Somnath Temple Controversy Nehru. प्रधानमंत्री Narendra Modi के सोमनाथ मंदिर दौरे से ठीक पहले देश की सियासत में एक पुराना और बेहद संवेदनशील अध्याय फिर से खुल गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने देश के पहले प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोलते हुए उन्हें सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का ‘सबसे बड़ा विरोधी’ करार दिया है। बीजेपी प्रवक्ता Sudhanshu Trivedi ने पुराने दस्तावेजों और संस्मरणों का हवाला देते हुए Congress की मानसिकता की तुलना ‘मुस्लिम लीग’ और ‘मैकाले’ की सोच से कर दी है।
‘मस्जिदों के लिए सरकारी खजाना, मंदिर से दूरी’
बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में वी.एन. गाडगिल (V.N. Gadgil) के लेखों और बयानों का जिक्र करते हुए नेहरू की धर्मनिरपेक्षता पर गंभीर सवाल उठाए। त्रिवेदी ने दावा किया कि गाडगिल ने लिखा था, “पीडब्ल्यूडी (PWD) मंत्री के नाते मैंने नेहरू जी के आदेश पर कई मस्जिदों और दरगाहों की मरम्मत सरकारी खर्च पर करवाई है।”
सुधांशु त्रिवेदी ने आगे कहा कि जहां एक तरफ मस्जिदों पर सरकारी पैसा खर्च हो रहा था, वहीं दूसरी तरफ नेहरू का मानना था कि अगर सोमनाथ मंदिर का निर्माण जनता की प्रेरणा और निजी सहयोग से भी हो रहा है, तो भी उसमें जाने से परहेज करना चाहिए। बीजेपी ने इसे कांग्रेस का दोहरा चरित्र बताया।
‘मुस्लिम लीग की मानसिकता से प्यार’
त्रिवेदी ने कांग्रेस पर वैचारिक हमला बोलते हुए कहा कि आजादी के बाद भी कांग्रेस मानसिक रूप से ‘मैकाले की मानसिकता’ (Macaulay’s Mindset) से ग्रसित थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस को उस समय भी मुस्लिम लीग की मानसिकता से प्यार था और आज भी उनकी सोच वैसी ही है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की घोषणा ने करोड़ों भारतीयों में हर्ष की लहर दौड़ दी थी, लेकिन तत्कालीन नेतृत्व (नेहरू) इसके खिलाफ खड़ा था।
‘दिल में राज छुपाए बैठा हूं…’
सुधांशु त्रिवेदी ने अपने शायराना अंदाज में कांग्रेस और नेहरू के पुराने भाषणों पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि ‘सिलेक्टेड वर्क्स ऑफ जवाहरलाल नेहरू’ का पन्ना जब भी खुलता है, तो वह सच बोलता है और कांग्रेस के दिल को चीरता है। उन्होंने एक शेर के जरिए कटाक्ष किया:
“बैठा हूं दिल में इतने राज छुपाए, जरा सा होठ हिले तो दिल डगमगाए।”
उनका इशारा साफ था कि इतिहास के पन्नों में ऐसे कई राज दफन हैं जो कांग्रेस की कथित हिंदू विरोधी नीतियों को उजागर करते हैं।
संपादकीय विश्लेषण: इतिहास के आईने में वर्तमान की राजनीति
सोमनाथ मंदिर हमेशा से भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण और धर्मनिरपेक्षता की बहस का केंद्र रहा है। प्रधानमंत्री मोदी का सोमनाथ दौरा महज एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी है। बीजेपी द्वारा नेहरू के पुराने प्रसंगों को छेड़ना यह दर्शाता है कि पार्टी 2024 के सियासी माहौल में ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ बनाम ‘नेहरूवादी धर्मनिरपेक्षता’ की लकीर को और गहरा करना चाहती है। यह विवाद केवल अतीत का नहीं है, बल्कि यह आज की पीढ़ी को यह बताने की कोशिश है कि सांस्कृतिक धरोहरों को लेकर दो प्रमुख पार्टियों का दृष्टिकोण शुरू से कितना अलग रहा है।
जानें पूरा मामला (Background)
सोमनाथ मंदिर को विदेशी आक्रांताओं ने कई बार तोड़ा था। आजादी के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने इसके पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था। इतिहासकार अक्सर इस बात का जिक्र करते हैं कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू इस प्रोजेक्ट में सरकार की प्रत्यक्ष भागीदारी के पक्ष में नहीं थे, क्योंकि वे इसे एक धर्मनिरपेक्ष राज्य के सिद्धांतों के विपरीत मानते थे। इसी ऐतिहासिक मतभेद को आधार बनाकर बीजेपी ने आज कांग्रेस को घेरा है।
मुख्य बातें (Key Points)
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BJP ने Jawaharlal Nehru को सोमनाथ मंदिर निर्माण का विरोधी बताया।
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Sudhanshu Trivedi ने दावा किया कि नेहरू ने सरकारी खर्च पर मस्जिदों की मरम्मत करवाई थी।
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बीजेपी का आरोप- Congress की मानसिकता मुस्लिम लीग और मैकाले जैसी है।
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पीएम मोदी के सोमनाथ दौरे से पहले यह सियासी बयानबाजी तेज हुई है।








