फिराक में हों तभी उसकी आंख खुल जाए। पता चलता है बंदा सोया ही नहीं था बल्कि सोने का नाटक कर रहा था। टेरिफ की बात होती है तो ट्रंप कहते हैं कि मोदी मुझे खुश करना चाहते हैं क्योंकि मैं मोदी से नाराज हूं।
यूरोप के नेताओं की गत निकाली
ट्रंप ने यूरोप के सभी बड़े नेताओं की गत निकाल दी है। ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, डेनमार्क, पोलैंड, इटली और नॉर्वे सबके साथ बुरा बर्ताव किया। ट्रंप ने कह दिया कि NATO की नेतागिरी उनकी वजह से है यूरोप की वजह से नहीं। उनके बिना नेटो कुछ भी नहीं। उनका दावा है कि व्लादिमीर पुतिन यूरोप से नहीं डरते और डरते हैं तो सिर्फ ट्रंप से।
ट्रंप के बड़े-बड़े दावे एक नजर में
ट्रंप ने अपनी शक्ति के बारे में कहा कि उनकी शक्ति असीमित है और कोई उन्हें नहीं रोक सकता। ग्रीनलैंड के मामले में उन्होंने साफ कहा कि कब्जा करूंगा चाहे वहां के लोग राजी हों या न हों। नेटो के बारे में उनका कहना है कि मेरे बिना कुछ नहीं है। अंतरराष्ट्रीय कानून पर उनका रुख है कि मैं तय करूंगा कि क्या मानना है। पुतिन के बारे में उनका दावा है कि वह सिर्फ मुझसे डरते हैं।
अंतरराष्ट्रीय कानून पर ट्रंप का रुख
जब न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकार ने पूछा कि आपका प्रशासन अंतरराष्ट्रीय कानून नहीं मानता तो ट्रंप ने कहा कि मैं मानता हूं लेकिन जब कोई अंतरराष्ट्रीय कानून अमेरिका के आड़े आता है तो मैं तय करता हूं। उन्होंने यह भी कहा कि यह इस बात पर निर्भर करता है कि अंतरराष्ट्रीय कानून की आपकी क्या परिभाषा है। मतलब परिभाषा भी ट्रंप तय करेंगे और कानून की सीमा भी वही तय करेंगे।
12 साल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं – PM मोदी बनाम ट्रंप
एक दिलचस्प तुलना सामने आती है। प्रधानमंत्री मोदी ने 12 साल में एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की। वहीं ट्रंप एक दिन में 12 बार प्रेस से बात करते हैं। जहां कहीं भी 10 लोग मिलते हैं ट्रंप बोलने लगते हैं। ट्विटर ऑन करो तो ट्रंप के 10 बयान एक साथ आ जाते हैं। एक में इंडिया को धमकाया, एक में फ्रांस को, एक में रशिया को और एक में चीन को।
नार्सिसिस्ट नेता की पहचान
अमेरिका में 200 हेल्थ प्रोफेशनल्स ने ट्रंप को एनालाइज किया है। उन सबने अपना पत्र सार्वजनिक भी कर दिया है जिसमें लिखा है कि यह आदमी नार्सिसिस्ट है। नार्सिसिस्ट वह होता है जो बात-बात में खुद का नाम लेता है, अपना ही उदाहरण देता है, खुद को जरूरत से ज्यादा महत्व देता है, बाकी दुनिया की परवाह नहीं करता और दुनिया में जो भी होता है उसे खुद से जोड़ लेता है।
ट्रंप अपने बारे में क्या-क्या दावे करते हैं
ट्रंप बिजनेस के बारे में कहते हैं कि मुझसे बेहतर कोई नहीं जानता। राजनीति में भी मुझसे बेहतर कोई नहीं। इतिहास का मुझसे ज्यादा किसी को ज्ञान नहीं। सेना को मैं सबसे अच्छा समझता हूं। सबसे बेस्ट दीवारें मैं बनवाता हूं। औरतों का सम्मान मुझसे ज्यादा कोई नहीं करता। मेरे जितनी भीड़ किसी के लिए इकट्ठी नहीं होती। इजराइल का सबसे बड़ा हितैषी मैं हूं।
ग्लोबल ऑर्डर का सच
जर्मनी के राष्ट्रपति ने कहा कि ट्रंप ग्लोबल ऑर्डर को ध्वस्त कर रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि यह ग्लोबल ऑर्डर पहले कहां था। दो साल से गाजा पर एक देश बेलगाम होकर हमला कर रहा था तब किसी को विश्व व्यवस्था के ध्वस्त होने की बात नहीं दिखी। इराक, अफगानिस्तान, लीबिया और यमन जैसे ना जाने कितने देशों में लाखों लोग मारे गए। पहले भी अंतरराष्ट्रीय कानून अमेरिका के हिसाब से चल रहे थे। फर्क सिर्फ इतना है कि अब ट्रंप ने खुलकर दावा कर दिया है।
मजबूत नेताओं की भूख
दुनिया को कभी-कभी मजबूत नेताओं की भूख लग जाती है। दुनिया को पता है कि मजबूत नेता दुनिया को तबाह करते हैं और अपनी जनता को कमजोर कर देते हैं। फिर भी दुनिया को कहीं न कहीं मजबूत नेता की भूख लग जाती है। सबको जर्मनी का इतिहास पता है कि क्या हुआ था, कैसे हुआ था और किसने किया था। अमेरिका में भी जितना एनालिसिस होता है जर्मनी अचानक टपक आता है।
आम आदमी पर क्या होगा असर
ट्रंप के इस रवैये का सीधा असर आम आदमी पर पड़ेगा। अगर अंतरराष्ट्रीय व्यापार में टेरिफ बढ़ेंगे तो महंगाई बढ़ेगी। अगर देशों के बीच तनाव बढ़ेगा तो आर्थिक अस्थिरता आएगी। भारत पर टेरिफ की बात पहले से चल रही है और इसका असर भारतीय कंपनियों और आम लोगों पर भी पड़ सकता है।
क्या है पूरी पृष्ठभूमि
डोनाल्ड ट्रंप जनवरी 2025 में दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति बने। पहले कार्यकाल में भी उनकी विवादित शैली चर्चा में रही थी। साल 2020 में भारत में नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम हुआ था जहां लाखों लोग उन्हें देखने गए थे। अब दूसरे कार्यकाल में ट्रंप और भी आक्रामक हो गए हैं। ग्रीनलैंड, पनामा नहर और कनाडा को 51वां राज्य बनाने जैसे विवादित बयान दे रहे हैं। उनका मानना है कि वही दुनिया के असली बॉस हैं और बाकी सब उनके हिसाब से चलेंगे।
मुख्य बातें (Key Points)
ट्रंप ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि उनकी शक्ति की कोई सीमा नहीं और सिर्फ उनका दिमाग उन्हें रोक सकता है। ग्रीनलैंड पर कब्जे की बात ऐसे कर रहे हैं जैसे कोई खाली प्लॉट हो। 200 हेल्थ प्रोफेशनल्स ने ट्रंप को नार्सिसिस्ट बताया और पत्र भी सार्वजनिक किया। PM मोदी ने 12 साल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की जबकि ट्रंप एक दिन में 12 बार प्रेस से बात करते हैं। अंतरराष्ट्रीय कानून की परिभाषा भी ट्रंप खुद तय करेंगे।








