MSP (Minimum Support Price) की गारंटी को लेकर किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच होने वाली महत्वपूर्ण बैठक से पहले शंभू बॉर्डर (Shambhu Border) पर किसानों ने बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया। गुरुवार को आयोजित इस महापंचायत (Mahapanchayat) में हजारों किसानों ने भाग लिया, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ गया है।
पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से आए किसान नेताओं ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर MSP की लीगल गारंटी नहीं दी गई, तो आंदोलन और तेज होगा। इस महापंचायत के माध्यम से किसान संगठनों ने अपनी एकजुटता और शक्ति का प्रदर्शन किया।
सरकार और किसानों के बीच कौन-कौन से मुद्दे रहेंगे अहम?
शुक्रवार को चंडीगढ़ में होने वाली बैठक में केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों और संयुक्त किसान मोर्चा (SKM – Samyukt Kisan Morcha) के 14 नेताओं के बीच चर्चा होगी। इस वार्ता में ये अहम मुद्दे उठाए जा सकते हैं:
-
MSP की लीगल गारंटी – किसानों की सबसे बड़ी मांग यही है कि केंद्र सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी दर्जा दे।
-
स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें – किसान चाहते हैं कि सरकार आयोग की सिफारिशों को लागू करे।
-
कर्जमाफी (Loan Waiver) – किसानों का कहना है कि उन्हें लगातार कर्ज के बोझ तले दबाया जा रहा है, इसलिए संपूर्ण कर्जमाफी होनी चाहिए।
-
लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई – किसान यह भी मांग कर रहे हैं कि आंदोलन के दौरान हुए पुलिस लाठीचार्ज और गिरफ्तारी पर स्पष्टीकरण दिया जाए।
-
बिजली और डीजल पर सब्सिडी – किसानों की एक और मांग है कि उन्हें सस्ते दामों पर बिजली और डीजल दिया जाए।
किसान नेता बोले – ‘हम अपने हक के लिए पीछे नहीं हटेंगे’
इस महापंचायत में किसान नेता सरवन सिंह पंढेर (Sarwan Singh Pandher) और जगजीत सिंह डल्लेवाल (Jagjit Singh Dallewal) ने साफ कहा कि अगर सरकार हमारी मांगें नहीं मानती है तो आंदोलन और बड़ा होगा।
अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS – All India Kisan Sabha) के नेता अभिमन्यु कोहर (Abhimanyu Kohar) ने कहा कि सरकार को अब फैसला करना होगा कि वह किसानों के साथ है या नहीं।
सरकार की रणनीति क्या होगी?
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार की तरफ से इस बैठक का नेतृत्व केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी (Prahlad Joshi) करेंगे। सरकार किसानों की कुछ मांगों पर सहमति जता सकती है, लेकिन MSP की कानूनी गारंटी को लेकर अभी भी असमंजस बना हुआ है।
सरकार किसानों को संतुष्ट करने के लिए कुछ आंशिक घोषणाएं कर सकती है, जैसे छोटे और सीमांत किसानों के लिए कर्ज माफी की योजना या MSP पर और अधिक खरीद की गारंटी। लेकिन किसान संगठन इस बार किसी भी तरह के आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं और लिखित गारंटी की मांग कर रहे हैं।
आने वाले दिनों में क्या हो सकता है?
अगर शुक्रवार की बैठक में सरकार और किसान संगठनों के बीच सहमति नहीं बनती है, तो किसान आंदोलन और तेज हो सकता है। किसान संगठनों ने पहले ही चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे दिल्ली की ओर कूच कर सकते हैं।
केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच होने वाली इस बैठक पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं। सरकार को जहां आने वाले लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2024) को देखते हुए किसानों को संतुष्ट करना जरूरी है, वहीं किसान संगठन भी किसी भी कीमत पर पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। अब देखना होगा कि यह बैठक किसानों के पक्ष में कोई ठोस नतीजा निकालती है या फिर आंदोलन एक बार फिर से तेज होता है।








