Punjab Sacrilege Law के तहत अब श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वालों को 20 साल तक की सजा और 25 लाख रुपए तक का जुर्माना भरना पड़ेगा। चंडीगढ़ में 13 अप्रैल को हुए विशेष सत्र में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब विधानसभा ने सर्वसम्मति से ‘जागत जोत श्री गुरू ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल, 2026’ को मंजूरी दे दी। यह कानून देश में धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी के खिलाफ बनाए गए सबसे सख्त कानूनों में से एक माना जा रहा है।
देखा जाए तो यह फैसला पंजाब के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है। पिछले कुछ सालों में बेअदबी की घटनाओं ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया था। लोगों का विश्वास टूट चुका था। राजनीतिक दल वोट की राजनीति करते रहे, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं हुआ। और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी।
विधानसभा के विशेष सत्र में क्या हुआ
13 अप्रैल को पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया। सदन में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जब इस बिल को पेश किया, तो माहौल गंभीर हो गया। उन्होंने कहा, “मैं इस अजीम सदन को भरोसा दिलाता हूं कि यह बिल भविष्य में बेअदबी के अंत को दर्शाता है। अब कोई भी ऐसे घिनौने अपराध में शामिल होने की हिम्मत नहीं करेगा।”
दिलचस्प बात यह है कि इस बिल को सभी दलों का समर्थन मिला। हालांकि मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर तीखे तंज भी कसे। उन्होंने कहा कि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी तथा कांग्रेस ने गुरु साहिब के नाम पर सिर्फ वोट मांगे, लेकिन कभी ठोस कदम नहीं उठाए।
कानून के मुख्य प्रावधान: एक नजर में
अगर गौर करें तो यह कानून पांच अलग-अलग श्रेणियों में सजा का प्रावधान करता है। पहली श्रेणी में कानून का साधारण उल्लंघन करने पर 5 साल तक की जेल और 10 लाख रुपए का जुर्माना लगेगा। दूसरी श्रेणी सबसे गंभीर है।
श्री गुरु ग्रंथ साहिब की सीधे बेअदबी करने पर 7 से 20 साल तक की कठोर कारावास की सजा मिलेगी। साथ ही 2 से 10 लाख रुपए तक का जुर्माना भी देना होगा। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह अपराध गैर-जमानती होगा। मतलब साफ है – दोषी को आसानी से जमानत नहीं मिलेगी।
तीसरी श्रेणी और भी सख्त है। अगर कोई व्यक्ति धार्मिक या सामाजिक सद्भावना भंग करने के इरादे से बेअदबी करता है, तो उसे 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। जुर्माना भी बढ़कर 5 से 25 लाख रुपए तक पहुंच सकता है।
समझने वाली बात यह भी है कि बेअदबी में मदद करने वाले या उकसाने वाले लोगों को भी मुख्य दोषी के बराबर ही सजा मिलेगी। चौथी श्रेणी में बेअदबी की कोशिश करने पर भी 3 से 5 साल की जेल और 1 से 3 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा।
मानसिक बीमारी का बहाना अब नहीं चलेगा
कई बार देखा गया है कि बेअदबी के आरोपी खुद को मानसिक रूप से बीमार बताकर बच निकलने की कोशिश करते हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। नए कानून में स्पष्ट प्रावधान है कि अगर कोई व्यक्ति मानसिक बीमारी का बहाना बनाता है, तो उसके परिवार के सदस्यों पर भी मुकदमा चलाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा, “पत्थर दिल लोग ज्ञान के इस स्रोत का निरादर करते हैं, जो बर्दाश्त योग्य नहीं है। यह एक्ट सुनिश्चित करेगा कि दोषी की आने वाली पीढ़ियां भी अपने परिवार के सदस्यों को दी गई सजा को याद रखेंगी।”
कस्टोडियन की जिम्मेदारी तय
इस कानून में ‘कस्टोडियन’ यानी धार्मिक ग्रंथों की देखभाल करने वालों की जिम्मेदारी भी तय की गई है। धारा 3बी के तहत हर कस्टोडियन को सुरक्षित कस्टडी, सुरक्षा और दुरुपयोग या नुकसान को रोकने के लिए पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
इसके अलावा धारा 4ए के तहत बेअदबी के मामलों की समय पर और सुचारू रूप से जांच सुनिश्चित बनाने की व्यवस्था की गई है। धारा 4बी में साफ कहा गया है कि इस कानून के अधीन अपराध गैर-जमानती होगा और इस संबंध में कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
पिछली सरकारों पर भगवंत मान का हमला
विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पिछली सरकारों पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि पहले कानूनों को व्यापक जनहित की जगह राजनीतिक हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता था।
“यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि पुराने कानूनों में पिछली राज्य सरकारों द्वारा चार बार संशोधन करने के बावजूद इस गैर-मानवीय अपराध के दोषियों को सजा देने के लिए कई कमियां छोड़ी गईं,” भगवंत मान ने कहा।
उन्होंने आगे कहा कि जो लोग बेअदबी के लिए जिम्मेदार हैं, उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब के सामने पेश होकर पूरे संगत के समक्ष अपना अपराध कबूल किया था। लेकिन बाद में राजनीतिक हितों को देखते हुए यू-टर्न ले लिया।
जलियांवाला बाग का जिक्र और तीखा तंज
चिंता का विषय यह है कि मुख्यमंत्री ने 13 अप्रैल की तारीख का जिक्र करते हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड को याद किया। उन्होंने कहा, “जिस परिवार ने 13 अप्रैल, 1919 को जलियांवाला बाग कत्लेआम के दोषी जनरल डायर के लिए रात के खाने की मेजबानी की थी, उनसे संबंधित जनप्रतिनिधि सदन में मौजूद नहीं हैं।”
यह तंज किस पर था, यह तो स्पष्ट नहीं किया गया, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे अकाली नेतृत्व पर निशाना माना जा रहा है।
आम आदमी पार्टी के कदमों पर गर्व
भगवंत मान ने अपनी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना करते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी ने सिर्फ बातें नहीं की, बल्कि ठोस फैसले लिए। उन्होंने बताया कि सरकार ने श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी की पालकी साहिब ले जाने वाले वाहनों पर मोटर वाहन टैक्स (MVT) माफ कर दिया है।
“इन वाहनों के लिए छूट विभिन्न धार्मिक संगठनों द्वारा आयोजित नगर कीर्तनों को ध्यान में रखकर दी गई है,” उन्होंने कहा।
राहत की बात यह है कि यह छूट सभी धर्मों के धार्मिक ग्रंथों को ले जाने वाले वाहनों पर लागू होती है। इससे साम्प्रदायिक सद्भावना और भाईचारा मजबूत होगा।
संसद में छोटे साहिबजादों को श्रद्धांजलि का जिक्र
मुख्यमंत्री ने अपने सांसद काल की एक उपलब्धि का जिक्र भी किया। उन्होंने बताया कि जब वे लोकसभा सदस्य थे, तो उनकी प्रार्थना पर तत्कालीन स्पीकर सुमित्रा महाजन ने पहली बार संसद में श्री गुरू गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों को उनके शहीदी दिवस पर श्रद्धांजलि भेंट की थी।
“उनसे पहले 190 से अधिक संसद सदस्यों ने राज्य का प्रतिनिधित्व किया था, लेकिन उनमें से किसी ने भी इस मुद्दे को उठाने की जहमत नहीं की,” भगवंत मान ने कहा।
गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व का जिक्र
अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने श्री गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार इस जश्न को शानदार ढंग से मनाने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेगी।
“श्री गुरू रविदास महाराज जी ने समूची मानवता की भलाई और समाज के सभी वर्गों की बराबरी का संदेश दिया,” उन्होंने कहा। उन्होंने संत समाज से अपील की कि वे जश्नों की रूपरेखा तय करने में अपने सुझाव दें।
श्री गुरु ग्रंथ साहिब का महत्व
मुख्यमंत्री ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब की महिमा का बखान करते हुए कहा कि यह दुनिया का एक अनोखा धार्मिक ग्रंथ है। इसमें न सिर्फ सिख गुरुओं की शिक्षाएं हैं, बल्कि हिंदू श्रद्धालुओं, मुस्लिम संतों और सूफी संतों के भजन भी समाए हुए हैं।
“दसवें पातशाह श्री गुरू गोबिंद सिंह जी ने ज्योति जोत समाने से पहले श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी को गुरगद्दी देकर हमारे शाश्वत गुरू के रूप में मान्यता दी,” भगवंत मान ने कहा।
गुरबाणी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “पवणु गुरू, पाणी पिता, माता धरति महतु। महान गुरुओं ने हवा को गुरू, पानी को पिता और धरती को मां का दर्जा दिया है। यह 600 साल से अधिक समय पहले दिया गया संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है।”
राज्यपाल से तुरंत मंजूरी की अपील
प्रक्रियात्मक पहलू के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि चूंकि यह बिल एक राज्य बिल है, इसलिए इसके लिए राष्ट्रपति की सहमति की जरूरत नहीं होगी। विधानसभा से पास होने के बाद बिल को राज्यपाल के पास भेजा जाएगा।
उन्होंने कहा, “अगर राज्यपाल जी को समय लगता है तो मैं खुद उनसे मिलूंगा और तुरंत बिल को मंजूरी देने की अपील करूंगा।” उन्होंने विपक्षी दलों से भी इस नेक काम में साथ देने की अपील की।
हैरान करने वाली बात यह है कि विपक्षी दल अक्सर राज्यपाल के पास सरकार के खिलाफ शिकायतें लेकर जाते हैं, लेकिन इस बार मुख्यमंत्री ने उनसे सकारात्मक भूमिका निभाने का आग्रह किया है।
पंजाब की साम्प्रदायिक सद्भावना पर जोर
भगवंत मान ने कहा कि पिछले समय में बेअदबी की घिनौनी कार्रवाइयां राज्य में सख्त मेहनत से बनाई शांति, सद्भावना, भाईचारा और फिर्कू सद्भावना को भंग करने की गहरी साजिश थी।
“पंजाबियों ने हमेशा राज्य में शांति और भाईचारे के सिद्धांतों को कायम रखा है और कोई भी राज्य के गहरे सामाजिक ताने-बाने को कभी भी तबाह नहीं कर सकेगा,” उन्होंने कहा।
उन्होंने आगे कहा, “श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी हर सिख के पिता हैं और राज्य सरकार इस पवित्र ग्रंथ की सुरक्षा सुनिश्चित बनाने के लिए वचनबद्ध है।” इससे साफ होता है कि सरकार इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी।
देश का सबसे सख्त कानून
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कानून देश में धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी के खिलाफ बने सबसे सख्त कानूनों में से एक है। 20 साल तक की जेल और 25 लाख रुपए तक का जुर्माना एक बड़ा प्रावधान है।
इसका मतलब है कि अब पंजाब में बेअदबी करने की सोचने वाले भी दस बार सोचेंगे। गैर-जमानती अपराध होने से दोषियों के लिए बचने का रास्ता भी बहुत मुश्किल हो गया है।
उम्मीद की किरण यह है कि इस कानून से राज्य में शांति और भाईचारा मजबूत होगा। धार्मिक भावनाओं का सम्मान होगा और समाज में सद्भाव बना रहेगा।
आगे क्या होगा
अब यह बिल राज्यपाल के पास जाएगा। उनकी मंजूरी मिलते ही यह कानून लागू हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि वे खुद इस मामले में पहल करेंगे और जल्द से जल्द कानून को लागू करवाएंगे।
यह दर्शाता है कि पंजाब सरकार इस मामले में कितनी गंभीर है। सवाल उठता है कि क्या यह कानून वाकई बेअदबी की घटनाओं को रोक पाएगा? समय ही बताएगा, लेकिन फिलहाल तो यह एक बड़ा और साहसिक कदम जरूर है।
मुख्य बातें (Key Points)
- पंजाब विधानसभा ने ‘जागत जोत श्री गुरू ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल, 2026’ सर्वसम्मति से पास किया
- बेअदबी करने पर 7 से 20 साल तक की सजा और धार्मिक सद्भावना भंग करने पर उम्रकैद तक का प्रावधान
- 25 लाख रुपए तक का जुर्माना और गैर-जमानती अपराध
- बेअदबी में मदद करने वालों को भी मुख्य दोषी के बराबर सजा
- मानसिक बीमारी का बहाना नहीं चलेगा, परिवार के सदस्यों पर भी मुकदमा चलेगा
- मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर जानबूझकर कमियां छोड़ने का आरोप लगाया
- धार्मिक ग्रंथों को ले जाने वाले वाहनों पर मोटर वाहन टैक्स माफ किया गया










