Reservation Verdict : सरकारी नौकरियों में आरक्षण व्यवस्था पर कौन, कब, कहाँ और क्या—इन चारों सवालों का साफ जवाब देते हुए Supreme Court of India ने एक अहम फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि आरक्षित वर्ग का कोई उम्मीदवार सामान्य श्रेणी के कट-ऑफ से अधिक अंक हासिल करता है, तो उसे अनारक्षित (जनरल) सीट पर चयन से नहीं रोका जा सकता। यह फैसला एक भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विवाद में सुनाया गया है, जिसका दूरगामी असर सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में नामांकन पर पड़ेगा।

क्या था विवाद और कैसे पहुंचा मामला सुप्रीम कोर्ट तक
मामला Rajasthan High Court से जुड़ा था, जहां यह दलील दी गई थी कि यदि एससी, एसटी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के उम्मीदवारों को जनरल सीट भी दी गई, तो उन्हें “डबल बेनिफिट” मिलेगा। हाईकोर्ट प्रशासन की याचिका में कहा गया कि इससे आरक्षण का उद्देश्य प्रभावित होगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और मेरिट को प्राथमिक आधार बताया।
सुप्रीम कोर्ट का साफ संदेश: ‘ओपन कैटेगरी’ सबके लिए
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ए.जी. मसीह की पीठ ने कहा कि “ओपन” का अर्थ वास्तव में ओपन है—यह किसी खास जाति या समूह के लिए आरक्षित नहीं। केवल इस आधार पर कि कोई उम्मीदवार आरक्षित श्रेणी से आता है, उसे शुद्ध मेरिट पर अनारक्षित सीट से वंचित नहीं किया जा सकता।
भर्ती प्रक्रिया के लिए तय हुई स्पष्ट गाइडलाइंस
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि लिखित परीक्षा में यदि आरक्षित श्रेणी का उम्मीदवार जनरल कट-ऑफ से ऊपर अंक लाता है, तो इंटरव्यू और आगे की प्रक्रिया में उसे सामान्य श्रेणी का उम्मीदवार माना जाएगा। हालांकि, यदि अंतिम मेरिट सूची में उसके अंक जनरल कट-ऑफ से नीचे रहते हैं, तो वह अपनी आरक्षित श्रेणी के अनुसार लाभ लेने का हकदार होगा।
आम उम्मीदवार पर क्या असर पड़ेगा
इस फैसले से उन लाखों अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी, जो आरक्षित श्रेणी से होने के बावजूद मेरिट पर आगे निकलते हैं। अब शुरुआती चरणों में अनावश्यक रोक-टोक नहीं होगी और योग्य उम्मीदवारों को उनकी मेहनत का पूरा लाभ मिल सकेगा।

विश्लेषण: मेरिट और समान अवसर की नई परिभाषा
यह फैसला आरक्षण बनाम मेरिट की बहस को संतुलित करता दिखता है। अदालत ने साफ किया कि आरक्षण का उद्देश्य अवसर देना है, न कि योग्यता को सीमित करना। इससे भर्ती एजेंसियों को पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाने में मदद मिलेगी और लंबे समय से चले आ रहे भ्रम दूर होंगे।
जानें पूरा मामला
एक भर्ती प्रक्रिया में यह शर्त रखी गई थी कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार, भले ही जनरल कट-ऑफ पार कर लें, अनारक्षित सीट पर नहीं चुने जाएंगे। इसी शर्त को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस शर्त को खारिज करते हुए मेरिट-आधारित चयन का रास्ता साफ किया।
मुख्य बातें (Key Points)
- जनरल कट-ऑफ से अधिक अंक लाने वाले आरक्षित उम्मीदवार अनारक्षित सीट के योग्य
- “ओपन कैटेगरी” किसी एक वर्ग के लिए आरक्षित नहीं
- भर्ती प्रक्रिया में मेरिट को प्राथमिकता
- आरक्षण का लाभ तभी, जब अंतिम मेरिट जनरल कट-ऑफ से नीचे हो








