Silver Price All Time High 2026 – साल 2025 जाते-जाते चांदी ने निवेशकों की झोली में ऐसा ‘चांदी’ का सिक्का डाला है, जिसने इतिहास के सारे पन्ने पलट दिए हैं। कमोडिटी बाजार के इतिहास में पहली बार चांदी की कीमत 2.5 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के जादुई आंकड़े को पार कर गई। 29 दिसंबर 2025 को MCX (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर चांदी ने ₹2,54,000 प्रति किलो का ‘ऑल टाइम हाई’ (All-Time High) बनाया। यह एक ऐसा स्तर है, जिसके बारे में कुछ साल पहले सोचना भी नामुमकिन लगता था।
एक साल में पैसा तीन गुना!
अगर किसी निवेशक ने 1 जनवरी 2025 को चांदी में ₹1 लाख लगाए होते, तो 29 दिसंबर को उसकी वैल्यू लगभग ₹2.97 लाख हो गई होती। यानी सिर्फ एक साल में करीब 196% का छप्परफाड़ रिटर्न। पूरे साल के औसत को देखें तो चांदी ने 175% का शानदार मुनाफा दिया है, जो सोने या शेयर बाजार के रिटर्न से कहीं ज्यादा है।
क्यों लगी चांदी में आग? 4 बड़े कारण
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस ऐतिहासिक तेजी के पीछे चार प्रमुख कारण हैं:
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चीन की नई नीति: 1 जनवरी 2026 से China चांदी के निर्यात पर सख्त लाइसेंस सिस्टम लागू कर रहा है। अब केवल बड़ी कंपनियां ही एक्सपोर्ट कर पाएंगी, जिससे ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित हुई है।
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सप्लाई का संकट: लंदन और शंघाई के गोदामों में चांदी का स्टॉक रिकॉर्ड निचले स्तर पर है। मांग ज्यादा और माल कम होने से दाम आसमान छू रहे हैं।
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इंडस्ट्रियल डिमांड: आज चांदी सिर्फ जेवर नहीं रही। Solar Panels, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs), और डिफेंस सेक्टर में इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, जिससे यह एक अहम इंडस्ट्रियल मेटल बन गई है।
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निवेशकों का भरोसा: ईटीएफ (ETF) में भारी निवेश और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद ने भी कीमतों को सहारा दिया है।
तेजी के बाद तेज गिरावट का डर
29 दिसंबर को रिकॉर्ड बनाने के बाद उसी दिन चांदी में भारी गिरावट भी देखी गई। मुनाफा वसूली (Profit Booking) के चलते कीमतें करीब ₹21,000 टूटकर ₹2,33,120 पर बंद हुईं। यह उतार-चढ़ाव छोटे निवेशकों के लिए खतरे की घंटी भी है।
विश्लेषण: क्या 2026 में भी जारी रहेगी चमक? (Expert Analysis)
साल 2026 में 2025 जैसी धमाकेदार रैली की उम्मीद करना थोड़ा जोखिम भरा हो सकता है। बाजार का इतिहास बताता है कि 1979-80 की बड़ी रैली के बाद चांदी में 60% की गिरावट आई थी। हालांकि, ‘ग्रीन एनर्जी’ (Green Energy) और टेक्नोलॉजी में चांदी की बढ़ती खपत इसे लंबी अवधि के लिए मजबूत बनाती है। बेस केस में चांदी ₹2.80 लाख से ₹3.20 लाख प्रति किलो तक जा सकती है। लेकिन निवेशकों को सावधानी बरतनी होगी। एकमुश्त पैसा लगाने के बजाय ‘सिप’ (SIP) की तरह किस्तों में निवेश करना समझदारी होगी।
आम आदमी पर असर (Human Impact)
चांदी के इतने महंगे होने से आम आदमी के लिए चांदी के बर्तन या भारी जेवर खरीदना अब सपने जैसा हो गया है। शादी-ब्याह के लिए चांदी की खरीदारी का बजट अब पूरी तरह बिगड़ चुका है। हालांकि, जिन्होंने पहले निवेश किया था, उनके लिए यह जश्न का मौका है।
जानें पूरा मामला (Background)
साल 2025 चांदी के लिए अब तक का सबसे बेहतरीन साल साबित हुआ है। 29 दिसंबर को एमसीएक्स पर इसने ₹2,54,000 का स्तर छूकर नया कीर्तिमान स्थापित किया। यह तेजी मुख्य रूप से वैश्विक भू-राजनीतिक स्थितियों और चीन की नीतियों के कारण आई है।
मुख्य बातें (Key Points)
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Silver ने पहली बार ₹2.5 लाख प्रति किलो का आंकड़ा पार किया।
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29 दिसंबर 2025 को All Time High ₹2,54,000 दर्ज किया गया।
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निवेशकों को एक साल में करीब 196% Return मिला।
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तेजी का मुख्य कारण China Export Policy और इंडस्ट्रियल डिमांड है।
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जानकारों की सलाह- 2026 में SIP के जरिए ही निवेश करें।








