SA vs AFG T20 World Cup 2026 में ऐसा मुकाबला देखने को मिला, जिसे क्रिकेट इतिहास लंबे समय तक याद रखेगा। अहमदाबाद के Narendra Modi Stadium में खेले गए ग्रुप डी मैच में दक्षिण अफ्रीका और अफगानिस्तान ने पहले 20 ओवर में 187-187 रन बनाए। इसके बाद सुपर ओवर में भी 17-17 रन बने और आखिरकार दूसरे सुपर ओवर में दक्षिण अफ्रीका ने 5 रन से जीत दर्ज कर ली।
यह हार अफगानिस्तान के लिए किसी झटके से कम नहीं थी, क्योंकि वह पहली बार किसी ICC टूर्नामेंट में प्रोटियाज को हराने के बेहद करीब पहुंच गया था, लेकिन आखिरी गेंद पर किस्मत ने साथ नहीं दिया।
आखिरी गेंद तक सांसें थाम देने वाला मुकाबला
दक्षिण अफ्रीका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 187 रन बनाए। जवाब में अफगानिस्तान ने भी शानदार संघर्ष करते हुए 187 रन बनाकर मैच टाई कर दिया और मुकाबला सुपर ओवर में पहुंच गया।
पहले सुपर ओवर में अफगानिस्तान ने 17 रन बनाए। जवाब में दक्षिण अफ्रीका को आखिरी गेंद पर 7 रन चाहिए थे और तभी ट्रिस्टन स्टब्स ने छक्का जड़कर मैच को दूसरे सुपर ओवर में पहुंचा दिया, जिससे स्टेडियम में मौजूद दर्शक रोमांच से झूम उठे।
दूसरे सुपर ओवर में 23 रन, फिर भी खत्म नहीं हुआ रोमांच
दूसरे सुपर ओवर में दक्षिण अफ्रीका ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 23 रन बना दिए और मैच लगभग अपनी ओर झुका लिया। अफगानिस्तान की शुरुआत खराब रही और मोहम्मद नबी जल्दी आउट हो गए, जिससे दबाव और बढ़ गया।
लेकिन रहमानुल्लाह गुरबाज ने हार नहीं मानी और लगातार तीन गेंदों पर तीन छक्के जड़कर मुकाबले को फिर से रोमांचक बना दिया। आखिरी गेंद पर जीत के लिए एक और छक्का चाहिए था, लेकिन गेंद सीधा फील्डर के हाथों में चली गई और अफगानिस्तान का सपना टूट गया।
गुरबाज की आंधी, फिर भी अधूरा सपना
गुरबाज ने नियमित ओवरों में 84 रन की शानदार पारी खेली और शुरुआत से ही दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा। वह पूरे मैच में आत्मविश्वास से भरे नजर आए और बड़े शॉट खेलने से नहीं हिचके।
टी20 वर्ल्ड कप 2024 में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले गुरबाज से टीम को बड़ी उम्मीद थी और उन्होंने अपनी जिम्मेदारी निभाई, लेकिन आखिरी क्षणों में एक शॉट कम पड़ गया और ऐतिहासिक जीत हाथ से निकल गई।
राशिद खान का टॉस और रणनीति
अफगान कप्तान राशिद खान ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी और शुरुआत में उनका फैसला सही साबित हुआ। फजलहक फारूकी ने एडन मार्करम को जल्दी पवेलियन भेज दिया और दक्षिण अफ्रीका दबाव में दिखी।
हालांकि क्विंटन डी कॉक और रयान रिकेलटन ने पारी संभाली और मध्य ओवरों में तेजी से रन बनाए। बाद में राशिद खान ने खुद दो विकेट लेकर मैच में वापसी कराई और मुकाबले को संतुलित बना दिया।
मध्य ओवरों में अफगान वापसी
राशिद की डबल स्ट्राइक के बाद अफगान गेंदबाजों ने अनुशासित गेंदबाजी की और रनगति पर अंकुश लगाया। 18वें ओवर तक दक्षिण अफ्रीका 159 रन पर 5 विकेट गंवा चुकी थी और बड़ा स्कोर दूर लगता था।
लेकिन अंत में यानसन और डेविड मिलर की तेज बल्लेबाजी ने टीम को 187 तक पहुंचा दिया, जिससे मुकाबला बराबरी पर आ गया।
अफगानिस्तान की तेज शुरुआत, फिर झटके
लक्ष्य का पीछा करते हुए अफगानिस्तान ने 4 ओवर में 50 रन बनाकर शानदार शुरुआत की। गुरबाज और इब्राहिम जादरान ने आक्रामक बल्लेबाजी से मैच का रुख अपने पक्ष में कर लिया।
लेकिन लुंगी एनगिडी ने एक ही ओवर में दो विकेट लेकर मैच को फिर से दक्षिण अफ्रीका की ओर मोड़ दिया। इसके बावजूद गुरबाज टिके रहे और टीम को अंत तक मुकाबले में बनाए रखा।
आखिरी ओवर और सुपर ओवर का नाटक
19वें ओवर के बाद समीकरण बेहद रोमांचक हो गया। कगिसो रबाडा ने आखिरी ओवर में विकेट भी लिया, लेकिन ओवरस्टेप और वाइड गेंदों ने अफगानिस्तान को मौका दे दिया और मैच सुपर ओवर में पहुंच गया।
दो सुपर ओवर तक चले इस मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका ने संयम दिखाया और केशव महाराज की सधी गेंदबाजी ने आखिरकार जीत पक्की कर दी।
अफगानिस्तान पर टूर्नामेंट से बाहर होने का खतरा
यह हार अफगानिस्तान के लिए भारी साबित हो सकती है क्योंकि सुपर 8 की रेस में अब उनका रास्ता मुश्किल हो गया है। पहले भी 2024 में दक्षिण अफ्रीका ने उन्हें सेमीफाइनल में बाहर किया था और इस बार भी वह ऐतिहासिक जीत से चूक गए।
विश्लेषण: दिल टूटा, लेकिन हौसला बढ़ा
अफगानिस्तान ने दिखा दिया कि वह अब किसी भी बड़ी टीम को चुनौती दे सकता है और बड़े मंच पर दबाव झेल सकता है। गुरबाज, राशिद और फारूकी का प्रदर्शन भविष्य के लिए उम्मीद जगाता है।
दूसरी ओर दक्षिण अफ्रीका ने साबित किया कि दबाव में संयम रखना ही बड़ी टीम की पहचान है और इसी वजह से उन्होंने एक और रोमांचक मुकाबले में जीत दर्ज की।
मुख्य बातें (Key Points)
- 187-187 के बाद मैच दो सुपर ओवर तक गया।
- ट्रिस्टन स्टब्स के छक्के से दक्षिण अफ्रीका को मिली नई जिंदगी।
- रहमानुल्लाह गुरबाज की 84 रन की पारी बेकार गई।
- अफगानिस्तान की सुपर 8 में पहुंचने की राह कठिन हुई।








