Punjab Tableau Kartavya Path Guru Tegh Bahadur : देश के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली के कर्तव्य पथ पर निकली भव्य परेड में पंजाब की झांकी ने मानवता, बलिदान और सिख सिद्धांतों का सशक्त संदेश दिया। यह झांकी श्री गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी दिवस को समर्पित रही। परेड के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने झांकी को हाथ हिलाकर अभिवादन किया, जबकि समारोह की चीफ गेस्ट यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन झांकी के बारे में जानकारी लेती नजर आईं। उनके साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उपस्थित थे।
कर्तव्य पथ से गुजरती इस झांकी ने दर्शक दीर्घा में बैठे हजारों लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। सिख पुरुष और महिलाएं गुरु की महिमा गाते दिखे, वहीं रागी जत्थे शबद-कीर्तन के माध्यम से वातावरण को आध्यात्मिक रंग में रंगते नजर आए। आम लोगों के लिए यह झांकी सिर्फ एक दृश्य नहीं, बल्कि धार्मिक आज़ादी और मानवीय मूल्यों की जीवंत झलक बनकर सामने आई।
मानवता और धार्मिक स्वतंत्रता का प्रतीक
पंजाब सरकार के सीनियर अधिकारी रणदीप सिंह आहलूवालिया के अनुसार, झांकी में भाई मति दास, भाई सति दास और भाई दियाल जी के अद्वितीय बलिदान को दर्शाया गया। झांकी दो हिस्सों में तैयार की गई थी। इसके ट्रैक्टर हिस्से पर बना हाथ धार्मिक स्वतंत्रता का प्रतीक था, जो यह संदेश देता है कि गुरु तेग बहादुर ने अन्य धर्मों की आज़ादी की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
शीशगंज साहिब और खंडा की झलक
झांकी के पिछले हिस्से में खंडा साहिब के साथ गुरुद्वारा शीशगंज साहिब का मॉडल दर्शाया गया, वही स्थल जहां गुरु तेग बहादुर ने मानवता के लिए शहादत दी थी। साइड पैनलों पर तीनों शहीदों की गाथा को कलात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया, जिसने दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया।
मुख्यमंत्री भगवंत मान की प्रतिक्रिया
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने झांकी के कर्तव्य पथ पर शामिल होने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि इस प्रस्तुति से देश और विदेश में बैठे लोगों को गुरु तेग बहादुर के जीवन, उनके सिद्धांतों और उनके बलिदान के महत्व को समझने का अवसर मिला।
2024 का विवाद और मौजूदा भागीदारी
वर्ष 2024 में पंजाब की झांकी को कर्तव्य पथ पर शामिल न किए जाने को लेकर विवाद हुआ था। उस समय पंजाब सरकार ने इसे भेदभाव बताया था, क्योंकि झांकी शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और चंद्रशेखर आज़ाद पर आधारित थी। इसके बाद झांकी को पंजाब और दिल्ली के विभिन्न इलाकों में प्रदर्शित किया गया। अब लगातार पंजाब की झांकी परेड का हिस्सा बन रही है।
तीन बार मिल चुका राष्ट्रीय सम्मान
पंजाब की झांकी को अब तक तीन बार राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार मिल चुका है। 2019 में जलियांवाला बाग हत्याकांड की शताब्दी पर आधारित झांकी को तीसरा पुरस्कार प्रदान किया गया था। इससे पहले भी 1967 और 1982 में पंजाब को तीसरा स्थान मिल चुका है।
पंजाब की झांकियां लंबे समय से देश की ऐतिहासिक घटनाओं, शहादत और सामाजिक चेतना को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करती रही हैं। गुरु तेग बहादुर की शहादत को समर्पित यह झांकी उसी परंपरा का विस्तार है, जो धार्मिक सहिष्णुता और मानवाधिकारों के महत्व को रेखांकित करती है।
मुख्य बातें (Key Points)
- 77वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर पंजाब की झांकी शामिल
- गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी दिवस को समर्पित प्रस्तुति
- राष्ट्रपति ने किया अभिवादन, चीफ गेस्ट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने ली जानकारी
- धार्मिक स्वतंत्रता और मानवता के संदेश को प्रमुखता से दर्शाया गया








