Board of Peace : अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने गाज़ा संकट को लेकर एक नई अंतरराष्ट्रीय पहल शुरू की है। इस पहल के तहत भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi को ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का न्योता दिया गया है। यह जानकारी भारत में अमेरिकी राजदूत Sergio Gor ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए साझा की।
गाज़ा में युद्धविराम और आगे की व्यवस्थाओं को लेकर बनाए गए इस बोर्ड में रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif को भी आमंत्रण भेजा गया है। इस पहल ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है और इसे लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

‘क्या है बोर्ड ऑफ पीस’
बोर्ड ऑफ पीस को गाज़ा में सीज़फायर लागू कराने और भविष्य की प्रशासनिक व्यवस्था तय करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। चर्चा यह भी है कि यह बोर्ड केवल गाज़ा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में वैश्विक विवादों को सुलझाने का एक नया मंच बन सकता है।
‘UN के विकल्प की तैयारी?’
विश्लेषकों का मानना है कि यह पहल United Nations की कथित नाकामियों के बाद अमेरिका के नेतृत्व में एक वैकल्पिक अंतरराष्ट्रीय ढांचा खड़ा करने की कोशिश हो सकती है। ट्रंप प्रशासन पहले ही कई UN एजेंसियों से खुद को अलग कर चुका है और फंडिंग में कटौती कर चुका है।
‘सदस्यता को लेकर सबसे बड़ा विवाद’
इस बोर्ड को लेकर सबसे बड़ा विवाद इसकी सदस्यता शर्तों पर है। Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार, 1 अरब डॉलर का योगदान देने वाले देशों को स्थायी सदस्यता मिल सकती है, जबकि तीन साल की अस्थायी सदस्यता बिना आर्थिक योगदान के दी जाएगी। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि ज्यादा पैसा देने वाले देशों को ज्यादा ताकत मिलेगी।
‘भारत की भूमिका क्यों अहम’
भारत को इस बोर्ड में आमंत्रित किया जाना कूटनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह न सिर्फ भारत की वैश्विक भूमिका को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि अमेरिका भारत को भविष्य की वैश्विक शांति संरचना में अहम भागीदार के रूप में देख रहा है।
विश्लेषण: ट्रंप की रणनीति या नई विश्व व्यवस्था?
यह पहल केवल शांति प्रयास नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन को नए सिरे से परिभाषित करने की कोशिश भी हो सकती है। आर्थिक योगदान आधारित सदस्यता UN की समानता आधारित संरचना से बिल्कुल अलग है। इससे यह सवाल गहराता है कि क्या अमेरिका गाज़ा के बहाने UN को किनारे कर एक नया US-केंद्रित सिस्टम बनाना चाहता है।
आम दुनिया पर असर
अगर यह बोर्ड प्रभावी होता है, तो वैश्विक विवाद सुलझाने का तरीका बदल सकता है। लेकिन अगर इसमें आर्थिक ताकत को प्राथमिकता मिली, तो छोटे और गरीब देशों की आवाज कमजोर पड़ने का खतरा भी रहेगा।
जानें पूरा मामला
गाज़ा बोर्ड ऑफ पीस को लेकर ट्रंप की मंशा पर अभी आधिकारिक रूप से सब कुछ स्पष्ट नहीं है। लेकिन संकेत यही हैं कि गाज़ा इसका शुरुआती फोकस है और भविष्य में इसे वैश्विक शांति मंच के रूप में विकसित करने की योजना हो सकती है।
मुख्य बातें (Key Points)
- ट्रंप ने PM मोदी को ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का न्योता दिया
- रूस और पाकिस्तान के नेताओं को भी आमंत्रण
- बोर्ड का मकसद गाज़ा में सीज़फायर और भविष्य की व्यवस्था
- UN के विकल्प के रूप में उभरने की अटकलें








