Trump Tariffs India: भारत को टैरिफ की धमकियां देने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बड़ी हार हुई है। अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने ट्रंप के टैरिफ वॉर की रणनीति पर पानी फेर दिया है। कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कह दिया है कि राष्ट्रपति के पास असीमित शक्तियां (Unlimited Power) नहीं हैं। ट्रंप खरबों डॉलर कमाने का मास्टर प्लान बना रहे थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने उनकी पूरी रणनीति को ध्वस्त कर दिया है। आइए जानते हैं कि आखिर वो कौन सा कानून है जिसे ट्रंप अपना हथियार बना रहे थे और कोर्ट ने उसे क्यों रोक दिया।
क्या है IEEPA कानून? जानें पूरा इतिहास
दरअसल ट्रंप ने पिछले साल अप्रैल में एक बड़ी टैरिफ वॉर शुरू की थी। उनका प्लान था रेसिप्रोकल टैरिफ (जवाबी शुल्क) लगाने का। ट्रंप इसके लिए IEEPA कानून का सहारा ले रहे थे। IEEPA का पूरा नाम है- इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट (International Emergency Economic Powers Act)।
इतिहास की बात करें तो यह कानून 1977 में तत्कालीन राष्ट्रपति जिमी कार्टर के समय लाया गया था। इसे 1917 के ट्रेडिंग विद द एनिमी एक्ट (Trading with the Enemy Act) को बदलने के लिए बनाया गया था। इस कानून के तहत राष्ट्रपति को वो ताकत मिलती है जब देश को बाहर से कोई असामान्य या फिर असाधारण खतरा हो। यानी यह कानून राष्ट्रपति को आपातकालीन स्थिति में आर्थिक फैसले लेने की शक्ति देता है।
IEEPA के तहत क्या शर्तें हैं और राष्ट्रपति क्या कर सकते हैं?
राष्ट्रपति IEEPA का इस्तेमाल सिर्फ तब कर सकते हैं जब यह तीन शर्तें पूरी हों:
नेशनल इमरजेंसी घोषित हो: राष्ट्रपति को पहले राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करनी होती है।
कोई बड़ा खतरा सामने हो: देश के सामने कोई असाधारण और गंभीर खतरा होना चाहिए।
खतरे का स्रोत विदेशी हो: यह खतरा किसी विदेशी शक्ति या संस्था से उत्पन्न होना चाहिए।
इस कानून के तहत राष्ट्रपति काफी शक्तिशाली कदम उठा सकते हैं। वे विदेशी संपत्तियों को फ्रीज़ कर सकते हैं, वित्तीय लेन-देन (Financial Transactions) पर बैन लगा सकते हैं, व्यापार और निवेश को रोक सकते हैं और करेंसी ट्रांसफर पर रोक लगा सकते हैं। लेकिन यहां एक अहम बात यह है कि यह कानून सामान्य व्यापार शुल्क (टैरिफ) लगाने के लिए नहीं बनाया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप को क्यों दी हार?
अब सवाल उठता है कि आखिर ट्रंप यहां पर कैसे मात खा गए? सुप्रीम कोर्ट ने बहुत ही पते की बात कही है। कोर्ट ने साफ किया कि IEEPA एक इमरजेंसी बैन एक्ट है, कोई सामान्य व्यापार कानून नहीं। भले ही राष्ट्रपति के पास इमरजेंसी में आर्थिक फैसले लेने की शक्ति है, लेकिन व्यापार और टैक्स पर जो असली अधिकार है, वो आज भी अमेरिकी कांग्रेस (US Congress) के पास है।
कोर्ट ने यह साफ संकेत दिया है कि आपातकाल का बहाना बनाकर अपनी ग्लोबल टैरिफ पॉलिसी को बिना कानून के लागू नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के IEEPA के तहत लगाए गए सभी टैरिफ को अवैध और गैरकानूनी घोषित कर दिया। कोर्ट का कहना है कि IEEPA राष्ट्रपति को यह हक नहीं देता कि वह नेशनल इमरजेंसी के नाम पर पूरी दुनिया पर मनमाना ग्लोबल टैरिफ थोप दें।
ट्रंप की रणनीति को कैसे लगा झटका?
ट्रंप की पूरी आर्थिक रणनीति (Economic Strategy) इसी टैरिफ प्लान पर टिकी थी। वह भारत समेत कई देशों को टैरिफ की धमकियां देकर व्यापार समझौतों में अपने पक्ष में फायदा उठाना चाहते थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने उनकी इस रणनीति को बड़ा झटका दिया है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच एक नई ट्रेड डील हुई है। कोर्ट के इस फैसले से भारत को बड़ी राहत मिली है क्योंकि अब ट्रंप IEEPA के तहत मनमाने ढंग से भारत पर भारी टैरिफ नहीं लगा सकते।
लोकतंत्र में शक्तियों का संतुलन
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने यह साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में शक्तियों का संतुलन (Balance of Powers) कितना जरूरी है। एक तरफ जहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई देशों को धमकियां दे रहे थे, वहीं सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि राष्ट्रपति की शक्तियां असीमित नहीं हैं। उन्हें भी कानून के दायरे में रहकर काम करना होगा।
अब यह देखना होगा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अगला कदम क्या होता है। क्या वह कोई और कानूनी रास्ता निकालेंगे या फिर इस हार को स्वीकार करेंगे? फिलहाल, भारत समेत उन सभी देशों के लिए यह एक बड़ी राहत है जो ट्रंप के टैरिफ वॉर के निशाने पर थे।
मुख्य बातें (Key Points)
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के IEEPA टैरिफ को अवैध करार दिया।
कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति के पास असीमित शक्तियां नहीं हैं और वह आपातकाल के नाम पर मनमाने टैरिफ नहीं लगा सकते।
IEEPA (इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट) 1977 में बना एक कानून है, जो सिर्फ असली आपातकाल में विदेशी खतरों से निपटने के लिए है।
यह कानून राष्ट्रपति को सामान्य व्यापार शुल्क लगाने का अधिकार नहीं देता, यह अधिकार अमेरिकी कांग्रेस के पास है।
ट्रंप की इस हार से भारत समेत कई देशों को बड़ी राहत मिली है, जो उनके टैरिफ वॉर के निशाने पर थे।








