Swami Avimukteshwaranand Controversy : देश के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में ध्वजारोहण किया और प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। इसी दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद के बीच मुख्यमंत्री का बयान सामने आया, जिसमें उन्होंने संविधान, न्याय और व्यवस्था से ऊपर खुद को मानने की सोच पर कड़ा संदेश दिया।
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गणतंत्र दिवस पर संविधान की याद
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ था और बीते 76 वर्षों की यात्रा में देश ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। इसके बावजूद संविधान की वजह से आज उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना मजबूत हुई है।
विभाजन की साजिशों पर टिप्पणी
सीएम योगी ने कहा कि इतिहास में कुछ लोगों ने भाषाई और जातीय आधार पर देश को बांटने के षड्यंत्र रचे, लेकिन वे अधिक समय तक टिक नहीं पाए। उन्होंने इशारों में कहा कि जब भी संविधान के मूल भाव को कमजोर करने की कोशिश होती है, तब समाज में बेचैनी और “सुगबुगाहट” दिखाई देती है।
‘मैं संविधान से ऊपर हूं’ की सोच पर कड़ा रुख
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर कोई व्यक्ति यह कहता है कि वह न्याय, संविधान या व्यवस्था से ऊपर है, तो यह भारत के संविधान की अवमानना है। उन्होंने यह भी कहा कि बनाई गई व्यवस्था पर विश्वास न करना और अपनी बात को ही अंतिम मानना स्वीकार्य नहीं हो सकता।
समष्टि का भाव और राष्ट्र प्रथम
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत का संविधान व्यक्ति को नहीं, बल्कि समष्टि के भाव से समाज को जोड़ता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से संविधान के प्रति सम्मान बनाए रखने और उन राष्ट्र नायकों को याद करने की अपील की, जिनका एक ही ध्येय था—राष्ट्र प्रथम। मुख्यमंत्री के अनुसार, यही भावना देश के संकल्पों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में मदद करेगी।
आम लोगों पर असर
मुख्यमंत्री के इस बयान से यह संदेश गया कि संवैधानिक मर्यादा और न्याय की सीमा सभी के लिए समान है। आम नागरिकों के लिए यह भरोसे की बात है कि शासन व्यवस्था संविधान के दायरे में रहकर ही चलेगी।
क्या है पृष्ठभूमि
शंकराचार्य से जुड़े विवाद के बीच आया यह बयान इसलिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि गणतंत्र दिवस जैसे अवसर पर संविधान की सर्वोच्चता और राष्ट्र की एकता पर खुलकर बात की गई। यह संदेश ऐसे समय में आया है, जब संवैधानिक मूल्यों को लेकर सार्वजनिक बहस तेज है।
मुख्य बातें (Key Points)
- लखनऊ में 77वें गणतंत्र दिवस पर सीएम योगी ने किया ध्वजारोहण।
- संविधान की भूमिका और एक भारत-श्रेष्ठ भारत पर जोर।
- भाषाई और जातीय आधार पर देश को बांटने की साजिशों का जिक्र।
- संविधान और न्याय से ऊपर खुद को मानने की सोच पर कड़ा संदेश।








