Collegium System Controversy : सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में उस वक्त अप्रत्याशित स्थिति बन गई जब देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस संजीव खन्ना (Justice Sanjiv Khanna) ने एक वरिष्ठ वकील मैथ्यूज नेदुम्परा (Advocate Mathews Nedumpara) को कॉलेजियम प्रणाली (Collegium System) पर बयान देने पर कड़ी फटकार लगाई। यह घटनाक्रम उस समय हुआ जब अधिवक्ता नेदुम्परा वर्ष 2022 में दायर एक रिट याचिका को सूचीबद्ध करने की मांग कर रहे थे, जिसमें कॉलेजियम प्रणाली को समाप्त करने और राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC – National Judicial Appointments Commission) को फिर से लागू करने की मांग की गई है।
नेदुम्परा ने सीजेआई से कहा कि इस याचिका को पहले भी तीन बार सूचीबद्ध करने की कोशिश की गई थी, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। उन्होंने कहा कि देश को एनजेएसी (NJAC) की जरूरत है और यह बात उपराष्ट्रपति (Vice President) भी कह चुके हैं। इस पर सीजेआई संजीव खन्ना ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “कृपया मेरे मुंह में शब्द न डालें और अदालत में कोई राजनीतिक भाषण न दें।” यह बयान लाइव लॉ (Live Law) की रिपोर्ट में सामने आया है।
पिछली याचिका खारिज कर चुकी है रजिस्ट्री
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री पहले ही यह याचिका अस्वीकार कर चुकी है, यह कहते हुए कि वर्ष 2015 में एनजेएसी को असंवैधानिक करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट इसका निपटारा कर चुका है। रजिस्ट्री के अनुसार, इस तरह की पुनरावृत्ति याचिकाएं अनुच्छेद 32 के तहत विचारणीय नहीं हैं क्योंकि यह पहले से निर्णीत मुद्दा है।
क्या था NJAC अधिनियम और विवाद
राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग अधिनियम (NJAC Act) को संसद ने वर्ष 2014 में पारित किया था, और अधिकांश राज्यों ने इसे मंजूरी भी दी थी। इसका उद्देश्य न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया में कार्यपालिका और प्रतिष्ठित व्यक्तियों की भागीदारी सुनिश्चित करना था। लेकिन वर्ष 2015 में सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन बनाम भारत संघ मामले में इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता के खिलाफ बताते हुए रद्द कर दिया गया था।
राजनीति और कानून के बीच चलती रही बहस
एनजेएसी पर बहस समय-समय पर तेज होती रही है। यह मुद्दा न केवल न्यायिक प्रणाली बल्कि देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया और राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर भी केंद्र में बना रहता है। वकील नेदुम्परा की मांग और उस पर सीजेआई की प्रतिक्रिया ने एक बार फिर कॉलेजियम प्रणाली को लेकर बहस को हवा दे दी है।








