Border Roads Organisation: जहां ऑक्सीजन कम होती है, जहां नदियां गर्जना करती हैं, जहां तपते रेगिस्तान का सन्नाटा भी जलाता है—वहां सीमा सड़क संगठन (BRO) डामर, फौलाद और पत्थरों पर साहस के अमिट हस्ताक्षर अंकित करता है। 7 मई 1960 को स्थापित यह संगठन आज भारत की सीमाओं का मूक प्रहरी बन चुका है।
सीमा पर तैनात सैनिक के लिए ये सड़कें रक्षा की जीवन रेखा हैं, तो सुदूर घाटियों में बसे ग्रामीणों के लिए ये उम्मीद के सेतु हैं।
‘श्रमेण सर्वं साध्यम्’—परिश्रम से सब कुछ संभव
BRO का आदर्श वाक्य है—’श्रमेण सर्वं साध्यम्’ यानी “परिश्रम से सब कुछ संभव है।” पिछले छह दशकों में इसी मंत्र ने BRO को केवल एक निर्माण एजेंसी से ऊपर उठाकर भारत की सीमाओं के शिल्पकार के रूप में स्थापित किया है।
अपनी स्थापना के बाद से, BRO ने भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों और मित्र पड़ोसी देशों में 64,100 किलोमीटर से अधिक लंबी सड़कों, 1,179 पुलों, 7 सुरंगों और 22 हवाई पट्टियों का निर्माण कर एक कीर्तिमान स्थापित किया है।

₹17,900 करोड़ का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
वित्तीय वर्ष 2024-25 में BRO ने ₹16,690 करोड़ का अपना अब तक का सर्वाधिक व्यय दर्ज किया। इसी गति को बरकरार रखते हुए, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ₹17,900 करोड़ का व्यय लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
केंद्रीय बजट 2024-25 में BRO का आवंटन ₹6,500 करोड़ से बढ़ाकर बजट 2025-26 में ₹7,146 करोड़ कर दिया गया है।
वर्ष 2024 और 2025 की दो साल की अवधि में, BRO ने 356 इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित कीं।

18 परियोजनाएं, 11 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश
मात्र दो परियोजनाओं—पूर्व में वर्तक और उत्तर में बीकन—के साथ अपनी शुरुआत करने वाला BRO, आज 18 डायनामिक प्रोजेक्ट्स का नेतृत्व कर रहा है।
उत्तर-पश्चिम भारत में 9 परियोजनाएं: जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान में।
उत्तर-पूर्व और पूर्वी भारत में 8 परियोजनाएं: सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम और मेघालय में।
भूटान में एक परियोजना: प्रोजेक्ट दंतक।

अरुणाचल से लद्दाख तक—सामरिक सड़कों का जाल
अरुणाचल प्रदेश: वर्तक, अरुणांक, उदयक और ब्रह्मांक जैसी परियोजनाएं सिसेरी पुल, सियोम पुल, सेला टनल और नेचिपु टनल के माध्यम से दूर-दराज के गांवों को LAC से जोड़ती हैं।
लद्दाख: हिमांक, बीकन, दीपक, विजयक और योजक जैसी परियोजनाएं श्रीनगर-लेह राजमार्ग, दारबुक-श्योक-DBO मार्ग और अटल टनल जैसे सामरिक मार्गों का रखरखाव करती हैं।
प्रोजेक्ट विजयक ने 1,000 किलोमीटर से अधिक सड़कों का जाल बिछाया है और 80 से अधिक प्रमुख पुलों का निर्माण किया है।
अटल टनल—दुनिया की सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग
रोहतांग दर्रे के नीचे निर्मित 9.02 किमी लंबी अटल टनल, 10,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित दुनिया की सबसे लंबी राजमार्ग टनल है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा उद्घाटित यह टनल लेह-मनाली के बीच हर मौसम में निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करती है।
सेला टनल: 13,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह सुरंग तवांग तक बारहमासी पहुंच सुनिश्चित करती है।
नेचिफू टनल: 500 मीटर लंबी यह टनल बालीपारा-चारद्वार-तवांग मार्ग पर सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करती है।
जोजिला दर्रा—रिकॉर्ड 32 दिनों में खोला
BRO ने केवल 32 दिनों के रिकॉर्ड शीतकालीन बंद के बाद, 1 अप्रैल 2025 को जोजिला दर्रे को फिर से खोलकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया।
वर्ष 2023 में भी BRO ने इतिहास रचा था जब जोजिला दर्रे को रिकॉर्ड 16 मार्च को ही खोल दिया गया—मार्ग बंद होने के मात्र 68 दिनों के भीतर।
आपदा प्रबंधन में अग्रणी भूमिका
सड़क निर्माण से कहीं आगे बढ़कर, BRO अक्सर प्राकृतिक आपदाओं के विरुद्ध भारत की पहली डिफेंस लाइन के रूप में कार्य करता है।
2004 की सुनामी हो, कश्मीर का भूकंप हो या लद्दाख की आकस्मिक बाढ़—BRO सबसे पहले पहुंचने वालों में से एक होता है।
ब्रिज ऑफ कम्पैशन: वर्ष 2021 में जब ऋषिगंगा की बाढ़ ने रैणी के पुल को नष्ट कर दिया था, तब BRO ने मात्र 26 दिनों में 200 फीट लंबा बेली ब्रिज बनाकर संपर्क बहाल किया।

भूटान, म्यांमार, अफगानिस्तान और ताजिकिस्तान में पदचिह्न
प्रोजेक्ट दंतक (भूटान): 1961 में शुरू हुई यह परियोजना पारो और योनफुला हवाई अड्डों के विकास के साथ-साथ हाइड्रोपावर इंफ्रास्ट्रक्चर में भी योगदान दे रही है।
भारत-म्यांमार मैत्री सड़क: 160 किमी लंबी यह सड़क भारत के मोरेह को म्यांमार के तामू और कालेवा से जोड़ती है।
देलाराम-ज़ारंज राजमार्ग (अफगानिस्तान): 218 किमी लंबा यह राजमार्ग अफगानिस्तान को ईरान और चाबहार बंदरगाह तक पहुंच प्रदान करता है।
ताजिकिस्तान: फारखोर और आयनी वायुसेना अड्डों का रणनीतिक पुनर्निर्माण किया गया।
भविष्य की योजनाएं—27,300 किमी सड़कों का लक्ष्य
BRO के पर्सपेक्टिव प्लान के तहत, सीमावर्ती क्षेत्रों में लगभग 27,300 किलोमीटर लंबी 470 सड़कों के निर्माण की योजना है।
ट्रांस-कश्मीर कनेक्टिविटी परियोजना: लगभग 717 किलोमीटर लंबी यह परियोजना पुंछ से सोनमर्ग तक जाएगी। साधना पास, पी-गली, जेड-गली और राजदान पास पर अत्याधुनिक सुरंगों की योजना बनाई गई है।
विश्लेषण: राष्ट्र निर्माण का मूक शिल्पकार
BRO की कहानी केवल सड़कों, पुलों और सुरंगों की नहीं है। यह उन हजारों जवानों और इंजीनियरों की कहानी है जो -40 डिग्री तापमान में भी काम करते हैं, जो बर्फीले तूफानों से जूझते हैं और जो अपनी जान जोखिम में डालकर राष्ट्र की सीमाओं को सुरक्षित बनाते हैं।
आज जब भारत की सीमाओं पर तनाव बढ़ रहा है, तब BRO की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। हर नई सड़क, हर नया पुल, हर नई सुरंग न केवल सैनिकों की आवाजाही को आसान बनाती है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले आम नागरिकों के जीवन को भी बदलती है।

मुख्य बातें (Key Points)
- 64,100 किमी सड़कें, 1,179 पुल, 7 सुरंगें और 22 हवाई पट्टियां—BRO की 64 वर्षों की उपलब्धि
- ₹17,900 करोड़—वित्त वर्ष 2025-26 का व्यय लक्ष्य
- 18 परियोजनाएं 11 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में सक्रिय
- अटल टनल—दुनिया की सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग (9.02 किमी)
- 27,300 किमी नई सड़कों का भविष्य का लक्ष्य








