Rupee vs Dollar पर एक बड़ा सियासी हमला सामने आया है। गुरदासपुर से सांसद और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने शनिवार 28 मार्च 2026 को चंडीगढ़ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जबरदस्त निशाना साधते हुए कहा कि अमेरिका-ईरान तनाव के बीच डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है और रुपया कमजोर, जो केंद्र की आर्थिक नीतियों की विफलता का सबूत है। रंधावा ने चुभने वाला तंज कसते हुए कहा कि रुपए की गिरती कीमतों पर सीएम मोदी को तो कई बार सुना है, लेकिन अब पीएम मोदी को सुनने का इंतजार है।
‘डॉलर 94 पार, 100 छू सकता है: मोदी का 40 रुपए वाला वादा कहां गया?’
Rupee vs Dollar पर रंधावा ने बेहद तीखे तेवर अपनाते हुए पीएम मोदी के उस पुराने दावे की याद दिलाई जिसमें उन्होंने कहा था कि रुपए को इतना मजबूत किया जाएगा कि डॉलर की कीमत घटकर 40 रुपए रह जाएगी। लेकिन आज हकीकत यह है कि डॉलर 94 रुपए पार कर चुका है और अनुमानों के मुताबिक यह 100 का आंकड़ा भी छू सकता है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रंधावा ने सवाल उठाया कि अगर अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत है, जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार लगातार दावा करती रही है, तो फिर डॉलर के मुकाबले रुपया बार-बार क्यों गिर रहा है। उन्होंने कहा कि यह सवाल सीधे तौर पर केंद्र की आर्थिक नीतियों पर उंगली उठाता है और सरकार को इसका जवाब देना होगा।
‘गिरते रुपए का सीधा असर: महंगाई तोड़ेगी आम जनता की कमर’
सुखजिंदर सिंह रंधावा ने Rupee vs Dollar की गिरती स्थिति का सीधा असर आम जनता पर समझाते हुए कहा कि रुपए की कमजोरी का सबसे पहला और सबसे बड़ा असर पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और आयातित वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है। जब रुपया गिरता है तो भारत को कच्चा तेल और दूसरे आयातित सामान खरीदने के लिए ज्यादा रुपए खर्च करने पड़ते हैं, जिससे महंगाई बढ़ती है।
उन्होंने कहा कि इस बढ़ती महंगाई का बोझ सबसे ज्यादा आम आदमी पर पड़ता है, जिसकी कमर पहले से टूटी हुई है। रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर खाने-पीने तक हर चीज महंगी हो रही है और सरकार सिर्फ वैश्विक हालात का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट रही है।
‘अमेरिका-ईरान तनाव बहाना, असली वजह कमजोर आर्थिक नीतियां’
रंधावा ने अमेरिका–ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव का जिक्र करते हुए कहा कि बेशक इस युद्ध जैसी स्थिति का असर वैश्विक बाजारों पर पड़ रहा है, लेकिन भारत में इसका प्रभाव कहीं ज्यादा इसलिए दिख रहा है क्योंकि भाजपा सरकार ने अर्थव्यवस्था को वाकई मजबूत करने के बजाय केवल प्रचार और दावों पर ध्यान दिया।
उन्होंने एक अहम बात कही कि जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ता है, उस समय मजबूत अर्थव्यवस्था वाले देश अपनी मुद्रा को संभालने में कामयाब रहते हैं। लेकिन भारत में हर बार जब कोई वैश्विक संकट आता है तो रुपया तेजी से लुढ़कने लगता है। रंधावा के मुताबिक यह इस बात का सबूत है कि देश की आर्थिक नीतियां कमजोर हो चुकी हैं और सरकार के पास कोई ठोस रणनीति ही नहीं है।
‘सीएम मोदी को सुना, अब PM मोदी चुप क्यों हैं?’
Rupee vs Dollar पर रंधावा का सबसे तीखा और चर्चा में आने वाला तंज यह रहा कि जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब वह रुपए की गिरती कीमतों पर तत्कालीन केंद्र सरकार को जमकर घेरते थे। उस दौर में सीएम मोदी को कई बार सुना, लेकिन अब जब वह खुद प्रधानमंत्री हैं तो उनके मुंह से इस मुद्दे पर एक शब्द भी नहीं निकल रहा।
रंधावा ने सवाल उठाया कि पता नहीं पीएम मोदी कब अपना मौन तोड़ेंगे और कमजोर होते रुपए के बारे में देश से खुलकर बात करेंगे। यह तंज सीधे तौर पर मोदी के दोहरे रवैये पर सवाल उठाता है कि विपक्ष में रहकर जो मुद्दे उठाए, सत्ता में आने के बाद वही मुद्दे क्यों नजरअंदाज किए जा रहे हैं।
‘केंद्र पर गंभीर आरोप: गलत नीतियां, बढ़ता कर्ज और कमजोर प्रबंधन’
सुखजिंदर सिंह रंधावा ने केंद्र सरकार पर सीधे आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है। लेकिन सच्चाई यह है कि गलत आर्थिक नीतियों, लगातार बढ़ते कर्ज और कमजोर वित्तीय प्रबंधन के कारण भारतीय मुद्रा पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि रुपए की गिरावट केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की आर्थिक साख कमजोर होने का साफ संकेत है। जब वैश्विक निवेशकों और बाजारों का भारतीय अर्थव्यवस्था पर भरोसा कमजोर होता है तो रुपया गिरता है और यही आज हो रहा है।
‘ठोस कदम नहीं उठाए तो महंगाई और बेरोजगारी होगी विस्फोटक’
रंधावा ने केंद्र सरकार को आगाह करते हुए कहा कि अगर समय रहते ठोस आर्थिक कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में महंगाई और बेरोजगारी की समस्या और गंभीर हो सकती है। Rupee vs Dollar का यह संकट सिर्फ बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हर घर की रसोई और हर नौजवान की नौकरी को सीधे प्रभावित करेगा।
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रभावी और पारदर्शी नीतियां तुरंत लागू की जाएं ताकि रुपए की गिरावट को रोका जा सके और आम जनता को राहत मिल सके। रंधावा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से देश की आर्थिक स्थिरता और आम जनता के हितों के लिए आवाज उठाती रही है और आगे भी उठाती रहेगी।
‘जानें पूरा मामला’
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने पूरी दुनिया के बाजारों में उथल-पुथल मचा दी है। इस तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और वैश्विक व्यापार मार्गों में बाधा आ रही है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है और डॉलर की मजबूती से यह आयात और महंगा हो जाता है। इसी बीच डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर हो रहा है और 94 का आंकड़ा पार कर चुका है। इसी स्थिति को लेकर कांग्रेस नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं और पीएम मोदी के पुराने दावों की याद दिलाते हुए जवाब मांगा है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि डॉलर 94 पार है और 100 छू सकता है, जबकि मोदी ने 40 रुपए तक लाने का वादा किया था।
- रंधावा ने तंज कसा कि सीएम मोदी को रुपए की गिरावट पर कई बार सुना, लेकिन PM मोदी चुप हैं।
- गिरते रुपए का सीधा असर पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और आयातित वस्तुओं पर पड़ेगा, जिससे आम जनता की कमर टूटेगी।
- रंधावा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार गलत आर्थिक नीतियों, बढ़ते कर्ज और कमजोर वित्तीय प्रबंधन की वजह से रुपए को संभालने में नाकाम है।








