India US trade deal : भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से अटकी टैरिफ डील को लेकर शुक्रवार को एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा सामने आया है। अमेरिका के वाणिज्य मंत्री Howard Lutnick ने कहा है कि प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा राष्ट्रपति Donald Trump को फोन न किए जाने की वजह से दोनों देशों के बीच टैरिफ समझौता आगे नहीं बढ़ सका। यह बयान ऐसे समय आया है जब खुद ट्रंप लगातार भारत, चीन और रूस को लेकर सख्त रुख दिखा रहे हैं और भारत पर टैरिफ बढ़ाने के संकेत दे चुके हैं।

टैरिफ डील अटकने पर Trump camp का सीधा आरोप
हावर्ड लुटनिक ने एक पॉडकास्ट में कहा कि भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ को लेकर सहमति बन चुकी थी, लेकिन उसे अंतिम रूप देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच सीधी बातचीत जरूरी थी। उनके मुताबिक भारत को साफ तौर पर बताया गया था कि उसके पास “तीन शुक्रवार” हैं, जिनमें पीएम मोदी को राष्ट्रपति ट्रंप से बात करनी थी। लुटनिक का दावा है कि भारत इस कॉल को लेकर असहज था और प्रधानमंत्री मोदी ने फोन नहीं किया, जिसके चलते वह समय सीमा निकल गई और बातचीत ठप हो गई।
‘ट्रेन छूट चुकी है’ वाला बयान
अमेरिकी वाणिज्य मंत्री ने यह भी कहा कि जब भारत ने बाद में संपर्क किया और कहा कि वह डील के लिए तैयार है, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उनके शब्दों में, भारत उस ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कर रहा था जो पहले ही स्टेशन छोड़ चुकी है। लुटनिक ने दावा किया कि इसके बाद अमेरिका ने इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम जैसे देशों के साथ समझौते आगे बढ़ा दिए और भारत के लिए पहले जैसी डील अब टेबल पर नहीं है।

ट्रंप का सख्त रुख और 500% टैरिफ का संकेत
यह बयान ऐसे दौर में आया है जब राष्ट्रपति ट्रंप लगातार भारत पर टैरिफ बढ़ाने के संकेत दे रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि अमेरिका रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने वाले कानून पर हस्ताक्षर कर चुका है, जिससे भारत पर भी दबाव बढ़ सकता है। ट्रंप पहले भी कई मौकों पर भारत का नाम लेते हुए व्यापार असंतुलन की बात कर चुके हैं।
अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अमेरिका की दूरी
इसी बीच अमेरिका ने कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों से खुद को अलग कर लिया है, जिनमें भारत की पहल से बना International Solar Alliance भी शामिल है। इस फैसले के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या चीन इस संगठन में एंट्री करेगा। भारत पहले ही साफ कर चुका है कि चीन के शामिल होने से उसे कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन अमेरिका का यह कदम भारत-अमेरिका रिश्तों में एक और तल्खी के रूप में देखा जा रहा है।

भारत का रुख और सरकारी चुप्पी
जहां ट्रंप camp की ओर से लगातार बयानबाजी हो रही है, वहीं भारत की तरफ से साफ किया गया है कि देश अपने फैसले हमेशा अपने नागरिकों के हितों को ध्यान में रखकर लेगा। हालांकि, हावर्ड लुटनिक के इस नए दावे पर फिलहाल भारत सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
विश्लेषण: डील से ज्यादा राजनीति की गूंज
यह पूरा विवाद बताता है कि भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ डील अब सिर्फ व्यापारिक मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि इसमें कूटनीति और घरेलू राजनीति की छाया भी साफ दिखने लगी है। ट्रंप के सख्त बयान और उनके करीबी मंत्रियों के आरोप यह संकेत देते हैं कि आने वाले समय में भारत पर दबाव बढ़ सकता है, लेकिन भारत का संतुलित और आत्मनिर्भर रुख इस तनाव को किस दिशा में ले जाएगा, यह देखना अहम होगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- US Commerce Secretary का दावा, PM Modi की कॉल न होने से टैरिफ डील अटकी
- ट्रंप camp ने कहा, भारत “तीन शुक्रवार” की समयसीमा चूक गया
- अमेरिका ने अन्य देशों के साथ डील आगे बढ़ाई
- ट्रंप ने भारत पर टैरिफ बढ़ाने के संकेत दिए
- लुटनिक के बयान पर भारत सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार








