Punjab Panchayat Elections Update: पंजाब की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राज्य में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों की तारीखों का आधिकारिक ऐलान कर दिया गया है। राज्य चुनाव आयुक्त राजकमल चौधरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इन चुनावों की घोषणा की, जिसके साथ ही पूरे प्रदेश में चुनावी आचार संहिता लागू हो गई है। यह चुनाव आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के लिए 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले एक बड़ा लिटमस टेस्ट माना जा रहा है।
‘वोटिंग और नतीजों की तारीखें घोषित’
राज्य चुनाव आयोग द्वारा जारी शेड्यूल के मुताबिक, इन चुनावों के लिए नामांकन प्रक्रिया 4 दिसंबर तक चलेगी। इसके बाद 5 दिसंबर को नामांकन पत्रों की जांच (Scrutiny) होगी और 6 दिसंबर तक उम्मीदवार अपने नाम वापस ले सकेंगे।
मतदान की तारीख 14 दिसंबर तय की गई है, जबकि नतीजों का ऐलान 17 दिसंबर को किया जाएगा। इस बार 23 जिलों के 57 जोन और 154 पंचायत समितियों के 2863 जोन में चुनाव होंगे। इन चुनावों में कुल 1 करोड़ 36 लाख 4 हजार 650 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिनमें करीब 71 लाख पुरुष और 64 लाख महिला मतदाता शामिल हैं।
‘आचार संहिता से पहले बड़ा प्रशासनिक फेरबदल’
चुनाव की घोषणा से ठीक पहले पंजाब सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। सरकार ने आचार संहिता लागू होने से कुछ ही घंटे पहले करीब 140 सिविल और पुलिस अधिकारियों के तबादले कर दिए।
इन तबादलों में 2 आईएएस, 3 आईपीएस, 75 पीपीएस (डीएसपी रैंक) और 69 पीसीएस अधिकारी शामिल हैं। जानकारों का मानना है कि सरकार ने अपने हिसाब से फील्डिंग सजाने के लिए यह कदम उठाया है, ताकि चुनावी प्रक्रिया के दौरान प्रशासन पर पकड़ मजबूत रहे। चुनाव आयोग ने भी हर जिले में एक आईपीएस और एक पीसीएस अधिकारी को निगरानी के लिए तैनात करने का फैसला किया है।
‘सभी पार्टियों के लिए साख का सवाल’
यह चुनाव सिर्फ स्थानीय निकायों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे 2027 के विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल माना जा रहा है। सत्ताधारी आम आदमी पार्टी ‘झाड़ू’ के निशान पर, शिरोमणि अकाली दल ‘तकड़ी’, बीजेपी ‘कमल’ और कांग्रेस ‘हाथ’ के निशान पर चुनाव लड़ेगी। वहीं, पुनर्गठित अकाली दल के उम्मीदवार फिलहाल आजाद उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरेंगे क्योंकि उन्हें अभी पार्टी सिंबल नहीं मिला है।
विपक्षी पार्टियों ने कमर कस ली है और बैठकों का दौर शुरू हो गया है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि स्थानीय चुनावों में अक्सर सत्ताधारी पार्टी का दबदबा रहता है, लेकिन अगर विपक्षी पार्टियां इन चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करती हैं, तो इसका सीधा असर आने वाले विधानसभा चुनावों के मनोबल पर पड़ेगा।
‘जानें पूरा मामला’
पंजाब में स्थानीय निकाय चुनावों का इंतजार लंबे समय से हो रहा था। राज्य चुनाव आयुक्त राजकमल चौधरी ने अब आधिकारिक रूप से जिला परिषद और ब्लॉक समिति चुनावों की घोषणा कर दी है। इसके तहत 14 दिसंबर को वोट डाले जाएंगे और 17 को नतीजे आएंगे। चुनाव की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए 96,000 कर्मचारियों की ड्यूटियां लगाई गई हैं। चुनाव से ठीक पहले किए गए बंपर तबादलों ने सियासी गलियारों में चर्चा छेड़ दी है कि सरकार इस ‘छोटी चुनाव’ को भी कितनी गंभीरता से ले रही है।
मुख्य बातें (Key Points)
पंजाब में जिला परिषद और ब्लॉक समिति चुनाव के लिए 14 दिसंबर को वोटिंग और 17 दिसंबर को काउंटिंग होगी।
नामांकन 4 दिसंबर तक भरे जा सकेंगे और नाम वापसी की आखिरी तारीख 6 दिसंबर है।
चुनाव आचार संहिता लगने से ठीक पहले सरकार ने 140 अफसरों (IAS, IPS, PCS, PPS) के तबादले किए हैं।
कुल 1.36 करोड़ मतदाता इन चुनावों में हिस्सा लेंगे; 23 जिलों में चुनाव प्रक्रिया होगी।
यह चुनाव 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले सभी पार्टियों के लिए शक्ति प्रदर्शन का मौका है।








