Russian Oil : आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भारत द्वारा बाहरी दबाव के चलते रूसी तेल आयात में कटौती करने के बढ़ते वैश्विक दावों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्थिति साफ करने की मांग की है। मंगलवार को अरविंद केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री के लगातार चुप्पी साधने से आत्मविश्वास से भरे संप्रभु राष्ट्र के रूप में भारत की छवि को धूमिल कर रही है।
यूरोपीय नेताओं की सार्वजनिक टिप्पणियों और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा टैरिफ (शुल्क) की धमकियों को भारत के ऊर्जा विकल्पों से जोड़ने के बार-बार किए गए दावों का हवाला देते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि भारत के नीतिगत बदलावों को मिल रही विदेशी स्वीकृति ने देश की रणनीतिक स्वायत्तता को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अंतरराष्ट्रीय दबाव में राष्ट्रीय हितों के साथ समझौता किया जा रहा है। सरकार इस पर स्पष्ट स्पष्टीकरण देने से क्यों बच रही है?
गुरुवार को एक्स पर पोस्ट कर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या भारत ने बाहरी दबाव के चलते तेल आयात के अपने फैसलों में बदलाव किया है। डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत और हमारे प्रधानमंत्री के बारे में बेहद अपमानजनक टिप्पणियां की हैं। प्रधानमंत्री जी, आपको क्या रोक रहा है? यह चुप्पी गंभीर सवाल खड़े करती है। भारत एक मजबूत और संप्रभु राष्ट्र है। हमारी विदेश नीति में आत्मविश्वास और स्वाभिमान झलकना चाहिए।
भारत की रणनीतिक स्वायत्तता सवालों के घेरे में, विदेशी स्वीकृति अब सार्वजनिक
अब वैश्विक स्तर पर खुले तौर पर यह स्वीकार किया जा रहा है कि भारत ने बाहरी दबाव के कारण रूसी तेल के आयात में कटौती की है, इस तथ्य को यूरोपीय नेताओं ने सार्वजनिक रूप से रेखांकित किया है। 7 जनवरी, 2026 को पेरिस में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ खड़े होकर पोलैंड के विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की ने कहा कि वे इस बात से “संतुष्ट” हैं कि भारत ने रूसी तेल की खरीद कम कर दी है। उन्होंने इस कदम को रूस के युद्ध प्रयासों को कमजोर करने से जोड़ा। हालांकि यूरोपीय राजधानियों ने इस बदलाव का स्वागत किया है, लेकिन इससे देश में चिंता की स्थिति पैदा हो गई है, जहां सरकार की चुप्पी अमेरिका द्वारा भारत के फैसलों को प्रभावित करने के लिए टैरिफ की धमकियों का उपयोग करने के बार-बार किए जा रहे दावों के बिल्कुल विपरीत है। कई लोगों के लिए, यह सार्वजनिक विदेशी समर्थन इस धारणा को पुख्ता करता है कि भारत की ऊर्जा नीति एक संप्रभु राष्ट्र से अपेक्षित आत्मविश्वास और स्वायत्त निर्णय लेने की प्रक्रिया के बजाय दबाव से तय हो रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से दावा किया है कि भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद से जुड़े अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनसे “ज्यादा खुश नहीं” हैं। उन्होंने उन बैठकों का जिक्र भी किया जहां उनके अनुसार रक्षा खरीद की समयसीमा पर हस्तक्षेप की मांग करते समय पीएम मोदी ने उन्हें “सर” कहकर संबोधित किया और बार-बार चेतावनी दी है कि यदि भारत ने रूसी तेल आयात पर अंकुश नहीं लगाया तो उसे और भी अधिक टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने व्यापारिक दंड को स्पष्ट रूप से भारत के ऊर्जा फैसलों से जोड़ा है और प्रधानमंत्री को इस दबाव के केंद्र में ला खड़ा किया है।








