Shankaracharya Yogi Adityanath Controversy : प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर जो हमला बोला है, उसने पूरी भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नींव हिला दी है। शंकराचार्य ने खुलेआम कहा कि योगी एक तरफ महंत हैं और दूसरी तरफ संविधान की शपथ लेकर मुख्यमंत्री हैं, दोनों एक साथ कैसे चल सकते हैं?
यह टकराव सिर्फ दो संतों के बीच का नहीं रहा। अब यह दिल्ली और लखनऊ की राजनीतिक लड़ाई का मैदान बन गया है।
‘राम मंदिर पर योगी की भूमिका पर तीखे सवाल’
शंकराचार्य ने सीधे सवाल दागा, “राम मंदिर के लिए योगी जी ने कौन सी मेहनत की? बता दो आज।”
उन्होंने कहा कि जितनी बार योगी अयोध्या गए, वह सब अपनी राजनीति चमकाने के लिए था। जब राम जन्मभूमि का मुकदमा चल रहा था, तब कितनी बार योगी ने पैरवी करने के लिए अदालत का रुख किया?
शंकराचार्य का तर्क था कि मुकदमा वकीलों ने जीता, पक्षकारों ने जीता। BJP कहां पक्षकार थी? BJP की सरकार होने से मंदिर बना, यह कहना वैसा ही है जैसे कौवे के बैठने से फल गिर गया तो कहें कौवे ने तोड़ा।
‘महंत और मुख्यमंत्री का द्वंद्व’
शंकराचार्य ने एक बेहद गहरा सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ महंत हैं, यानी धर्म से जुड़े हैं। साथ ही वे मुख्यमंत्री भी हैं, जिसका मतलब है उन्होंने धर्मनिरपेक्षता और संविधान की शपथ ली है।
“दोनों एक साथ कैसे चल सकते हैं?”
यह सवाल BJP की उस पूरी राजनीतिक विचारधारा पर चोट करता है जो हिंदुत्व के आश्रय सत्ता साधती चली आई है।
‘दिल्ली और लखनऊ के बीच खींचतान’
इस पूरे विवाद का एक और पहलू है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने योगी आदित्यनाथ को उस ढाल के रूप में खड़ा किया था जो दिल्ली की सत्ता को चेतावनी देती थी। लेकिन अब खुद शंकराचार्य उसी योगी पर हमलावर हैं।
दिल्ली की राजनीतिक सत्ता ने इस दौर में एक नया पाठ पढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की जोड़ी ने साफ कर दिया कि सत्ता हिंदुत्व की विचारधारा से नहीं, बल्कि अपने तौर-तरीकों से चलती है।
‘केशव प्रसाद मौर्य का नाम क्यों आया?’
शंकराचार्य ने उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का नाम लेने से गुरेज नहीं किया। यह संकेत साफ है कि वे मान रहे हैं कि लखनऊ में कुर्सी बदलने वाली है।
लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि दिल्ली ने इस पूरे मामले पर खामोशी साध रखी है। संघ परिवार भी चुप है। खुद योगी आदित्यनाथ भी इस विवाद को तूल नहीं दे रहे।
‘नए BJP अध्यक्ष का प्रवेश’
इसी बीच दो तस्वीरें बेहद अहम हैं। पहली तस्वीर में गृह मंत्री अमित शाह लखनऊ पहुंचे और योगी ने उनका स्वागत किया। दूसरी तस्वीर में प्रधानमंत्री की “मन की बात” के दौरान योगी और BJP के नए अध्यक्ष नितिन नवीन साथ बैठे नजर आए।
नितिन नवीन के लिए सिर्फ दो शख्स मायने रखते हैं – प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह। नागपुर (संघ मुख्यालय) की इसमें कोई भागीदारी नहीं है।
‘श्रृंगेरी मठ से आई बड़ी आवाज’
शंकराचार्य की वैधता पर भी सवाल उठने लगे हैं। लेकिन श्रृंगेरी मठ से साफ संदेश आया कि स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के सिर्फ दो दंडी सन्यासी शिष्य हैं – सदानंद सरस्वती जी और अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी।
इससे शंकराचार्य की स्थिति और मजबूत हुई है।
‘2027 का चुनाव और दिल्ली की रणनीति’
2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव होने हैं। दिल्ली की निगाहें इसी पर टिकी हैं।
महाराष्ट्र में देवेंद्र फडनवीस का कद दिल्ली की सत्ता से बड़ा हो गया, यह चेतावनी दिल्ली को लग चुकी है। इसलिए उत्तर प्रदेश में वही गलती दोहराने का मौका नहीं दिया जाएगा।
दो विकल्प साफ हैं – या तो 2027 में कोई नया चेहरा आए, या अगर टकराव ज्यादा तीखा हो जाए तो बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ मिलकर सरकार बनाई जाए।
‘धर्म युद्ध का ऐलान’
शंकराचार्य ने इसे “धर्म युद्ध” करार दिया है। उन्होंने कहा, “काले अंग्रेजों और मुगलों के द्वारा जो हिंदू-हिंदू कहकर सत्ता में आए हैं, हमारी गाय की हत्या बंद हो, बस यही हमारी मांग है।”
यह पहली बार है जब कोई धर्माचार्य इतने खुलकर BJP की राजनीति पर हमला बोल रहा है।
‘विपक्ष की अनुपस्थिति में नया मोर्चा’
इस वक्त न कांग्रेस है, न समाजवादी पार्टी, न इंडिया गठबंधन – कोई भी BJP को चुनौती देने की स्थिति में नहीं है।
जब चुनौती नहीं मिलती तो अहंकार जागता है। और जब अपनों से लड़ाई होती है तो अक्सर यही कहा जाता है कि यह धर्म की लड़ाई है।
शंकराचार्य ने इसकी मुनादी कर दी है।
‘क्या है पृष्ठभूमि’
यह विवाद महाकुंभ के दौरान शुरू हुआ जब शंकराचार्य ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में शामिल न होने के कारण बताए। उन्होंने कहा कि प्राण प्रतिष्ठा शास्त्र सम्मत नहीं थी। इसके बाद से योगी आदित्यनाथ पर उनके हमले तीखे होते गए। अब यह विवाद राजनीतिक रंग ले चुका है और BJP के भीतर दिल्ली बनाम लखनऊ की लड़ाई का प्रतीक बन गया है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- शंकराचार्य ने योगी आदित्यनाथ के महंत और मुख्यमंत्री दोनों भूमिकाओं पर सवाल उठाए
- राम मंदिर निर्माण में योगी की भूमिका को “राजनीति चमकाना” बताया
- उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का नाम लेकर संकेत दिए कि कुर्सी बदल सकती है
- दिल्ली और संघ परिवार की खामोशी ने सवाल खड़े किए
- 2027 उत्तर प्रदेश चुनाव को लेकर दिल्ली की रणनीति पर सवाल








