Trump Attack on China को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से बात करते हुए चीन को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि ईरान को हथियार भेजने की स्थिति में चीन के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी हो जाएंगी। ट्रंप का यह बड़ा बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते की नाजुक सीजफायर डील चल रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अमेरिका की सैन्य सफलता पर जोर देते हुए दावा किया है कि तेहरान की नौसेना, रडार और वायुसेना पूरी तरह नष्ट हो चुकी है और उसके कई प्रमुख नेता मारे जा चुके हैं।
ट्रंप ने चीन को दी खुली चेतावनी
ट्रंप ने कहा कि ईरान के पास अब ना नौसेना बची है, ना रडार और ना ही वायुसेना। उनके कई नेता मारे जा चुके हैं और जिन्होंने कई साल शासन किया वह चले गए। ट्रंप ने यह बयान उन खबरों के जवाब में दिया जिनमें दावा किया गया था कि चीन ईरान को हथियारों की खेप भेजने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि अगर चीन ऐसा करता है तो चीन को बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। यह बयान अमेरिका की उस रणनीति को दर्शाता है जिसमें वह अपने दुश्मनों के सहयोगियों पर भी दबाव बनाने की कोशिश करता है। ट्रंप का यह रुख चीन के लिए एक स्पष्ट संकेत है कि अमेरिका किसी भी तरह की हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेगा।
सीजफायर के बावजूद युद्ध खत्म होने से कोसों दूर
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही दो हफ्ते की एक नाजुक सीजफायर डील होने के बावजूद कई लोगों को डर है कि यह जंग अभी खत्म होने से कोसों दूर है। अमेरिकी सेना और जंगी जहाज अभी भी ईरान के पास तैनात हैं। वहीं ईरान भी चुप नहीं बैठा है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी इंटेलिजेंस का मानना है कि ईरान को अगले कुछ हफ्तों में चीन से नए एयर डिफेंस सिस्टम मिलने की संभावना है। हालांकि चीन इस एक महीने लंबी जंग के दौरान ज्यादातर चुप ही रहा है और उसने अपने सहयोगी ईरान को सीजफायर डील के लिए राजी करने में आखिरी मौके पर दखल भी दिया था। लेकिन चीन का ऐसा कोई भी कदम अमेरिका को उकसाने वाला माना जाएगा।
शी जिनपिंग से मुलाकात पर पड़ सकता है असर
चीन का यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अगले महीने चीन के बहुप्रतीक्षित दौरे पर भी असर डाल सकता है, जहां उन्हें शी जिनपिंग से बातचीत करनी है। हालांकि चीन ने इस इंटेलिजेंस आकलन को गलत बताया है। वाशिंगटन में चीनी दूतावास ने कहा कि चीन ने इस संघर्ष में शामिल किसी भी पक्ष को कभी हथियार नहीं दिए। हम अमेरिका से गुजारिश करते हैं कि वह बेबुनियाद आरोप लगाने, जानबूझकर गलत संबंध जोड़ने और सनसनी फैलाने से परहेज करें। हमें उम्मीद है कि संबंधित पक्ष तनाव कम करने में मदद के लिए और ज्यादा कोशिश करेंगे। यह बयान चीन की उस रणनीति को दर्शाता है जिसमें वह सीधे टकराव से बचने की कोशिश करता है।
चीन भेज सकता है एंटी एयर मिसाइल सिस्टम
यूएस इंटेलिजेंस का मानना है कि चीन शायद ईरान को कंधे से दागी जाने वाली एंटी एयर मिसाइल सिस्टम भेज सकता है। CNN ने यह रिपोर्ट दी है। यूएस और इजराइल के हमलों में अपनी ज्यादातर हवाई सुरक्षा नष्ट हो जाने के बाद ईरान ने इन मैनपैड्स का इस्तेमाल यूएस के कम ऊंचाई पर उड़ने वाले सैन्य विमानों को निशाना बनाने और उन्हें मार गिराने के लिए किया है। दरअसल इस महीने की शुरुआत में यूएस के F-15 ई लड़ाकू विमान और ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर को मार गिराने के लिए ईरान ने शायद इन्हीं मैन पोर्टेबल हवाई सुरक्षा सिस्टम का इस्तेमाल किया था। दो दशकों से भी ज्यादा वक्त में यह पहली बार था जब यूएस के लड़ाकू विमान दुश्मन की गोलीबारी से मार गिराए गए थे।
ईरान ने एडवांस डिफेंस सिस्टम का किया इस्तेमाल
हालांकि ईरान ने इस मामले में ज्यादा जानकारी नहीं दी है, लेकिन उसके इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी कि आईआरजीसी ने इस मामले के पीछे एक नए एडवांस डिफेंस सिस्टम का हाथ बताया है। यह पता नहीं है कि क्या यह कोई चीनी सिस्टम था। एक्सपर्ट्स ने पहले कहा है कि ईरान शायद चीनी HQ9B का इस्तेमाल कर रहा है जो एक बहुत ही एडवांस लंबी दूरी की मिसाइल सिस्टम है। अगर यह साबित हो जाता है कि ईरान चीनी हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है तो यह अमेरिका-चीन संबंधों में एक नया तनाव पैदा कर सकता है। यही कारण है कि ट्रंप ने इतनी सख्त चेतावनी दी है।
अमेरिका-ईरान वार्ता फेल, बड़ा खुलासा
इसी बीच एक बड़ी खबर और भी सामने आई है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ता फेल हो चुकी है। जे डिवेंस ने खुद प्रेस ब्रीफिंग के दौरान इस बात का जिक्र किया और उन्होंने बताया कि यूएस और ईरान के बीच चल रही वार्ता अब फेल हो चुकी है। जे डिवेंस ने बड़ा बयान देते हुए इस बात का खुलासा किया है। यह विकास इस क्षेत्र में शांति की उम्मीदों पर एक बड़ा झटका है। वार्ता की विफलता का मतलब है कि आने वाले समय में तनाव और बढ़ सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच के संबंध पहले से ही बेहद खराब हैं और वार्ता की विफलता ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
जानें पूरा मामला
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कई दशकों पुराना है। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से दोनों देशों के बीच संबंध खराब हैं। हाल के वर्षों में परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और आतंकवाद के आरोपों ने इस तनाव को और बढ़ाया है। चीन ईरान का एक प्रमुख सहयोगी है और उसने कई मौकों पर ईरान का समर्थन किया है। अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद चीन ईरान से तेल खरीदता रहा है। अब हथियारों की आपूर्ति के आरोप ने इस पूरे समीकरण को एक नया आयाम दे दिया है। ट्रंप की चेतावनी यह साफ करती है कि अमेरिका किसी भी देश को ईरान की मदद करने की इजाजत नहीं देगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को कड़ी चेतावनी दी, ईरान को हथियार भेजने पर बड़ी मुश्किलें झेलनी पड़ेंगी।
- ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की नौसेना, रडार और वायुसेना पूरी तरह नष्ट हो चुकी है, कई नेता मारे गए।
- CNN रिपोर्ट के अनुसार चीन ईरान को एयर डिफेंस सिस्टम भेजने की तैयारी में है, अमेरिकी इंटेलिजेंस ने दिया अलर्ट।
- चीन ने आरोपों को खारिज किया, वाशिंगटन में चीनी दूतावास ने कहा कभी हथियार नहीं भेजे।
- ईरान ने यूएस के F-15 और ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर मार गिराने के लिए एडवांस डिफेंस सिस्टम का किया इस्तेमाल।
- ट्रंप के चीन दौरे और शी जिनपिंग से मुलाकात पर पड़ सकता है असर, तनाव बढ़ने की आशंका।
- अमेरिका-ईरान वार्ता फेल हो चुकी है, जे डिवेंस ने प्रेस ब्रीफिंग में किया खुलासा।













