Shashi Tharoor Congress : कांग्रेस सांसद शशि थरूर के एक बयान ने पार्टी के भीतर नई बहस छेड़ दी है। एक बुक फेस्टिवल में बोलते हुए थरूर ने कहा कि वह जवाहरलाल नेहरू की हर नीति से सहमत नहीं हैं। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब भारतीय जनता पार्टी लंबे समय से नेहरू की नीतियों पर सवाल उठाती रही है। थरूर के इस रुख के बाद कांग्रेस के भीतर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या पार्टी नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी, इस पर कोई कदम उठाएगा।
नेहरू पर थरूर की साफ बात
शशि थरूर ने कहा कि वह नेहरू के प्रशंसक हैं और उनके दिमाग व सोच का सम्मान करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उनकी हर नीति का 100 प्रतिशत समर्थन किया जाए। उन्होंने कहा कि नेहरू ने भारत में लोकतंत्र की स्थापना की, जो उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। साथ ही उन्होंने यह भी माना कि कुछ मामलों में नेहरू के फैसलों की आलोचना की जा सकती है।
1962 युद्ध का संदर्भ
थरूर ने चीन के साथ 1962 के युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि हार के पीछे नेहरू के कुछ फैसले जिम्मेदार हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी नेहरू विरोधी है और हर मुद्दे पर उन्हें जिम्मेदार ठहरा देती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि नेहरू की आलोचना बिल्कुल नहीं होनी चाहिए।
पार्टी लाइन से अलग होने से इनकार
इस पूरे विवाद के बीच थरूर ने साफ किया कि वह कभी पार्टी लाइन से अलग नहीं हुए। उन्होंने सवाल उठाया कि किसने यह तय किया कि उन्होंने पार्टी की विचारधारा का उल्लंघन किया है। थरूर ने कहा कि उन्होंने अलग-अलग मुद्दों पर अपनी राय रखी है और पार्टी को इससे परेशान नहीं होना चाहिए।
मीडिया कवरेज पर नाराजगी
शशि थरूर ने यह भी कहा कि विवाद अक्सर तब पैदा होते हैं, जब लोग पूरी बात पढ़े या सुने बिना सिर्फ सुर्खियों के आधार पर राय बना लेते हैं। उन्होंने कहा कि जब लोग पूरा संदर्भ समझते हैं, तो असली मुद्दा साफ हो जाता है। थरूर ने याद दिलाया कि वह 17 साल से कांग्रेस में हैं और अपने सहयोगियों के साथ उनके संबंध अच्छे हैं।

बीजेपी में जाने की अटकलें फिर तेज
थरूर के इस बयान के बाद एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या वह बीजेपी में जाने की योजना बना रहे हैं। हालांकि थरूर ने ऐसी किसी भी अटकल को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी के भीतर असहमति और विचारों का आदान-प्रदान लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
आंतरिक राजनीति और भविष्य
थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस में आंतरिक चुनाव पहले भी होते रहे हैं। उन्होंने अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने और हारने का जिक्र करते हुए कहा कि इसके बाद कोई कहानी नहीं बननी चाहिए। केरल विधानसभा चुनाव और उम्मीदवार चयन को लेकर भी उन्होंने कहा कि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व ही करेगा।
विश्लेषण: बयान से बढ़ी असहजता
थरूर की टिप्पणी ने कांग्रेस को एक असहज स्थिति में ला खड़ा किया है। एक तरफ पार्टी नेहरू की विरासत को अपना मजबूत आधार मानती है, वहीं दूसरी तरफ थरूर जैसे वरिष्ठ नेता की आलोचनात्मक टिप्पणी विपक्ष को नया नैरेटिव दे सकती है। यह मामला अब सिर्फ बयान तक सीमित नहीं, बल्कि कांग्रेस की आंतरिक एकजुटता और विचारधारा की व्याख्या से जुड़ गया है।
जानें पूरा मामला
एक सार्वजनिक मंच पर नेहरू की नीतियों पर शशि थरूर की संतुलित लेकिन आलोचनात्मक टिप्पणी ने कांग्रेस के भीतर और बाहर दोनों जगह सियासी बहस छेड़ दी है। पार्टी लाइन, व्यक्तिगत राय और लोकतांत्रिक बहस—तीनों के बीच संतुलन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
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शशि थरूर ने नेहरू की सभी नीतियों से सहमति से इनकार किया
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1962 युद्ध के संदर्भ में नेहरू के फैसलों पर टिप्पणी
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थरूर ने पार्टी लाइन से अलग होने से इंकार किया
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बीजेपी में जाने की अटकलें फिर चर्चा में
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कांग्रेस की आंतरिक राजनीति पर नया दबाव








