Taliban अमेरिका को नीचा दिखाने के लिए 9/11 की बरसी पर कर सकती है नई सरकार का ऐलान

क़ाबुल, 7 सितंबर (The News Air)
कई दिनों की टालमटोल के बाद Afghanistan में 9/11 की बरसी पर नई सरकार का ऐलान किया जा सकता है। माना जा रहा है कि ऐसा अमेरिका को चिढ़ाने हो रहा है। सरकार का मुखिया मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद को बनाया जा सकता है। क़ाबुल के स्थानीय मीडिया के अनुसार, हिब्तुल्लाह अखुंदजादा ने मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद के नाम का प्रस्ताव रखा है। यह यानी इन्हें रईस-ए-जम्हूर या रईस उल वज़ारा का पद मिलेगा। मुल्ला बरादर और मुल्ला अब्दुस सलाम उनके डिप्टी के तौर पर काम करेंगे।

UN की टेरर लिस्ट में है हसन का नाम– इसका नाम संयुक्त राष्ट्र( UN) की Terror List में शामिल है। हसन अखुंद 2001 में अमेरिका के साथ युद्ध शुरू होने से पहले अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सरकार में मंत्री था। कहा जाता है कि वो तालिबान के आध्यात्मिक नेता शेख हिबतुल्ला अखुंदजादा का क़रीबी है। यह सशस्त्र आंदोलन के संस्थापकों में से थे।

तालिबान के संस्थापक बेटा संभाल सकता है रक्षा विभाग- सूत्रों के अनुसार तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर के बेटे याक़ूब को रक्षा मंत्री, जबकि हक्कानी नेटवर्क के सिराजुद्दीन हक्कानी को गृह मंत्री का पद दिया जा सकता है। हसन अखुंद पिछले 20 साल से तालिबान के रहबरी शुरा का प्रमुख है। हसन अखुंद सैन्य पृष्ठभूमि के बजाय एक धार्मिक नेता के तौर पर जाना जाता है। इसका जन्म कंधार में हुआ। यह पिछली तालिबानी सरकार में भी कई ख़ास पद संभाल चुका है। वहीं, अभी तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद को सूचना मंत्री बनाया जा सकता है।

सरकार के गठन से पहले कलह– हालांकि नई सरकार के गठन से पहले ही कई गुटों में मनमुटाव की ख़बरें आ रही हैं। तालिबान के दोहा, कंधार और आतंकी संगठन हक्कानी नेटवर्क के बीच पदों के बँटवारे को लेकर विवाद होने लगा है। पाकिस्तान किसी ऐसे नेता को सरकार का मुखिया बनाना चाहता है, तो उसके इशारे पर काम करे। हसन अखुंद इसमें फिट बैठता है।

ISI चीफ़ के क़ाबुल दौरे से ही अटकलें शुरू हो गई थीं- पिछले दिनों जब पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI के चीफ़ लेफ्टिनेंट जनरल फैज हामिद क़ाबुल के दौरे पर आए थे, तभी नई सरकार के मुखिया के तौर पर मुल्ला हसन अखुंद के नाम को लेकर चर्चाएं तेज़ हो गई थी। इस बीच नई सरकार में महिलाओं की भागीदारी को लेकर भी प्रदर्शन होने लगे हैं। क़ाबुल में महिलाओं ने पाकिस्तान मुर्दाबाद तक के नारे लगाए।

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