Sheesh Mahal CAG Report ने खुद को ईमानदारी का प्रतीक बताने वाली आम आदमी पार्टी (AAP) और उसके सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल की साख पर करारा प्रहार किया है। भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (CAG) ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल के सरकारी आवास 06, फ्लैगस्टाफ रोड यानी ‘शीश महल’ के नवीनीकरण में भारी वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा किया है। ऑडिट में सामने आया कि इस बंगले की प्रारंभिक स्वीकृत राशि ₹9.59 करोड़ थी, लेकिन कुल खर्च ₹33.66 करोड़ तक पहुँच गया, जो मंजूर बजट से 342% अधिक है। कांग्रेस विधायक और पूर्व शिक्षा मंत्री परगट सिंह ने सोमवार 24 मार्च को इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए केजरीवाल पर जमकर निशाना साधा।
₹18.88 करोड़ सिर्फ सजावट पर: सरकारी खजाने का खुला दुरुपयोग
Sheesh Mahal CAG Report का सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि केजरीवाल के इस सरकारी बंगले पर लगभग ₹18.88 करोड़ केवल उच्च गुणवत्ता वाले स्पेसिफिकेशन, कलात्मक वस्तुओं, प्राचीन सामानों और सजावटी साज-सज्जा पर खर्च किए गए। यानी कुल खर्च का आधे से ज्यादा हिस्सा सिर्फ ऐशो-आराम और शान-शौकत पर उड़ा दिया गया।
कैग ने सार्वजनिक धन के इस गैर-आवश्यक उपयोग पर गंभीर चिंता जताई है। एक सरकारी बंगले के नवीनीकरण में इतनी भारी रकम कलात्मक और सजावटी सामान पर खर्च करना किसी भी पैमाने पर जनता के पैसे का दुरुपयोग है। यह वही अरविंद केजरीवाल हैं जो सत्ता संभालने से पहले VIP कल्चर का पुरजोर विरोध करते थे, सरकारी बंगलों में रहने के खिलाफ थे और दावा करते थे कि बतौर मुख्यमंत्री वे दो कमरों के प्राइवेट मकान में रहेंगे।
पहले काम कराया, बिल बाद में पास किए: ₹9.34 करोड़ की पोस्ट-फैक्टो अप्रूवल
Sheesh Mahal CAG Report में एक और गंभीर अनियमितता उजागर हुई है। कैग ने पाया कि इस बंगले में पहले काम कराया गया और बिल बाद में पास किए गए। ₹9.34 करोड़ की राशि पश्च-स्वीकृति (Post-Facto Approvals) के जरिए मंजूर की गई, यानी बिना पूर्व अनुमति के खर्च किया गया और बाद में उसे वैध बनाने के लिए कागजी मंजूरी ली गई।
इसके अलावा कैग ने यह भी खुलासा किया कि स्टाफ क्वार्टर और अन्य बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के लिए आवंटित धन का पुनर्नियोजन (Re-appropriation) किया गया। यानी जो पैसा कर्मचारियों के आवास और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए रखा गया था, वह मुख्यमंत्री के बंगले की सजावट में लगा दिया गया। कैग के ऑडिट ने वित्तीय नियंत्रण और मंजूर बजट के पालन में गंभीर अंतर को रेखांकित किया है, जो प्रशासनिक और प्रक्रिया संबंधी दोनों स्तरों पर भारी कमियाँ दर्शाता है।
परगट सिंह: “सत्ता सिर पर हावी हुई, खुद और परिवार को ऐश करवाने में जुट गए”
Sheesh Mahal CAG Report पर प्रतिक्रिया देते हुए परगट सिंह, जो अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के सचिव और पंजाब के पूर्व शिक्षा मंत्री हैं, ने केजरीवाल पर बेहद तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह वही केजरीवाल हैं जो दिल्ली में सत्ता संभालने से पहले VIP कल्चर का पुरजोर विरोध करते थे। सरकारी बंगले में रहने के खिलाफ थे। कहते थे कि बतौर मुख्यमंत्री दो कमरों के प्राइवेट मकान में रहेंगे।
परगट सिंह ने कहा कि लेकिन सत्ता संभालते ही सत्ता उनके सिर पर हावी हो गई और वे सरकारी खर्च पर खुद और अपने परिवार को ऐश करवाने में जुट गए। ₹9.59 करोड़ के मंजूर बजट को ₹33.66 करोड़ तक पहुँचाना कोई सामान्य लागत वृद्धि नहीं, बल्कि सरासर सरकारी खजाने का दुरुपयोग है। कैग की रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि कैसे अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री रहते हुए सरकारी फंड का दुरुपयोग किया और हर तरह की सुविधा का लाभ उठाने में सबसे आगे रहे।
पंजाब वाले बंगले की भी कैग जांच हो: परगट सिंह की माँग
Sheesh Mahal CAG Report के खुलासों के बाद परगट सिंह ने एक और अहम माँग रखी है। उन्होंने कहा कि पंजाब में भी केजरीवाल के लिए जो सरकारी बंगला तैयार करवाया गया था, उसकी भी कैग जांच होनी चाहिए। वह बंगला भी चर्चा में रहा था और उसमें भी करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं। उन्होंने माँग की कि इस खर्चे का भी पूरा खुलासा होना चाहिए ताकि सरकारी पैसे की बर्बादी का पता लगाया जा सके।
यह माँग इसलिए अहम है क्योंकि दिल्ली के शीश महल पर कैग ने जो अनियमितताएँ उजागर की हैं, वही पैटर्न पंजाब में भी दोहराया गया हो सकता है। अगर दिल्ली में 342% अधिक खर्च हो सकता है, तो पंजाब में क्या हालात रहे, यह जनता को जानने का अधिकार है।
विपक्ष की माँग: पूरी जवाबदेही और विस्तृत स्पष्टीकरण दे सरकार
Sheesh Mahal CAG Report के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ बेहद तेज रही हैं। विपक्षी नेताओं ने दिल्ली सरकार से खर्च और स्वीकृति प्रक्रियाओं के बारे में पूरी जवाबदेही और विस्तृत स्पष्टीकरण माँगा है। ये निष्कर्ष उच्च-प्रोफाइल राज्य परियोजनाओं में पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और शासन पर बहस को फिर से जीवित कर रहे हैं।
परगट सिंह ने कहा कि इस रिपोर्ट से उम्मीद है कि सार्वजनिक क्षेत्र में सरकारी खर्च की समीक्षा और कड़ी निगरानी के लिए दबाव बढ़ेगा। साथ ही वित्तीय नियंत्रण और मॉनिटरिंग तंत्र को और सुदृढ़ करने की माँग होगी। यह मामला सिर्फ एक बंगले के नवीनीकरण का नहीं है, बल्कि उस पार्टी की विश्वसनीयता का है जिसने ईमानदारी और सादगी को अपनी राजनीतिक पहचान बनाया था।
आम नागरिक के लिए यह सवाल बेहद प्रासंगिक है कि जब एक मुख्यमंत्री अपने सरकारी बंगले पर ₹33.66 करोड़ खर्च कर सकता है, जिसमें ₹18.88 करोड़ सिर्फ सजावट पर हों, तो “ईमानदारी” और “सादगी” के दावे कितने खोखले हैं? जनता का पैसा जनता की सेवा में लगना चाहिए, न कि किसी नेता की शान-शौकत में। कैग की यह रिपोर्ट एक बार फिर याद दिलाती है कि सत्ता और जवाबदेही साथ-साथ चलनी चाहिए।
मुख्य बातें (Key Points)
- Sheesh Mahal CAG Report: केजरीवाल के सरकारी बंगले (06 फ्लैगस्टाफ रोड) पर मंजूर ₹9.59 करोड़ की बजाय ₹33.66 करोड़ खर्च हुए, जो 342% अधिक है। ₹18.88 करोड़ सिर्फ सजावटी और कलात्मक सामान पर उड़ाए गए।
- कैग ने ₹9.34 करोड़ की पोस्ट-फैक्टो अप्रूवल (पहले काम, बिल बाद में) और स्टाफ क्वार्टर के फंड के पुनर्नियोजन जैसी गंभीर अनियमितताएँ उजागर कीं।
- कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने केजरीवाल पर VIP कल्चर अपनाने और सरकारी फंड के दुरुपयोग का आरोप लगाया, पंजाब वाले बंगले की भी कैग जांच की माँग की।
- विपक्ष ने दिल्ली सरकार से पूरी जवाबदेही और विस्तृत स्पष्टीकरण माँगा, सार्वजनिक खर्च पर कड़ी निगरानी की माँग तेज।






