Speaker Sandhwan Varanasi Visit 2026 : पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने उत्तर प्रदेश के पावन नगर वाराणसी पहुंचकर विभिन्न धार्मिक स्थलों के दर्शन किए और बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर में मत्था टेका। यह मंदिर पवित्र गंगा नदी के तट पर स्थित है, जो न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि हमारी समृद्ध विरासत और आधुनिकता का एक उत्कृष्ट संगम भी है।
उन्होंने वाराणसी (उ.प्र.) स्थित गुरु का बाग गुरुद्वारा साहिब में भी नतमस्तक होकर मत्था टेका। यह स्थल साहिब श्री गुरु नानक देव जी के चरणों की छाया से पावन है। स्पीकर ने समस्त पंजाबवासियों की भलाई के लिए भी अरदास की।
स संधवां ने वाराणसी की पवित्र भूमि के बारे में कहा कि यहां पहुंचकर उन्हें अपार शांति और सुकून की अनुभूति हुई। यह वही ऐतिहासिक स्थान है, जहां साहिब श्री गुरु नानक देव जी अपनी पहली उदासी के दौरान पधारे थे और पंडित चतुर दास के साथ विचार-विमर्श करते हुए ‘ओंकार’ बाणी के माध्यम से सत्य का मार्ग दिखाया था।
इस दौरान स्पीकर संधवां ने ‘बेगमपुरा’ की अवधारणा देने वाले शिरोमणि भक्त गुरु रविदास जी के पवित्र जन्म स्थल, सीर गोवर्धनपुर में भी मत्था टेका। ‘बेगमपुरा’ से भक्त रविदास जी का आशय उस स्थान से था, जहां कोई ग़म या दुख न हो, कोई भेदभाव और कोई अन्याय न हो। उन्होंने कहा कि आइए हम गुरु रविदास जी द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने का प्रयास करें और जाति-पाति के बंधनों से ऊपर उठकर भाईचारे की भावना को मजबूत करें।
स्पीकर की वाराणसी यात्रा के 3 प्रमुख पड़ाव (Key Highlights)
बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर: गंगा तट पर स्थित इस प्राचीन और भव्य मंदिर में स्पीकर ने मत्था टेका। उन्होंने इस स्थल को आस्था और आधुनिकता का शानदार उदाहरण बताया।
गुरुद्वारा ‘गुरु का बाग’: यह स्थान श्री गुरु नानक देव जी की पहली उदासी (यात्रा) की याद दिलाता है। यहीं गुरु साहिब ने पंडित चतुर दास को ‘ओंकार’ बाणी के माध्यम से सत्य का मार्ग दिखाया था। स्पीकर ने यहाँ पंजाब की भलाई के लिए अरदास की।
गुरु रविदास जन्म स्थली (सीर गोवर्धनपुर): संधवां ने ‘बेगमपुरा’ (दुख-रहित स्थान) की अवधारणा देने वाले भक्त रविदास जी के चरणों में नमन किया। उन्होंने जाति-पाति के भेदभाव को खत्म कर आपसी भाईचारे को मज़बूत करने पर ज़ोर दिया।








