TDS Rules Budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को पेश किए गए बजट में छोटे टैक्सपेयर्स के लिए बड़ी राहत का ऐलान किया है। अब उन्हें लोअर या निल TDS सर्टिफिकेट के लिए अफसरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार ने Rule-Based Automated System लाने का प्रस्ताव रखा है, जो टैक्स कंप्लायंस को आसान और पेपरलेस बना देगा।
क्या है छोटे टैक्सपेयर्स की असली समस्या?
अगर आप नौकरीपेशा हैं या छोटे निवेशक हैं तो TDS यानी Tax Deducted at Source से जरूर वाकिफ होंगे। यह वह टैक्स है जो आपकी आमदनी मिलने से पहले ही काट लिया जाता है।
समस्या तब आती है जब आपकी कुल इनकम इतनी कम हो कि टैक्स बनता ही न हो, फिर भी TDS कट जाता है। इसके बाद शुरू होती है रिफंड की लंबी और थकाऊ प्रक्रिया।
कई बार तो महीनों तक इंतजार करना पड़ता है। फॉर्म भरो, फॉलो-अप करो, अफसरों के दफ्तर के चक्कर लगाओ और फिर भी पूरा पैसा वापस मिलने की गारंटी नहीं।
अब तक कैसे काम करता था सिस्टम?
मौजूदा व्यवस्था में अगर आपकी इनकम कम है और आप नहीं चाहते कि TDS कटे, तो आपको Form 13 भरकर Lower या Nil TDS Certificate के लिए अप्लाई करना पड़ता है।
इसके बाद Assessing Officer के अप्रूवल का इंतजार करना होता है। यह पूरी प्रक्रिया मैनुअल है और अफसरों की मर्जी पर निर्भर करती है।
एक-एक फाइल कई हाथों से गुजरती है। इसमें हफ्ते लग जाते हैं, कभी-कभी तो महीने भी।
नई स्कीम में क्या बदलेगा?
वित्त मंत्री ने संसद में कहा कि अब एक Rule-Based Automated Process लागू होगी। इसमें सिस्टम खुद तय करेगा कि आप Lower TDS या Zero TDS के योग्य हैं या नहीं।
यह फैसला पहले से तय नियमों के आधार पर होगा। जैसे आपकी Income Level क्या है, Tax Status क्या है, पिछले साल का रिटर्न कैसा था।
अब आपको न तो एप्लीकेशन डालनी पड़ेगी, न ही अफसरों के पीछे भागना होगा। सिस्टम ऑटोमैटिकली सर्टिफिकेट जारी कर देगा।
Form 15G और Form 15H की समस्या भी होगी हल
निवेशकों के लिए एक और बड़ी राहत आई है। जो लोग कई कंपनियों या बैंकों में शेयर और FD रखते हैं, उन्हें हर जगह अलग-अलग Form 15G या Form 15H जमा करना पड़ता था।
एक जगह भी फॉर्म देना भूल गए तो TDS कट जाता था। फिर रिफंड की भागदौड़ शुरू।
नए प्रस्ताव के तहत CDSL और NSDL जैसी डिपॉजिटरीज एक बार फॉर्म स्वीकार करेंगी और इलेक्ट्रॉनिक तरीके से सभी संबंधित कंपनियों को भेज देंगी।
इससे बार-बार फॉर्म भरने का झंझट खत्म होगा और गलती की संभावना भी न के बराबर रह जाएगी।
वित्त मंत्री ने क्या कहा?
निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में कहा कि यह स्कीम Small Taxpayers के लिए है। Rule-Based Automated Process से Lower या Nil Deduction Certificate मिलना आसान हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि जो निवेशक कई कंपनियों में Securities रखते हैं, उनके लिए Depositories Form 15G और 15H स्वीकार करके सीधे संबंधित कंपनियों को भेजेंगी।
आम आदमी को क्या फायदा होगा?
इस बदलाव का सीधा असर करोड़ों छोटे टैक्सपेयर्स पर पड़ेगा।
पहला फायदा – टैक्स ऑफिस के चक्कर खत्म होंगे। दूसरा – बेवजह कटा TDS अब नहीं कटेगा। तीसरा – रिफंड के लिए महीनों इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
जब इनकम मिलेगी तो हाथ में ज्यादा पैसा होगा। पहले जो पैसा TDS में फंसकर सरकार के पास चला जाता था और फिर रिफंड में आता था, वह अब सीधे आपकी जेब में रहेगा।
क्या सच में जमीन पर असर दिखेगा?
सरकार का विजन तो साफ है – Automation और Centralized Processing से टैक्स सिस्टम को पारदर्शी और तेज बनाना।
लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब यह स्कीम लागू होगी। क्या सिस्टम सही से काम करेगा? क्या टेक्निकल गड़बड़ियां नहीं आएंगी? क्या डेटा मिसमैच की समस्या नहीं होगी?
ये सवाल अभी अनुत्तरित हैं। धरातल पर असर स्कीम के लागू होने के बाद ही पता चलेगा।
पृष्ठभूमि: TDS सिस्टम की जटिलताएं
भारत में TDS सिस्टम दशकों पुराना है। इसका मकसद था कि टैक्स सोर्स पर ही कट जाए और सरकार को राजस्व समय पर मिले। लेकिन समय के साथ यह सिस्टम इतना जटिल हो गया कि छोटे टैक्सपेयर्स के लिए सिरदर्द बन गया।
Form 13, Form 15G, Form 15H जैसे कागजात की भरमार, अफसरों की मनमानी और धीमी प्रक्रिया ने लोगों का टैक्स सिस्टम पर भरोसा कम किया। इसी को सुधारने के लिए सरकार ने अब Automation का रास्ता चुना है।
मुख्य बातें (Key Points)
- Lower या Nil TDS Certificate के लिए अब Form 13 भरने और अफसरों के अप्रूवल की जरूरत नहीं होगी
- Rule-Based Automated System खुद तय करेगा कि आप TDS छूट के योग्य हैं या नहीं
- Form 15G और 15H एक बार Depository को देने पर सभी कंपनियों को इलेक्ट्रॉनिकली शेयर हो जाएगा
- रिफंड के लिए महीनों इंतजार की समस्या से मिलेगी राहत
- स्कीम अभी प्रस्तावित है, लागू होने पर ही असली असर पता चलेगा








