Russia-Ukraine conflict:इंफोसिस की रूसी क्लाइंट्स के साथ कारोबार करने की कोई योजना नहीं: CEO सलिल पारेख

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहें संघर्ष के बीच देश की दिग्गज आईटी कंपनी ने 13 अप्रैल को स्पष्ट किया है कि उसकी रशियन क्लाइंट के साथ कारोबार करने की कोई योजना नहीं है। उनका यह बयान उस समय आया है जब इंग्लैंड के वित्त मंत्री ऋषि सुनक की पत्नी अक्षता मुर्थी की इंफोसिस में हिस्सेदारी ब्रिटिश पार्लियामेंट के जांच के दायरे में आ गई है।

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक रूस में कारोबार करने वाली कंपनी ने अब अपने मास्को सेंटर को बंद कर दिया है। यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद अमेरिका और यूरोप के देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगा दिए हैं जिसके चलते इंफोसिस को भी रूस में अपना कारोबार बंद करना पड़ा है।

बतातें चलें कि अक्षता मुर्थी इंफोसिस के संस्थापक एन नारायण मूर्ति की बेटी है। अक्षता मुर्थी के पास इंफोसिस की 0.93 फीसदी हिस्सेदारी है। ब्रिटिश वित्त मंत्री ऋषि सुनक, अक्षता मुर्थी के पति हैं। उनकी पत्नी के इंफोसिस से संबंधों के चलते ब्रिटिश राजनीति में इस समय भूचाल आया हुआ है।

13 अप्रैल को इंफोसिस के वित्त वर्ष 2022 के नतीजों के ऐलान के बाद मीडिया बात करते हुए इंफोसिस के सीईओ सलिल पारेख ने कहा कि हम वर्तमान में रशियन क्लाइंट्स के साथ कोई भी कारोबार नहीं कर रहे हैं और आगे भी हमारी उनके साथ कारोबार करने की कोई योजना नहीं है।

वर्तमान स्थिति को देखते हुए कंपनी ने रूस स्थित अपने सेंटरों पर काम करने वाले कर्मचारियों और यहां होने वाले काम को रूस के बाहर स्थित सेटरों पर भेजने के प्रक्रिया शुरु कर दी है। रुस में कंपनी के कर्मचारियों की संख्या 100 से कम है।

कंपनी में अक्षता मुर्थी की शेयर होल्डिंग से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए सलिल पारेख ने कहा कि वह किसी इंडिविजुअल शेयर होल्डर से जुड़े मामले पर टिप्पणी नहीं कर सकते।

रूस-यूक्रेन संघर्ष

आईटी सेक्टर के जानकारों का कहना है कि रूस-यूक्रेन के संघर्ष के चलते आईटी कंपनियां पूर्वी यूरोप में अपने इन्वेस्टमेंट पर विराम लगा सकती हैं और नियर टर्म में अपना ज्यादा से ज्यादा काम भारत से करने पर फोकस कर सकती हैं। पूर्वी यूरोप में बढ़ते तनाव की वजह से शॉर्ट टर्म में आईटी कंपनियों के बिजनेस डिलीवरी पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है जिससे आईटी कंपनियों के प्राइसिंग पावर और नई डील में गिरावट देखने को मिल सकती है।

अमेरिका के बाद यूरोप और इंग्लैंड आईटी सर्विस कंपनियों के लिए सबसे बड़े बाजार है। कंपनी को यह कदम उस समय उठाना पड़ा है जब आईटी सेक्टर एक बड़े बूम के दौर से गूजर रहा है।

बता दें कि इंफोसिस ने कल ही अपने तिमाही नतीजे जारी किए हैं। जिसके मुताबिक इस अवधि में कंपनी का मुनाफा इसी साल के तीसरे तिमाही के 5,809 करोड़ रुपये से घटकर 5,686 करोड़ रुपये पर आ गया हैं। प्रतिशत में देखें तो चौथी तिमाही में सालाना आधार पर कंपनी के मुनाफे में 12 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है जबकि तिमाही आधार पर मुनाफा 2 फीसदी घटा है।

इसी अवधि में कंपनी की आय तीसरी तिमाही के 31,867 करोड़ रुपये से बढ़कर 32,276 करोड़ रुपये पर पहुंच गई है। इसी तरह कंपनी की आय सालाना आधार पर 23 फीसदी बढ़ी है। जबकि तिमाही आधार पर इसमें सिर्फ 1 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है।

चौथी तिमाही में कंपनी की डॉलर आय तीसरी तिमाही के 425 करोड़ डॉलर से बढ़कर 428 करोड़ डॉलर पर आ गई है। चौथी तिमाही में कंपनी की Constant Currency रेवेन्यू ग्रोथ 1.2 फीसदी पर रही है जबकि CNBC-TV18 के पोल में इसके 3.2 फीसदी पर रहने का अनुमान किया गया था।

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