Rahul Gandhi Letter Row. नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को 272 पूर्व नौकरशाहों, सेना के अधिकारियों और बुद्धिजीवियों द्वारा लिखे गए एक पत्र पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस पत्र में राहुल गांधी पर भारत के लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करने का आरोप लगाया गया था, जिसके बाद कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत और अन्य पत्रकारों ने पलटवार करते हुए इन 272 लोगों में से कई के राजनीतिक संबंधों और भ्रष्टाचार के कथित रिकॉर्ड को सार्वजनिक कर दिया है, जिससे ‘सिविल सोसाइटी’ बनकर पत्र लिखने का यह पूरा ‘खेल’ बेनकाब हो गया है।
पत्र ने किसे बताया लोकतंत्र के लिए खतरा?
इन 272 लोगों ने राहुल गांधी पर सवाल उठाते हुए उन्हें ही लोकतंत्र के लिए खतरा बताया। उन्होंने चुनाव आयोग (EC) से जुड़े मुद्दों पर सवाल करने के बजाय, राहुल गांधी को पत्र लिखा और उन पर भड़काऊ आरोप लगाने का नाटकीय रणनीति का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। यह समूह खुद को नागरिक बुद्धिजीवी और सिविल सोसाइटी बता रहा था, लेकिन कांग्रेस ने दावा किया है कि ये सभी बीजेपी के इशारे पर काम कर रहे थे और राजनीतिक लोग हैं।
बीजेपी कनेक्शन और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
कांग्रेस ने कई ऐसे नाम उजागर किए हैं, जो कथित तौर पर बीजेपी से जुड़े हुए हैं या भ्रष्टाचार के मामलों में घिरे रहे हैं।
संजीव त्रिपाठी: रॉ के पूर्व प्रमुख रहे और 2014 में बीजेपी में शामिल हो गए। इंटेलिजेंस फेलियर जैसे गंभीर मुद्दों पर उनका मुंह नहीं खुला, लेकिन वह राहुल गांधी के खिलाफ खत लिख रहे हैं।
योगेश गुप्ता: एक अन्य सदस्य, जिन्होंने कथित रूप से आपत्तिजनक पोस्ट उजागर होने के बाद अपना सोशल मीडिया हैंडल डिलीट कर दिया।
बीके सिंह: भारतीय वन सेवा के पूर्व अधिकारी, जिन पर आय से अधिक संपत्ति के मामले चले थे।
लक्ष्मी पुरी: वह केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की पत्नी हैं।

आयकर छापे और घोटालों में फंसे नाम
इस सूची में कुछ ऐसे पूर्व अधिकारी भी हैं, जिन पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे हैं:
दीपक सिंघल: यूपी के पूर्व सचिव, जिन पर कथित तौर पर ₹1500 करोड़ के गोमती रिवर फ्रंट घोटाले में आरोप हैं।
रामनारायण सिंह: यूपी के डीजीपी पद से रिटायर हुए इस पूर्व आईपीएस अधिकारी के घर 2022 में आयकर छापे में ₹3 करोड़ से ज्यादा कैश और बेसमेंट में 600 से ज्यादा लॉकर मिले थे।
एके मुनप्पा: पूर्व आईएएस, जिन्हें 2003 में कथित धांधली के आरोपों पर कर्नाटक सरकार ने सस्पेंड कर दिया था। उनका केस कर्नाटक के सबसे पुराने लंबित मामलों में से एक बताया गया।
यह खबर आम आदमी के मन में यह सवाल पैदा करती है कि क्या देश में ‘सिविल सोसाइटी’ के भेष में राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए भ्रष्ट या विवादित रिकॉर्ड वाले लोगों का इस्तेमाल किया जा रहा है?
राहुल गांधी के बयान पर बवाल क्यों?
272 लोगों के पत्र में राहुल गांधी के उन बयानों पर आपत्ति जताई गई, जिनमें उन्होंने चुनाव आयुक्तों पर कोई मुकदमा न चलाने के लिए कानून लाने और वोट चोरी में उनकी कथित संलिप्तता का ‘100% प्रूफ’ होने का दावा किया था। राहुल गांधी ने अपने भाषणों में कहा था कि “टाइम आएगा, हम आपको पकड़ेंगे, बचने वाले नहीं हो” और इसे देश के खिलाफ “ट्रीजन” बताया था। पत्र लिखने वालों को राहुल गांधी का यह कहना भड़काऊ लगा कि जो लोग आज सत्ता के साथ मिलकर संविधान के खिलाफ काम कर रहे हैं, उन्हें नहीं छोड़ा जाएगा।
क्या है पृष्ठभूमि
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब राहुल गांधी ने अगस्त 2024 से लगातार चुनाव आयोग पर सवाल उठाए और इलेक्ट्रॉनिक वोटर लिस्ट तथा पोलिंग बूथ का वीडियो फुटेज मांगा। इन सवालों पर जब चुनाव आयोग चुप रहा, तो 4 महीने बाद 272 रिटायर्ड अधिकारियों ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर उन पर ही लोकतंत्र को खतरा पहुँचाने का आरोप लगा दिया। कांग्रेस का दावा है कि यह पत्र चुनाव आयोग का बचाव करने और राहुल गांधी के सवालों को दबाने के लिए बीजेपी के इशारे पर लिखा गया था।
मुख्य बातें (Key Points)
272 रिटायर्ड अधिकारियों ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर उन पर लोकतंत्र पर हमला करने का आरोप लगाया।
कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कई हस्ताक्षरकर्ताओं के राजनीतिक संबंध (बीजेपी) और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को उजागर किया।
सूची में पूर्व रॉ प्रमुख, केंद्रीय मंत्री की पत्नी और ₹1500 करोड़ के घोटाले से जुड़े लोगों के नाम सामने आए हैं।
कांग्रेस का आरोप है कि यह समूह ‘सिविल सोसाइटी’ बनकर सरकार को खुश करने और विपक्ष के सवालों को दबाने के लिए काम कर रहा था।








