RBI Monetary Policy February 2026 : 6 फरवरी 2026 को Reserve Bank of India की Monetary Policy Committee की बैठक के बाद एक बड़ा ऐलान हुआ है। रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखने के अलावा, आरबीआई ने आम आदमी की जिंदगी को सीधे प्रभावित करने वाले कई अहम फैसले लिए हैं। लोन रिकवरी एजेंट्स की मनमानी पर लगाम लगाने से लेकर डिजिटल पेमेंट फ्रॉड के शिकार लोगों को मुआवजा देने तक, ये बदलाव बैंकिंग सिस्टम में एक नई दिशा तय करने वाले हैं।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ किया कि अब बैंक और एनबीएफसी अपने रिकवरी एजेंट्स के व्यवहार के लिए सीधे जवाबदेह होंगे। साथ ही, डिजिटल फ्रॉड के मामलों में पीड़ितों को ₹25,000 तक या फ्रॉड अमाउंट का 80% (जो भी कम हो) मुआवजा मिल सकेगा। यह कदम उन करोड़ों भारतीयों के लिए राहत की खबर है जो डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल करते हैं और लोन की ईएमआई भरते हैं।
रेपो रेट 5.25% पर स्थिर, ईएमआई में फिलहाल कोई बदलाव नहीं
आरबीआई ने इस बार रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा है। रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर आरबीआई बैंकों को पैसा देता है। इसी के आधार पर बैंक तय करते हैं कि होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन किस ब्याज दर पर मिलेंगे। पिछले साल फरवरी 2025 से दिसंबर 2025 के बीच आरबीआई ने लगातार ब्याज दरों में कटौती की थी। कुल मिलाकर 1.25% यानी 125 बेसिस पॉइंट्स की कटौती हुई थी। इसका सीधा फायदा लोन लेने वालों को मिला और होम लोन की ब्याज दरें अप्रैल 2020 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई थीं।
आज आरबीआई ने कहा कि पहले की गई कटौती का पूरा असर अब सिस्टम में दिखाई दे रहा है, इसलिए अभी कुछ समय के लिए ब्रेक लेना जरूरी है। इसका मतलब है कि फिलहाल आपकी ईएमआई में कोई बदलाव नहीं होगा। इस समय सरकारी बैंक 7.15% से 7.3% के बीच होम लोन दे रहे हैं। Canara Bank और Union Bank जैसे बैंक सबसे सस्ते हैं। वहीं HDFC और Axis जैसे प्राइवेट बैंक करीब 8% तक ब्याज ले रहे हैं, और कुछ मामलों में यह 9% भी जा सकता है, जो पूरी तरह आपके क्रेडिट स्कोर पर निर्भर करता है।
लोन रिकवरी एजेंट्स पर सख्त नियम: अब नहीं होगा उत्पीड़न
भारत में लाखों लोग बैंक और एनबीएफसी से लोन लेते हैं। होम लोन, पर्सनल लोन, एजुकेशन लोन, माइक्रोफाइनेंस लोन। लेकिन जब कोई व्यक्ति आर्थिक तंगी में फंस जाता है और समय पर ईएमआई नहीं भर पाता, तो कई बार रिकवरी एजेंट कानून और इंसानियत दोनों हदें पार कर जाते हैं। इन्हीं बढ़ती शिकायतों को देखते हुए अब आरबीआई ने सख्त कदम उठाने का फैसला लिया है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि बहुत जल्द लोन रिकवरी एजेंट्स को लेकर कड़े नियम बनाए जाएंगे। अभी के नियम कहते हैं कि रिकवरी एजेंट सुबह 8 बजे से पहले और शाम 7 बजे के बाद कॉल या विजिट नहीं कर सकते। एजेंट को बैंक द्वारा दिया गया आईडी कार्ड और ऑथराइजेशन लेटर साथ रखना जरूरी है। किसी भी तरह की धमकी, गाली, डराना, फोर्स का इस्तेमाल या मेंटल टॉर्चर पूरी तरह गैरकानूनी है। एजेंट आपके रिश्तेदारों, पड़ोसियों या ऑफिस में जाकर आपकी जानकारी शेयर नहीं कर सकते। सोशल मीडिया पर बदनाम करना या सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करना भी सख्त मना है।
द हिंदू की रिपोर्ट: लोन रिकवरी की डार्क साइड
The Hindu की एक रिपोर्ट में भारत में लोन रिकवरी सिस्टम की डार्क साइड पर बात की गई है। इसमें बताया गया है कि कैसे कर्ज वसूली अब कई जगह इंसानियत की हदें पार कर चुकी है। यह रिपोर्ट Association of Health Care Providers India और All India Lawyers Union से जुड़े एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर Alternative Law and Health Forum ने तैयार की है।
स्टडी में सामने आया है कि रिकवरी एजेंट अक्सर बार-बार कॉल करते हैं, धमकी देते हैं, गाली-गलौज करते हैं, घर और ऑफिस पहुंच जाते हैं। रिश्तेदारों और पड़ोसियों को फोन कर देते हैं और कई बार सोशल मीडिया के जरिए लोगों को बदनाम करने की कोशिश भी करते हैं। कई मामलों में तो महिलाओं और बुजुर्गों को भी नहीं बख्शा जाता। रिपोर्ट में ऐसी कई घटनाओं का जिक्र है जहां माइक्रोफाइनेंस लोन और डिजिटल लोन ऐप से जुड़े उत्पीड़न के बाद लोगों ने अपनी जान भी दे दी।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि लगातार मानसिक दबाव, सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करना और समाज में बेइज्जती इंसान को अंदर से तोड़ देता है। भारत की Supreme Court और कई High Courts पहले ही कह चुके हैं कि लोन रिकवरी के नाम पर मानसिक उत्पीड़न गैरकानूनी है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि रिकवरी एजेंट की हरकतों की जिम्मेदारी सीधे बैंक और एनबीएफसी की होती है। Madras High Court और Bombay High Court ने भी कई मामलों में कहा है कि अगर रिकवरी के दबाव से किसी व्यक्ति को मानसिक नुकसान होता है तो बैंक को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
नए फ्रेमवर्क में क्या होगा खास?
Financial Express के हिसाब से इस नए फ्रेमवर्क में तीन बड़ी बातें तय की जाएंगी। पहली, रिकवरी एजेंट की ट्रेनिंग और बिहेवियर स्टैंडर्ड। दूसरी, बैंकों की सीधी जिम्मेदारी। तीसरी, ग्राहकों की शिकायतों पर तेज कार्रवाई का सिस्टम। अब देखना यह है कि ये नए नियम जमीन पर कितनी सख्ती से लागू होते हैं, क्योंकि असली बदलाव कागज पर नहीं बल्कि लोगों की जिंदगी में दिखना चाहिए।
डिजिटल फ्रॉड पर बड़ा ऐलान: ₹25,000 तक मुआवजा
आज के समय में करोड़ों लोग यूपीआई या डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल करते हैं। फोन से पेमेंट, क्यूआर स्कैन, नेट बैंकिंग, कार्ड से ट्रांजैक्शन, सब कुछ डिजिटल हो गया है। लेकिन इसके साथ ही फ्रॉड भी तेजी से बढ़े हैं। रिजर्व बैंक के डाटा के मुताबिक साल 2023-24 में भारत में करीब 29,800 डिजिटल फ्रॉड के केस दर्ज हुए थे, जिसमें ₹14,570 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ। उसके बाद 2024-25 में 13,470 केस सामने आए थे, जिनमें करीब ₹5,200 करोड़ का नुकसान हुआ।
डिजिटल फ्रॉड कोई छोटी समस्या नहीं रह गई है। लाखों लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं और हजारों करोड़ रुपए डूब चुके हैं। इसी को देखते हुए आज आरबीआई ने एक नया फ्रेमवर्क प्रपोज किया है, जिसमें डिजिटल पेमेंट फ्रॉड के शिकार ग्राहकों को ₹25,000 तक का मुआवजा या फ्रॉड अमाउंट का 80% मिल सकता है। आरबीआई के डाटा के हिसाब से 65% केस में जो फ्रॉड होते हैं, उनकी रकम ₹55,000 से कम होती है। उसी डाटा को ध्यान में रखते हुए ₹25,000 की अमाउंट को प्रपोज किया गया है।
यह अभी फाइनल नियम नहीं है, बस एक प्रस्ताव है। यानी आरबीआई इस पर ड्राफ्ट गाइडलाइन लाएगा, लोगों और बैंकों से सुझाव लेगा और उसके बाद इसे लागू किया जाएगा।
किस तरह के फ्रॉड में मिलेगा मुआवजा?
Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक आरबीआई ने जिन फ्रॉड को कवर किया है, उनमें कार्ड और इंटरनेट आधारित फ्रॉड यानी यूपीआई, डेबिट-क्रेडिट कार्ड और नेट बैंकिंग से जुड़े सभी अनऑथराइज्ड ट्रांजैक्शन शामिल हैं। ऐसे ट्रांजैक्शन भी जो आपकी परमिशन के बिना हो गए। यानी अगर आपकी गलती नहीं है और सिस्टम या स्कैम की वजह से पैसा गया है, तो ₹25,000 तक की भरपाई हो सकती है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि सीनियर सिटीजन के लिए भी अलग से सेफ्टी लेयर, ज्यादा ऑथेंटिकेशन और डिले क्रेडिट सिस्टम पर काम किया जा रहा है। यह कदम बुजुर्गों के लिए खास तौर पर राहत भरा है, क्योंकि वे अक्सर डिजिटल फ्रॉड के आसान शिकार बन जाते हैं।
होम लोन लेते समय रखें ये सावधानियां
एक्सपर्ट्स एक जरूरी वार्निंग भी दे रहे हैं। Growth Vine Capital के कोफाउंडर शुभम गुप्ता कहते हैं कि यह मानकर मत चलिए कि ब्याज दरें हमेशा नीचे ही जाएंगी। अगर भविष्य में 1 से 2% तक दरें बढ़ती हैं, तो ₹80 लाख के लोन पर ₹4,000 से ₹10,000 तक बढ़ सकती है आपकी ईएमआई। इसलिए लोन लेते समय ध्यान रखें कि आपकी ईएमआई आपकी सैलरी का 40 से 45% से ज्यादा न हो।
वहीं Agam Advisors के सीईओ प्रशांत मिश्रा कहते हैं कि घर खरीदते समय सिर्फ ईएमआई पर ध्यान न दें, बल्कि स्टैंप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन, इंटीरियर, मेंटेनेंस और इमरजेंसी खर्चों को भी जोड़कर बजट बनाएं। साथ ही कम से कम 6 से 9 महीने का इमरजेंसी फंड हमेशा तैयार रखें।
मुख्य बातें (Key Points)
- आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा, ईएमआई में फिलहाल कोई बदलाव नहीं
- लोन रिकवरी एजेंट्स पर सख्त नियम जल्द लागू होंगे, बैंक होंगे सीधे जवाबदेह
- डिजिटल फ्रॉड के शिकार लोगों को ₹25,000 तक या 80% अमाउंट का मुआवजा मिलेगा
- सीनियर सिटीजन के लिए अलग से सेफ्टी लेयर और ऑथेंटिकेशन पर काम जारी
- होम लोन लेते समय ईएमआई सैलरी के 40-45% से ज्यादा न हो, इमरजेंसी फंड जरूर रखें








