Iran Protest : ईरान एक बार फिर उबाल पर है। बढ़ती महंगाई, गिरती मुद्रा और रोजमर्रा की जिंदगी में बढ़ती मुश्किलों के खिलाफ जनता का गुस्सा अब खुली बगावत में बदल चुका है। राजधानी Tehran से लेकर मशहद, इस्फ़हान, शिराज और छोटे कस्बों तक लोग सड़कों पर उतर आए हैं। बीते दो हफ्तों में हालात इतने बिगड़ गए कि कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच सीधे टकराव की खबरें सामने आई हैं।

ग्रैंड बाजार से उठी चिंगारी
इस विरोध की शुरुआत अचानक नहीं हुई। पिछले महीने तेहरान के ग्रैंड बाजार में व्यापारियों ने ईरानी मुद्रा रियाल की लगातार गिरती कीमत और बेलगाम महंगाई के खिलाफ आवाज उठाई। यही चिंगारी धीरे-धीरे आम जनता तक पहुंची और देखते ही देखते बेरोजगारी, आवश्यक वस्तुओं की कमी और बढ़ते दामों का गुस्सा सड़कों पर फैल गया।
आर्थिक संकट से राजनीतिक नारे तक
शुरुआत में यह आंदोलन आर्थिक मांगों तक सीमित था, लेकिन हालात बदलते देर नहीं लगी। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों में साफ दिखा कि कई शहरों में लोग खुलेआम सत्ता के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। कुछ जगहों पर ईरान के पूर्व शाह के समर्थन में नारे भी सुनाई दिए, जो कभी बोलना भी जानलेवा माना जाता था।
इंटरनेट बंद, संचार ठप
स्थिति बिगड़ती देख ईरानी सरकार ने सख्त कदम उठाए। कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं और टेलीफोन लाइनों को भी काट दिया गया। इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्थाओं के मुताबिक देश के बड़े हिस्से में कनेक्टिविटी लगभग ठप हो चुकी है। जानकारों का मानना है कि इसका मकसद विरोध प्रदर्शनों की जानकारी बाहरी दुनिया तक पहुंचने से रोकना है।
सरकार के आश्वासन, जनता का अविश्वास
सरकार ने घरेलू आपूर्तिकर्ताओं को चेतावनी दी है कि वे जमाखोरी या मनमानी कीमतें न बढ़ाएं। दावा किया गया है कि हालात पर काबू पाने और जनता को राहत देने की कोशिशें जारी हैं। लेकिन सड़कों पर दिख रहा आक्रोश साफ बताता है कि जनता अब सिर्फ आश्वासनों से संतुष्ट नहीं है।
रेजा पहलवी की अपील से भड़की आग
गुरुवार रात हालात उस वक्त और विस्फोटक हो गए, जब निर्वासित क्राउन प्रिंस Reza Pahlavi ने लोगों से इस्लामिक शासन के खिलाफ सड़कों पर उतरने की अपील की। रात करीब 8 बजे के बाद कई शहरों में प्रदर्शन तेज हो गए और इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ नारे गूंजने लगे।
50 से ज्यादा शहरों में प्रदर्शन
सरकार ने सड़कों को खाली कराने के लिए भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक कम से कम 50 शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन जारी हैं। अमेरिका स्थित Human Rights Activists News Agency का दावा है कि हिंसा में अब तक 39 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 2260 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है। कुछ आंकड़ों में मृतकों की संख्या 45 तक बताई जा रही है, जिनमें नाबालिग भी शामिल हैं।
अंतरराष्ट्रीय दबाव भी बढ़ा
ईरान के हालात पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरानी जनता का समर्थन करते हुए चेतावनी दी कि अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसा हुई या उनकी आवाज दबाने की कोशिश की गई, तो अमेरिका इसे नजरअंदाज नहीं करेगा।
आम लोगों पर असर
इंटरनेट बंद, हिंसा और अस्थिरता का सबसे बड़ा असर आम नागरिकों की जिंदगी पर पड़ रहा है। रोजगार, आपूर्ति और सुरक्षा—तीनों मोर्चों पर अनिश्चितता बढ़ गई है। हालात किस दिशा में जाएंगे, इस पर ईरान ही नहीं, पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।
जानें पूरा मामला
ईरान में गहराते आर्थिक संकट ने जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया है। महंगाई, बेरोजगारी और प्रतिबंधों से जूझती अर्थव्यवस्था ने देश को एक बार फिर टकराव और अनिश्चितता की ओर धकेल दिया है, जहां हर अगला कदम हालात को और गंभीर बना सकता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- महंगाई और गिरती मुद्रा के खिलाफ ईरान में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन।
- तेहरान समेत 50 से ज्यादा शहरों में हालात तनावपूर्ण।
- इंटरनेट और संचार सेवाएं बड़े हिस्से में बंद।
- हिंसा में दर्जनों मौतें और हजारों हिरासत में।








