Ram Rahim Parole : रोहतक की सुनारिया जेल से सोमवार को Gurmeet Ram Rahim एक बार फिर जेल से बाहर आया। साध्वियों के यौन शोषण और पत्रकार की हत्या के मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहा डेरा सच्चा सौदा प्रमुख इस बार 40 दिन की पैरोल पर रिहा हुआ है। सुबह करीब साढ़े 11 बजे वह कड़े सुरक्षा घेरे में काफिले के साथ Sirsa स्थित डेरे के लिए रवाना हुआ। यह 15वीं बार है, जब राम रहीम पैरोल या फरलो पर जेल से बाहर आया है।

कब, कहां और कैसे निकला जेल से
राम रहीम हरियाणा के Sunaria Jail में बंद था। पैरोल मिलते ही सिरसा डेरे से लग्जरी गाड़ियों का काफिला जेल पहुंचा। काफिले में दो बुलेटप्रूफ लैंड क्रूजर, दो फॉर्च्यूनर और अन्य वाहन शामिल थे। काफिला सीधे सिरसा के लिए रवाना हुआ, जहां सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
इस बार बागपत नहीं, सिरसा में ही रहेगा
सूत्रों के अनुसार, इस बार राम रहीम उत्तर प्रदेश के बागपत स्थित बरनावा आश्रम नहीं जाएगा। वह पूरे 40 दिन सिरसा डेरे में ही रहेगा। डेरे और आसपास के इलाकों में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।

2017 से जेल में, कई मामलों में उम्रकैद
राम रहीम को 25 अगस्त 2017 को दो साध्वियों के यौन शोषण के मामले में 20 साल की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद 17 जनवरी 2019 को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में उम्रकैद हुई। अक्टूबर 2021 में डेरा मैनेजर रणजीत सिंह की हत्या के मामले में भी उसे उम्रकैद की सजा मिली। हालांकि, एक मामले में हाईकोर्ट से उसे बाद में राहत भी मिली, लेकिन वह अब भी सुनारिया जेल में बंद है।
चुनावों से पहले भी मिल चुकी है पैरोल
इससे पहले राम रहीम अप्रैल में 21 दिन की पैरोल पर बाहर आया था। जनवरी में दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक एक हफ्ते पहले उसे 30 दिन की पैरोल मिली थी। उस दौरान भी वह सिरसा डेरे में ही रहा और अपने समर्थकों को वीडियो संदेश के जरिए निर्देश दिए थे। उसे समर्थकों की भीड़ जुटाने की अनुमति नहीं थी।
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पैरोल और फरलो का फर्क
पैरोल आमतौर पर विशेष परिस्थितियों में दी जाती है, जैसे परिवार में मृत्यु, बीमारी या शादी। इसमें कैदी सीमित शर्तों के साथ बाहर रह सकता है। वहीं, फरलो कैदी का कानूनी अधिकार माना जाता है, जिसके लिए किसी विशेष वजह की जरूरत नहीं होती, हालांकि इसके नियम राज्य के अनुसार तय होते हैं।
आम लोगों पर असर
राम रहीम की बार-बार रिहाई को लेकर हरियाणा और पंजाब में सामाजिक और राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो जाती हैं। समर्थकों में जहां उत्साह दिखता है, वहीं विरोध करने वाले वर्ग कानून-व्यवस्था और न्याय प्रक्रिया पर सवाल उठाते हैं।
विश्लेषण: बार-बार पैरोल पर उठते सवाल
राम रहीम का 15वीं बार जेल से बाहर आना यह सवाल खड़ा करता है कि गंभीर अपराधों में उम्रकैद काट रहे कैदियों के लिए पैरोल की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है। चुनावी दौर के आसपास मिली पैरोल ने पहले भी राजनीतिक बहस को हवा दी थी। इस बार भी सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन की भूमिका पर सबकी नजर रहेगी।
मुख्य बातें (Key Points)
- राम रहीम 40 दिन की पैरोल पर सुनारिया जेल से बाहर
- 15वीं बार पैरोल या फरलो लेकर रिहा हुआ
- सिरसा डेरे में ही रहेगा, कड़े सुरक्षा इंतजाम
- साध्वियों के यौन शोषण और हत्या मामलों में उम्रकैद की सजा








