Trauma Life Support Training : चंडीगढ़, 17 जनवरी। गंभीर सड़क हादसों और जलने की घटनाओं में जान बचाने की तैयारी को मजबूत करने के लिए PGIMER Chandigarh ने हरियाणा के मेडिकल अधिकारियों के लिए एक दिवसीय Immediate Trauma Life Support और Burn Management Training Course आयोजित किया। यह प्रशिक्षण भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत हुआ, जिसका मकसद अस्पताल पहुंचते ही मिलने वाली शुरुआती चिकित्सा को और प्रभावी बनाना है।
राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत हुआ प्रशिक्षण
यह कोर्स National Programme for Prevention and Management of Trauma and Burn Injuries (NPPMTBI) के अंतर्गत आयोजित किया गया, जो Ministry of Health and Family Welfare की एक अहम पहल है। प्रशिक्षण का फोकस ऐसे मामलों पर रहा, जहां सही समय पर इलाज न मिलने से मौत या गंभीर जटिलताएं हो जाती हैं।
वरिष्ठ डॉक्टरों ने बताई शुरुआती इलाज की अहमियत
Centre of Excellence (Trauma & Burns) के नोडल अधिकारी और प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. अतुल पराशर ने कहा कि अस्पताल के अंदर शुरुआती ट्रॉमा और बर्न केयर को मजबूत करना बेहद जरूरी है। वहीं, एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. निधि भाटिया ने एयरवे मैनेजमेंट और शुरुआती रेसुसिटेशन को जीवन रक्षक बताया। ऑर्थोपेडिक्स विभाग के डॉ. विशाल कुमार ने शुरुआती चरण में हड्डियों और मांसपेशियों की चोटों को समय पर स्थिर करने पर जोर दिया।
65 से ज्यादा मेडिकल अधिकारियों ने लिया हिस्सा
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में हरियाणा के अलग-अलग जिलों से आए 65 से अधिक मेडिकल अधिकारियों ने हिस्सा लिया। उन्हें शुरुआती ट्रॉमा असेसमेंट, रेसुसिटेशन, एयरवे मैनेजमेंट, ब्लीडिंग कंट्रोल और प्रारंभिक बर्न केयर की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी गई। लेक्चर, इंटरएक्टिव सेशन और हैंड्स-ऑन स्किल स्टेशंस के जरिए प्रशिक्षण को व्यवहारिक बनाया गया।
हरियाणा में इमरजेंसी रिस्पॉन्स मजबूत, अब अस्पतालों पर फोकस
भारत में हर साल करीब 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं और 1.7 लाख से ज्यादा मौतें होती हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग गंभीर जलने की चोटों के कारण अस्पतालों में भर्ती होते हैं। हरियाणा पहले ही Emergency Service 112 के जरिए प्री-हॉस्पिटल इमरजेंसी रिस्पॉन्स में देश में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। अब इस प्रशिक्षण के जरिए अस्पतालों के भीतर इलाज की कड़ी को भी मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी
कार्यक्रम में हरियाणा मेडिकल काउंसिल के सदस्य और पूर्व DGHS डॉ. परवीन गर्ग सहित State Institute of Health and Family Welfare, पंचकूला के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। सभी ने इस पहल को समय की जरूरत बताया।
विश्लेषण (Analysis): क्यों अहम है यह पहल
यह प्रशिक्षण सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सड़क हादसों और बर्न इंजरी से होने वाली रोकी जा सकने वाली मौतों को कम करने की दिशा में ठोस कदम है। जब मेडिकल अधिकारी शुरुआती घंटों में सही फैसले लेते हैं, तो मरीज की जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। PGIMER की यह पहल राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर ट्रॉमा केयर सिस्टम को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
जानें पूरा मामला
PGIMER द्वारा आयोजित यह एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम हरियाणा में ट्रॉमा और बर्न केयर की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से किया गया, ताकि अस्पताल पहुंचते ही मरीज को बेहतर और त्वरित इलाज मिल सके।
मुख्य बातें (Key Points)
- PGIMER ने हरियाणा के डॉक्टरों को ट्रॉमा और बर्न मैनेजमेंट की ट्रेनिंग दी
- 65 से ज्यादा मेडिकल अधिकारियों ने प्रशिक्षण में हिस्सा लिया
- शुरुआती इलाज से रोकी जा सकने वाली मौतों पर रोक लगाने पर जोर
- राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर ट्रॉमा केयर मजबूत करने की पहल








