Chandigarh Mayor Election : चंडीगढ़ नगर निगम में मेयर चुनाव को लेकर आज बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है। आम आदमी पार्टी ने अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान तो किया लेकिन पार्टी के ही एक पार्षद ने बगावत कर दी है। पार्षद रामचंद्र यादव ने पार्टी की लाइन से हटकर आजाद उम्मीदवार के तौर पर डिप्टी मेयर पद के लिए नामांकन दाखिल करने का फैसला किया है। इस घटनाक्रम के बाद अब भारतीय जनता पार्टी की जीत लगभग तय मानी जा रही है।
दरअसल AAP और कांग्रेस दोनों ने अलग-अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया है। AAP के पंजाब प्रभारी जरनैल सिंह ने साफ कर दिया कि पार्टी कांग्रेस से कोई गठबंधन नहीं करेगी। वहीं कांग्रेस ने भी अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। इस तरह विपक्ष के बंटने से भाजपा का रास्ता आसान हो गया है।
AAP पार्षद की बगावत ने बिगाड़ा खेल
पार्षद रामचंद्र यादव ने पार्टी के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। वह डिप्टी मेयर पद के लिए आजाद उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल करने पहुंचे हैं। उनका गुस्सा पार्टी के रवैये पर है।
यादव ने कहा कि पिछली बार तीन पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग की थी। पार्टी को उनके खिलाफ भी कार्रवाई करनी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब स्थिति यह है कि हर पार्षद को पार्टी के भीतर शक की नजर से देखा जा रहा है।
बताया जा रहा है कि रामचंद्र यादव और एक महिला पार्षद आम आदमी पार्टी के अन्य पार्षदों के साथ रोपड़ नहीं गए थे। यह साफ संकेत था कि पार्टी में सब ठीक नहीं चल रहा।
पार्षदों को रोपड़ के होटल में रखा गया
AAP को इस चुनाव में अपने ही पार्षदों की दलबदली का डर सता रहा है। इसी वजह से पार्टी ने अपने पार्षदों को रोपड़ के एक होटल में ले जाकर रखा है। उनके मोबाइल फोन भी बंद करा दिए गए हैं।
पार्टी की योजना है कि आज दोपहर सिर्फ उन्हीं पार्षदों को लाया जाएगा जिन्हें नामांकन दाखिल करना है या जो प्रस्तावक हैं। बाकी पार्षदों को चुनाव खत्म होने तक शहर से बाहर ही रखा जाएगा।
पहली बार हाथ खड़े करके होगी वोटिंग
इस बार मेयर चुनाव में एक बड़ा बदलाव हुआ है। पहली बार वोटिंग हाथ खड़े करके होगी। अब तक सीक्रेट बैलेट से वोटिंग होती थी जिसमें अक्सर क्रॉस वोटिंग और विवाद होते थे।
हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि हाथ खड़े करवाना हाउस में होगा या बंद कमरे में। नामांकन के लिए आज सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक का समय तय किया गया है।
AAP और कांग्रेस के उम्मीदवार
आम आदमी पार्टी ने अपने तीनों पदों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। मेयर पद के लिए योगेश ढींगरा को मैदान में उतारा गया है। सीनियर डिप्टी मेयर पद के लिए मुन्नवर खान और डिप्टी मेयर पद के लिए जसविंदर कौर को टिकट दिया गया है।
वहीं कांग्रेस ने भी अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। मेयर पद के लिए गुरप्रीत गाबी नामांकन दाखिल करेंगे। सीनियर डिप्टी मेयर के लिए सचिन गालिब और डिप्टी मेयर के लिए निर्मला देवी को उम्मीदवार बनाया गया है।
कांग्रेस बोली- हम भी गठजोड़ नहीं चाहते
चंडीगढ़ कांग्रेस प्रधान एचएस लक्की ने साफ किया कि उन्होंने सबसे पहले उम्मीदवारों की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस गठजोड़ नहीं करेगी क्योंकि आम आदमी पार्टी के पास नंबर पूरे नहीं हो रहे थे।
लक्की ने बताया कि पहले AAP के दो पार्षद पार्टी छोड़कर चले गए थे। अब भी 11 में से सिर्फ 9 पार्षद ही किसी रिजॉर्ट में गए हैं जबकि 2 पार्षद उनके साथ नहीं हैं। ऐसे में साफ है कि विपक्ष मिलकर भी भाजपा को नहीं रोक पाएगा।
उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस की सारी वोट साथ हैं और पार्टी पूरी तरह एकजुट है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में और लोग उनके साथ जुड़ेंगे।
गठबंधन की कोशिश हुई थी
लक्की ने माना कि भाजपा को रोकने के लिए दोनों पार्टियों के नेताओं ने प्रयास किया था। गठबंधन की बातचीत भी हुई थी। हालांकि पंजाब कांग्रेस के नेता इसके पक्ष में नहीं थे।
इसके अलावा उन्हें यह भी पता चला कि AAP पार्षद रामचंद्र अलग से नामांकन करने जा रहे हैं। यह खबर आते ही गठबंधन की सारी संभावनाएं खत्म हो गईं।
भाजपा ने पहले ही उठाए थे सवाल
इससे पहले AAP और कांग्रेस के संभावित गठबंधन पर पंजाब भाजपा ने तीखे सवाल उठाए थे। भाजपा के पंजाब के वर्किंग प्रधान अश्वनी शर्मा ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि यह कांग्रेस के भ्रष्टाचार को AAP का समर्थन है।
उन्होंने पूछा था कि क्या पंजाब कांग्रेस के नेताओं को जल्दबाजी में दिल्ली बुलाया गया ताकि उन्हें AAP से गठजोड़ की जरूरत समझाई जा सके। भाजपा का कहना था कि चंडीगढ़ मेयर चुनाव में दोनों पार्टियों का खुला गठबंधन साबित करेगा कि ये दल सिर्फ दिखावे के लिए एक-दूसरे के विरोधी हैं जबकि पर्दे के पीछे पूरी तरह मिले हुए हैं।
मेयर चुनाव का गणित समझिए
चंडीगढ़ नगर निगम में मेयर चुनाव के लिए कुल 35 पार्षदों और 1 सांसद की वोट मान्य होती है। इस तरह कुल 36 वोट हैं। मेयर बनने के लिए 19 वोटों का समर्थन जरूरी है।
मौजूदा समय में भाजपा के पास 18 पार्षद हैं। AAP के पास 11 पार्षद हैं। कांग्रेस के पास 6 पार्षद हैं और चंडीगढ़ के सांसद भी कांग्रेस के हैं।
अगर AAP और कांग्रेस साथ आते तो दोनों तरफ 18-18 वोट हो जाते यानी बराबरी हो जाती। लेकिन अब जबकि दोनों अलग-अलग लड़ रहे हैं और AAP में भी बगावत हो गई है तो भाजपा का पलड़ा भारी हो गया है।
भाजपा कैसे बना सकती है मेयर – तीन परिदृश्य
पहला परिदृश्य यह है कि भाजपा के पास पहले से 18 पार्षद हैं। अगर विपक्ष का कोई एक भी पार्षद उनके साथ आ जाता है तो भाजपा के वोट 19 हो जाएंगे और विपक्ष के 17 रह जाएंगे। ऐसे में भाजपा आसानी से मेयर बना सकती है।
दूसरा परिदृश्य यह है कि अगर विपक्ष का कोई पार्षद वोटिंग के समय गैरहाजिर रहता है और भाजपा के सभी पार्षद वोटिंग करते हैं तो भी भाजपा जीत सकती है। इससे मेयर के साथ-साथ सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद भी भाजपा के खाते में आ सकता है।
तीसरा परिदृश्य कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान से जुड़ा है। कांग्रेस के 6 पार्षदों में सभी सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद पर दावेदारी ठोक रहे हैं। अगर किसी को उम्मीदवार नहीं बनाया जाता तो वह बगावत कर सकता है। ऐसे पार्षद या तो भाजपा के पक्ष में वोटिंग कर सकते हैं या फिर वोटिंग से गैरहाजिर रह सकते हैं।
चंडीगढ़ में अब तक कैसे बने मेयर
चंडीगढ़ नगर निगम में पार्षद चुनाव की टर्म 5 साल की होती है लेकिन मेयर का चुनाव हर साल होता है। इस हिसाब से 5 साल में 5 अलग-अलग मेयर बनते हैं जबकि पार्षद वही रहते हैं। चंडीगढ़ के सांसद को एक्स ऑफिशियो मेंबर माना जाता है और उन्हें मेयर चुनाव में वोटिंग का अधिकार होता है।
2022 में 8 जनवरी को चुनाव हुआ था। भाजपा की सरबजीत कौर ने AAP की अंजू कत्याल को सिर्फ 1 वोट से हराया था। भाजपा को 14 वोट मिले थे जबकि AAP को 13 वोट। हालांकि AAP सबसे बड़ी पार्टी थी जिसके पास 14 सीटें थीं। लेकिन भाजपा ने क्रॉस वोटिंग और दलबदल के जरिए जीत हासिल की।
2023 में भी भाजपा ने चुनाव जीता। वोट का अंतर 1 ही था। विपक्ष के पास संख्या बल होने के बावजूद क्रॉस वोटिंग से भाजपा जीत गई।
2024 का विवादित चुनाव
2024 में दो बार मेयर बदले। पहले 30 जनवरी 2024 को चुनाव हुआ। शुरू में भाजपा के मनोज सोनकर की जीत घोषित की गई थी। इस दौरान 8 वोट इनवैलिड की गई थीं।
प्रिजाइडिंग ऑफिसर अनिल मसीह पर बैलेट पेपर से छेड़छाड़ के गंभीर आरोप लगे। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। 20 फरवरी 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने रिजल्ट पलट दिया और AAP-कांग्रेस गठबंधन के कुलदीप कुमार को मेयर घोषित किया। यह चंडीगढ़ के इतिहास में पहली बार था जब कोर्ट ने मेयर चुनाव का रिजल्ट बदला।
2025 में फिर भाजपा की जीत
30 जनवरी 2025 को हुए चुनाव में महिला आरक्षित सीट थी। भाजपा की हरप्रीत कौर बबला ने AAP-कांग्रेस गठबंधन की प्रेम लता को 2 वोट से हराया। भाजपा को 19 वोट मिले जबकि गठबंधन को 17 वोट।
हैरानी की बात यह थी कि गठबंधन के पास बहुमत था। AAP के 13, कांग्रेस के 6 और सांसद का वोट मिलाकर कुल 20 वोट थे। भाजपा के पास तो सिर्फ 16 वोट ही थे। लेकिन चुनाव में 3 पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग की। यह चुनाव सुप्रीम कोर्ट के ऑब्जर्वर की निगरानी में हुआ था और सभी वोट वैलिड रहे।
विश्लेषण: विपक्ष की फूट भाजपा के लिए वरदान
चंडीगढ़ मेयर चुनाव में इस बार का घटनाक्रम साफ संकेत दे रहा है कि भाजपा की जीत लगभग तय है। AAP और कांग्रेस के बीच गठबंधन न होना और AAP में बगावत ने विपक्ष की कमर तोड़ दी है।
अगर AAP और कांग्रेस साथ होते तो भी मुकाबला सिर्फ बराबरी का होता। लेकिन अब जबकि दोनों अलग-अलग लड़ रहे हैं और AAP के पार्षद भी बागी हो रहे हैं तो भाजपा के लिए रास्ता साफ है।
पिछले चार साल के इतिहास पर नजर डालें तो भाजपा ने हर बार क्रॉस वोटिंग का फायदा उठाया है। सिर्फ 2024 में जब सुप्रीम कोर्ट ने दखल दिया तभी विपक्ष को मेयर की कुर्सी मिली। इस बार हाथ खड़े करके वोटिंग होने से क्रॉस वोटिंग मुश्किल होगी लेकिन अगर कोई पार्षद गैरहाजिर रहा तो भाजपा का फायदा होगा।
मुख्य बातें (Key Points)
• AAP ने अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया, कांग्रेस से कोई गठबंधन नहीं होगा।
• AAP पार्षद रामचंद्र यादव ने बगावत कर डिप्टी मेयर पद के लिए आजाद उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया।
• पार्टी ने दलबदली के डर से पार्षदों को रोपड़ के होटल में रखा है और उनके मोबाइल बंद करा दिए गए हैं।
• पहली बार मेयर चुनाव हाथ खड़े करके होगा, सीक्रेट बैलेट खत्म।
• भाजपा के पास 18 पार्षद हैं और विपक्ष की फूट से उनकी जीत तय मानी जा रही है।








