महामारी के साइड इफेक्ट: तेजी से बढ़ रहे हैं नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर के मरीज, जानिए इससे कैसे बचें

लिवर शरीर के सबसे जरूरी अंगों में से एक है, जो हमारे शरीर को स्वस्थ रखने में एक जरूरी और अहम भूमिका निभाता है। इसलिए, इस बीमारी से जुड़ी जानकारी होना बहुत जरूरी है। ताकि समय रहते इसके जोखिम को कम किया जा सके। हाल ही में  19 अप्रैल को विश्व लिवर दिवस (World Liver Day) मनाया गया। इस दिन लिवर को लेकर जागरुकता फैलाने का काम किया जाता है। जिससे लोगों को पता रहे कि लिवर से जुड़ी बीमारियों से कैसे बचा जा सकता है और कैसे उनकी रोकथाम की जा सकती है। किसी भी व्यक्ति के लिवर में वसा या फैट की मात्रा सामान्य से अधिक होने की स्थिति को फैटी लिवर कहा जाता है।

पिछले दो साल से दुनिया के कई हिस्सों में लॉकडाउन लागू रहा। लोगों के घरों के भीतर कैद होने के लिए मजबूर हो गए। जिससे लोगों का आवागमन बेहद कम हो गया है। एक तरीके से कहा जाए तो लोगों को चलना-फिरना और शारीरिक गतिविधियां पूरी तरह से थम गईं। जिससे लोगों में बीमारियां भी बढ़ी हैं।

फैटी लिवर की समस्या दो तरह की होती है। पहला अल्कोहल फैटी लिवर और दूसरा नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर। अगर शराब का सेवन नहीं करते हैं तो भी आपको लिवर की समस्या हो सकती है। इसे नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिसीज कहा जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि लिवर पर सबसे ज्यादा असर ज्यादा मात्रा में शराब पीने से पड़ता है, उसके बाद अगर लिवर पर कोई बीमारी असर डालती है तो वह है फैटी लिवर यानी लिवर पर चर्बी चढ़ जाना। लिवर से होने वाली तकलीफों में करीब 40 फीसद लोगों में यही समस्या पाई जाती है।

नॉन अल्कोहॉलिक फैटी लिवर के कारण

पिछले कुछ सालों से लोगों के चलने-फिरने की आदत बहुत कम हो गई है। वर्क फ्रॉम होम के चलते लोगों का आना-जाना बिल्कुल बंद हो गया। लोगों को लाइफ स्टाइल में बदलाव आया है। तरह-तरह के खाने-पीने की आदतों से लोगों की लाइफ स्टाइल पर काफी गंभीर असर पड़ा है। जिससे फैटी लिवर के मरीज काफी बढ़े हैं। यह एक गंभीर बीमारी बनती जा रह है। अब दिल का दौरा पड़ने का खतरा भी बढ़ गया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि आज कम से कम हर परिवार में एक सदस्य फैटी लिवर की बीमारी से पीड़ित है।

फैटी लिवर के मरीजों को अधिक थकान, पेट के दाईं तरफ ऊपरी हिस्से में दर्द, पेट में सूजन, शरीर में अत्यधिक थकान, स्किन और आंखों पर नीलापन, हथेलियों का लाल होना, स्पाइडर वेन्स, आंखों का पीलापन, स्किन पर खुजली और रैशेज और वजन कम होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

उन पदाथों को ज्यादा खाएं, जिसमें वसा यानी फैट कम हो। अपने भोजन में ताजा फलों और सब्जियों को शामिल करें। हाई कैलोरी वाली चीजें न खाएं। तली हुई चीजें, वाइट ब्रेड, ज्यादा नमक, रेड मीट से दूरी बनाकर रहें। हरी सब्जियां, अखरोट, जैतून का तेल, लहसुन, मेवे, फलियां, जामुन और अंगूर खाएं। एक साथ ज्यादा देर एक्सरसाइज न करें।

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