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दिल्ली में सांसों का आपातकाल, Delhi High Court Air Purifier GST Hearing में बड़ा आदेश

वायु प्रदूषण पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, कहा- 'आपातकालीन' स्थिति में नागरिकों को राहत दे सरकार, प्यूरीफायर पर 18% की जगह 5% टैक्स पर हो विचार।

The News Air Team by The News Air Team
बुधवार, 24 दिसम्बर 2025
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Air Purifier
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Delhi High Court Air Purifier GST Hearing : दिल्ली की जहरीली हवा में सांस लेना अब दूभर हो गया है। इसी ‘आपातकालीन स्थिति’ को देखते हुए Delhi High Court ने आज एक बड़ा और मानवीय कदम उठाया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया है कि एयर प्यूरीफायर (Air Purifier) पर लगने वाले GST को 18% से घटाकर 5% करने पर तुरंत विचार किया जाए। कोर्ट ने साफ कहा कि जब अधिकारी नागरिकों को शुद्ध हवा नहीं दे पा रहे हैं, तो कम से कम हवा साफ करने वाली मशीन तो सस्ती कर दें।

‘21,000 बार जहर ले रहे हैं हम’

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बेहद तल्ख टिप्पणी की, जो हर दिल्लीवासी का दर्द है। बेंच ने कहा, “हम एक दिन में कम से कम 21,000 बार सांस लेते हैं। जरा सोचिए, आप दिन में 21 हजार बार सांस लेकर अपने फेफड़ों को कितना नुकसान पहुंचा रहे हैं।”

कोर्ट ने प्रदूषण के मौजूदा स्तर को ‘इमरजेंसी’ करार दिया। जजों ने कहा कि नागरिक शुद्ध हवा के हकदार हैं, लेकिन जब सिस्टम इसमें फेल हो रहा है, तो एयर प्यूरीफायर अब लक्जरी नहीं, बल्कि जरूरत बन गया है।

वकील की दलील: प्यूरीफायर ‘मेडिकल डिवाइस’ बने

यह मामला अधिवक्ता Kapil Madan द्वारा दायर एक याचिका पर सुना जा रहा था। उनकी मांग है कि:

  1. एयर प्यूरीफायर को ‘मेडिकल डिवाइस’ (चिकित्सा उपकरण) माना जाए।

  2. चिकित्सा उपकरण नियम 2017 के तहत इसे लाकर GST की दर 18% से घटाकर 5% की जाए।

  3. केंद्र सरकार की 2020 की अधिसूचना भी यह मानती है कि हवा साफ करने वाले यंत्र मेडिकल मानकों को पूरा करते हैं।

‘जीएसटी काउंसिल कब बैठेगी?’

कोर्ट ने अधिकारियों की सुस्ती पर नाराजगी जताई। जब सरकार की तरफ से कहा गया कि यह फैसला जीएसटी काउंसिल का है, तो कोर्ट ने पूछा, “जीएसटी काउंसिल आखिर कब बैठेगी? सरकार निर्देश लेकर कब वापस आएगी?”

कोर्ट ने सुझाव दिया कि भले ही यह राहत अस्थाई हो—अगले एक हफ्ते या एक महीने के लिए—लेकिन इस आपातकालीन स्थिति में जनता को छूट मिलनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि एयर प्यूरीफायर उपलब्ध कराना वह ‘न्यूनतम उपाय’ (Minimum measure) है जो सरकार इस वक्त कर सकती है।

आम आदमी पर असर (Human Impact)

अगर कोर्ट का यह सुझाव मान लिया जाता है, तो एयर प्यूरीफायर की कीमतों में भारी कमी आएगी। अभी एक मध्यम वर्गीय परिवार के लिए 10-15 हजार का प्यूरीफायर खरीदना और उस पर 18% टैक्स देना मुश्किल है। टैक्स 5% होने से यह मशीन सस्ती होगी और उन बच्चों व बुजुर्गों को राहत मिलेगी जो अस्थमा या सांस की बीमारियों से जूझ रहे हैं। यह फैसला सीधे तौर पर आपकी और हमारी जेब के साथ-साथ सेहत पर असर डालेगा।

जानें पूरा मामला

दिल्ली में प्रदूषण का स्तर (AQI) लगातार खतरनाक बना हुआ है। लोग घरों के अंदर भी सुरक्षित नहीं हैं। ऐसे में अधिवक्ता कपिल मदान ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि एयर प्यूरीफायर को विलासिता (Luxury) की वस्तु न मानकर इसे स्वास्थ्य रक्षक उपकरण माना जाए। कोर्ट ने भी माना कि मौजूदा हालात सामान्य नहीं हैं और तुरंत कदम उठाने की जरूरत है।

मुख्य बातें (Key Points)
  • Delhi High Court ने एयर प्यूरीफायर पर GST 18% से घटाकर 5% करने पर विचार करने को कहा।

  • कोर्ट ने प्रदूषण को ‘Emergency Situation’ (आपातकालीन स्थिति) बताया।

  • एक इंसान दिन में 21,000 बार सांस लेता है, कोर्ट ने फेफड़ों के नुकसान पर चिंता जताई।

  • याचिकाकर्ता ने एयर प्यूरीफायर को ‘Medical Device’ घोषित करने की मांग की है।

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1: दिल्ली हाई कोर्ट ने एयर प्यूरीफायर पर GST को लेकर क्या निर्देश दिया है?

Ans: दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और जीएसटी काउंसिल को निर्देश दिया है कि दिल्ली में वायु प्रदूषण की ‘आपातकालीन’ स्थिति को देखते हुए एयर प्यूरीफायर पर लगने वाले GST को 18% से घटाकर 5% करने पर जल्द से जल्द विचार किया जाए। कोर्ट ने इसके लिए जीएसटी काउंसिल की तत्काल बैठक बुलाने को कहा है।

Q2: वर्तमान में भारत में एयर प्यूरीफायर पर कितना GST लगता है?

Ans: अभी भारत में एयर प्यूरीफायर को विलासिता (Luxury) की श्रेणी में रखा गया है और इस पर 18% की दर से गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) लगता है। याचिकाकर्ता इसे घटाकर 5% करने की मांग कर रहे हैं।

Q3: क्या एयर प्यूरीफायर को मेडिकल डिवाइस माना जा सकता है?

Ans: याचिकाकर्ता कपिल मदान का तर्क है कि एयर प्यूरीफायर ‘ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट’ और 2020 की एक अधिसूचना के तहत ‘मेडिकल डिवाइस’ के मानदंडों को पूरा करते हैं, क्योंकि ये सांस लेने में मदद करते हैं और फेफड़ों को नुकसान से बचाते हैं। अगर इसे मेडिकल डिवाइस मान लिया जाए, तो टैक्स अपने आप कम हो जाएगा।

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Q4: एयर प्यूरीफायर पर GST कम होने से आम आदमी को क्या फायदा होगा?

Ans: अगर GST 18% से घटकर 5% होता है, तो एयर प्यूरीफायर की कीमतें काफी कम हो जाएंगी। इससे मध्यम और निम्न आय वाले परिवार भी अपने घरों में शुद्ध हवा के लिए ये मशीनें खरीद सकेंगे, जो अभी बहुत महंगी हैं।

Q5: कोर्ट ने सुनवाई के दौरान '21,000 सांसों' का जिक्र क्यों किया?

Ans: कोर्ट ने मामले की गंभीरता समझाने के लिए कहा कि एक इंसान दिन में लगभग 21,000 बार सांस लेता है। दिल्ली की जहरीली हवा में इतनी बार सांस लेने से लोगों के फेफड़ों को जो नुकसान हो रहा है, वह अनैच्छिक (involuntary) है और इसे रोकना सरकार की जिम्मेदारी है।

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