Ramjet Artillery Shell : राजस्थान के पोखरण में भारत ने ऐसा सैन्य परीक्षण किया है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। कब हाल ही में, कहाँ पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज, किसने Indian Army, और क्या रमजेट पावर्ड 155 एमएम आर्टिलरी शेल का सफल परीक्षण। इसके साथ ही भारत दुनिया का पहला देश बन गया है, जिसकी सेना इस अत्याधुनिक तकनीक को ऑपरेशनल तौर पर इस्तेमाल करने जा रही है।
दुनिया की जंग अब सिर्फ टैंकों और सैनिकों से नहीं, बल्कि तकनीक, रेंज और प्रिसीजन से लड़ी जा रही है। इसी बदलते युद्ध गणित में भारत ने ऐसा कदम उठाया है, जो उसे रणनीतिक रूप से कई देशों से आगे ले जाता है।

पोखरण में क्यों खास है यह टेस्ट
पोखरण वही इलाका है, जहां भारत पहले भी अपनी ताकत का लोहा मनवा चुका है। अब इसी मैदान पर Indian Army ने रमजेट पावर्ड 155 एमएम शेल्स के शुरुआती टेस्ट पूरे कर लिए हैं। यह टेस्ट सिर्फ एक हथियार का नहीं, बल्कि भारतीय सैन्य तकनीक की नई दिशा का संकेत है।
क्या है रमजेट आर्टिलरी शेल की तकनीक
अब तक आर्टिलरी शेल गन से निकलते ही केवल बैलिस्टिक पाथ पर उड़ता था। लेकिन रमजेट शेल गन से निकलने के बाद भी खुद को आगे बढ़ाता रहता है। इस तकनीक में शेल के अंदर एक एयर-ब्रीदिंग रमजेट इंजन लगा होता है। जैसे ही शेल गन से करीब माक-2 स्पीड पर निकलता है, हवा अपने आप इंजन में कंप्रेस होती है, फ्यूल जलता है और लगातार थ्रस्ट मिलता रहता है।
IIT मद्रास के वैज्ञानिकों की बड़ी भूमिका
इस क्रांतिकारी तकनीक को IIT Madras के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है। इस प्रोजेक्ट के पीछे आर्मी टेक्नोलॉजी बोर्ड के साथ प्रोफेसर पी.ए. रामकृष्ण और एस. वर्मा जैसे विशेषज्ञ जुड़े रहे। कई वर्षों की रिसर्च के बाद इस शेल को आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत तैयार किया गया है।

रेंज 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ेगी
इस तकनीक का सबसे बड़ा असर रेंज पर पड़ेगा। 155 एमएम आर्टिलरी शेल की मारक दूरी 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी, वो भी बिना मारक क्षमता कम किए। इसका मतलब यह है कि दुश्मन के गहरे ठिकाने अब सुरक्षित नहीं रहेंगे और सीमा से काफी दूर बैठकर भी सटीक हमला संभव होगा।
मौजूदा सिस्टम में ही होगा इस्तेमाल
सबसे बड़ी बात यह है कि इन रमजेट मॉड्यूल्स को मौजूदा 155 एमएम शेल्स में ही रेट्रोफिट किया जा सकता है। यानी नई फैक्ट्री, नई सप्लाई चेन या नए गोले की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह तकनीक स्वदेशी K9 वज्रा से लेकर अमेरिका से आयातित अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर सिस्टम में भी इस्तेमाल की जा सकेगी।
भारत को रणनीतिक और आर्थिक फायदा
इस तकनीक से भारत को कई स्तरों पर फायदा होगा। रणनीतिक रूप से भारत दुश्मन की पहुंच से बाहर रहकर उसके टारगेट तबाह कर सकेगा। कम लागत में ज्यादा असर मिलेगा और मिसाइलों पर निर्भरता कम होगी। साथ ही आत्मनिर्भर भारत को मजबूती मिलेगी और भविष्य में इस तकनीक के निर्यात की संभावनाएं भी खुलेंगी।

वैश्विक सैन्य समीकरण पर असर
अब तक अमेरिका और यूरोप आर्टिलरी में रॉकेट असिस्टेड शेल्स पर निर्भर रहे हैं। रमजेट शेल्स उनसे ज्यादा रेंज और बेहतर एफिशिएंसी देते हैं। भारत का पहला ऑपरेशनल यूजर बनना आर्टिलरी डोमेन में टेक्नोलॉजी लीडरशिप का संकेत है, जिससे वैश्विक हथियार बाजार में हलचल मचना तय है।
जानें पूरा मामला
पोखरण में हुए रमजेट पावर्ड 155 एमएम आर्टिलरी शेल के सफल परीक्षण ने साफ कर दिया है कि भारत अब केवल तकनीक का पीछा करने वाला देश नहीं, बल्कि दिशा तय करने वाला देश बन चुका है। यह सिर्फ एक नया गोला नहीं, बल्कि भविष्य की जंग का नया नियम है।
मुख्य बातें (Key Points)
- भारत ने रमजेट पावर्ड 155 एमएम शेल का सफल परीक्षण किया
- Indian Army बनेगी दुनिया की पहली ऑपरेशनल यूजर
- आर्टिलरी की रेंज 30–50% तक बढ़ेगी
- IIT Madras के वैज्ञानिकों ने तकनीक विकसित की








