Samosa Jalebi Health Side Effects : बीते कुछ दिनों में मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि समोसा, कचौड़ी और जलेबी जैसे लोकप्रिय भारतीय स्नैक्स पर चेतावनी लेबल लगाया जाएगा। हालांकि PIB (Press Information Bureau) ने एक पोस्ट जारी कर साफ कर दिया कि इन फूड्स पर कोई स्वास्थ्य चेतावनी नहीं लगाई जाएगी। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या समोसा-जलेबी वाकई सेहत के लिए हानिकारक हैं? इसका जवाब जानने के लिए मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल नोएडा में क्लीनिकल न्यूट्रिशन की हेड डॉ. करुणा चतुर्वेदी से बात की गई।
डॉक्टर ने बताई पूरी सच्चाई
डॉ. करुणा चतुर्वेदी ने बताया कि समोसा और जलेबी भारत के सबसे लोकप्रिय स्नैक्स हैं जो अपने स्वाद के लिए पसंद किए जाते हैं। लेकिन इनका स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव भी पड़ता है।
कभी-कभार इन्हें खाना ठीक है, लेकिन अगर इन्हें अपने आहार का नियमित हिस्सा बना लिया जाए तो यह गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है।
ट्रांस फैट और सैचुरेटेड फैट का खतरा
समोसे और जलेबी दोनों को डीप फ्राई किया जाता है। इससे इनमें ट्रांस फैट और सैचुरेटेड फैट का लेवल काफी बढ़ जाता है।
ट्रांस फैट विशेष रूप से हानिकारक होते हैं क्योंकि यह खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को बढ़ाते हैं और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को कम करते हैं।
शरीर में इस असंतुलन से हार्ट डिजीज, आर्टरी में रुकावट और दिल से जुड़ी अन्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
जलेबी से ब्लड शुगर का खतरा
जलेबी को चीनी की चाशनी में भिगोया जाता है जिससे इसमें चीनी की मात्रा बहुत ज्यादा हो जाती है। इससे ब्लड शुगर का लेवल तेजी से बढ़ता है।
यह टाइप 2 डायबिटीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ा देता है।
वहीं दूसरी ओर समोसे में अक्सर मैदा और आलू होता है जिनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज्यादा होता है। यह भी ब्लड शुगर के लेवल पर समान रूप से बुरा असर डाल सकते हैं।
मोटापे का बड़ा कारण
मैदा, तली हुई चीजें और चीनी – यह तीनों मिलकर इन स्नैक्स को पचाना मुश्किल बना देते हैं।
नियमित सेवन से आपका मेटाबॉलिज्म धीमा हो सकता है और शरीर में चर्बी जमा हो सकती है। समय के साथ इससे मोटापा बढ़ता जाता है।
इन फूड्स में न्यूट्रिशनल वैल्यू बहुत कम या ना के बराबर होती है। यानी आप सिर्फ कैलोरी खा रहे हैं, पोषण नहीं।
किसे करना चाहिए परहेज?
डॉक्टर ने बताया कि कुछ लोगों के लिए समोसा-जलेबी ज्यादा नुकसानदेह हो सकते हैं:
डायबिटीज के मरीज: जलेबी में चीनी की मात्रा बहुत ज्यादा होने के कारण इन्हें इससे दूर रहना चाहिए।
हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज के मरीज: फैट और नमक की ज्यादा मात्रा के कारण इन दोनों स्नैक्स से बचना चाहिए।
गर्भवती महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग: इन्हें भी इन स्नैक्स का सेवन सीमित करना चाहिए।
आम लोगों पर असर
समोसा-जलेबी भारतीय खान-पान का अहम हिस्सा हैं। शादी-ब्याह, त्योहार या चाय के साथ इनका सेवन आम बात है। लेकिन अगर आप रोजाना या हफ्ते में कई बार इन्हें खाते हैं तो यह आपकी सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
कभी-कभार खाना ठीक है, लेकिन इन्हें आदत न बनाएं। खासकर अगर आपको पहले से कोई बीमारी है तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
क्या है पृष्ठभूमि?
कुछ दिन पहले मीडिया में खबरें आई थीं कि सरकार समोसा, कचौड़ी और जलेबी जैसे फूड्स पर सिगरेट की तरह चेतावनी लेबल लगाने जा रही है। इससे लोगों में काफी हलचल मच गई थी। हालांकि PIB ने फैक्ट चेक करते हुए इस खबर को खारिज कर दिया और साफ किया कि ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। लेकिन इस बहस ने इन लोकप्रिय स्नैक्स के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर जागरूकता जरूर बढ़ाई है।
मुख्य बातें (Key Points)
- समोसा-जलेबी में ट्रांस फैट और सैचुरेटेड फैट होते हैं जोLDL कोलेस्ट्रॉल बढ़ाते हैं
- जलेबी में ज्यादा चीनी होने से टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ता है
- नियमित सेवन से मेटाबॉलिज्म धीमा होता है और मोटापा बढ़ता है
- डायबिटीज, हाई बीपी, हार्ट पेशेंट्स को इनसे बचना चाहिए
- PIB ने साफ किया कि इन फूड्स पर कोई चेतावनी लेबल नहीं लगेगा








