Punjab Sacrilege Cases को लेकर शिरोमणी अकाली दल (SAD) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सरदार बिक्रम सिंह मजीठिया ने गुरुवार को चंडीगढ़ में बड़ा खुलासा किया है। मजीठिया ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पंजाब में पिछले 9 सालों में 500 से ज्यादा बेअदबी की घटनाएं हुई हैं, जो साबित करती हैं कि आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस ने सत्ता पाने के लिए अकाली दल के खिलाफ बड़ी साजिश रची थी। उन्होंने कहा कि पिछले 10 सालों में हुई कुल 597 बेअदबी के मामलों में से सिर्फ 44 में सजा हो पाई है, जो दोनों सरकारों की नीयत और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। मजीठिया ने मांग की कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान, AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग पूरी सिख कौम से माफी मांगें।
AAP MLA नरेश यादव को मालेरकोटला बेअदबी में मिली थी 2 साल की सजा
Punjab Sacrilege Cases में सबसे बड़ा सबूत मजीठिया ने दिल्ली के AAP विधायक नरेश यादव की सजा को बताया। उन्होंने विस्तार से बताया कि 24 जून 2016 को मालेरकोटला शहर के जरग रोड से धार्मिक किताब कुरान शरीफ के हिस्से मिलने की घटना हुई थी। इसके बाद पुलिस ने विजय कुमार, नंद किशोर और गौरव कुमार समेत दो अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया।
जांच में सबूतों और दूसरे आरोपियों के बयानों के आधार पर दिल्ली से AAP MLA नरेश यादव का नाम सामने आया। विजय कुमार की पटियाला से गिरफ्तारी के बाद नरेश यादव को उसके बयानों के आधार पर जांच में शामिल किया गया। मजीठिया ने बताया कि AAP MLA नरेश यादव ने विजय कुमार के अकाउंट में ट्रांसफर हुए ₹90 लाख और उसके रिश्तों की जांच के लिए अर्जी दी थी। लेकिन मालेरकोटला कोर्ट ने पक्के सबूतों के आधार पर नरेश यादव को बेअदबी के आरोप में 2 साल जेल की सजा सुनाई। मजीठिया ने कहा कि यह सजा ही इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि Punjab Sacrilege Cases के पीछे AAP का हाथ था।
597 बेअदबी मामलों में सिर्फ 44 में सजा, 99 में आरोपी बरी: सरकारी आंकड़े
मजीठिया ने Punjab Sacrilege Cases के सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे। उन्होंने बताया कि पिछले 10 सालों में पंजाब में कुल 597 बेअदबी के मामले दर्ज हुए हैं। इनमें से सिर्फ 44 मामलों में सजा हो पाई है। यह आंकड़ा कुल मामलों का 10% से भी कम है, जो बेहद चिंताजनक है।
इससे भी ज्यादा गंभीर बात यह है कि 99 मामलों में आरोपी बरी हो गए। मजीठिया ने सवाल उठाया कि क्या यह जांच में नाकामी की वजह से हुआ या फिर AAP नेताओं को बचाने के लिए सबूत मिटाने की साजिश थी? उन्होंने कहा कि भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल को इसका जवाब देना होगा। मजीठिया ने कहा कि ये आंकड़े AAP और कांग्रेस दोनों सरकारों के काम करने के सिस्टम और नीयत पर बड़ा सवाल खड़ा करते हैं।
साल-दर-साल के आंकड़े: चुनावी साल में सबसे ज्यादा बेअदबी के मामले
मजीठिया ने Punjab Sacrilege Cases का साल-दर-साल डेटा पेश करते हुए एक चौंकाने वाला पैटर्न दिखाया। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के आंकड़े देखें तो 2017 में 47, 2018 में 40 और 2019 में 31 बेअदबी के मामले दर्ज हुए। 2020 में मामलों की संख्या बढ़कर 59 हो गई।
सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि 2021 और 2022 में, जो राज्य विधानसभा चुनावों का साल था और जब AAP ने सत्ता संभाली, तब बेअदबी के मामले तेजी से बढ़कर 80 तक पहुंच गए। मजीठिया ने इसे AAP की साजिश का सबसे बड़ा सबूत बताया।
AAP सरकार के कार्यकाल में 2023 में 54 मामले दर्ज हुए, 2024 में यह बढ़कर 65 हो गए। 2025 में 22 मामले सामने आए और 2026 में 28 फरवरी तक 9 मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
| साल | बेअदबी के मामले | सरकार |
|---|---|---|
| 2017 | 47 | कांग्रेस |
| 2018 | 40 | कांग्रेस |
| 2019 | 31 | कांग्रेस |
| 2020 | 59 | कांग्रेस |
| 2021-2022 | 80 | कांग्रेस/AAP (चुनावी साल) |
| 2023 | 54 | AAP |
| 2024 | 65 | AAP |
| 2025 | 22 | AAP |
| 2026 (28 फरवरी तक) | 9 | AAP |
अमृतसर ग्रामीण में सबसे ज्यादा 51 मामले, जिलेवार आंकड़े चौंकाने वाले
Punjab Sacrilege Cases के जिलेवार आंकड़े भी मजीठिया ने सामने रखे। इनके मुताबिक अमृतसर ग्रामीण 51 मामलों के साथ पूरे पंजाब में सबसे आगे है। इसके बाद अमृतसर शहर में 42 और बठिंडा में 39 मामले दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं।
तरन तारन में 36 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि होशियारपुर और पटियाला में 35-35 मामले सामने आए हैं। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि बेअदबी की घटनाएं पंजाब के किसी एक हिस्से तक सीमित नहीं हैं बल्कि पूरे राज्य में फैली हुई हैं, जो मजीठिया के अनुसार एक संगठित साजिश की ओर इशारा करता है।
“बेअदबी करने वाले भी AAP वाले, उनके वकील भी AAP वाले”
Punjab Sacrilege Cases पर मजीठिया ने सबसे तीखा हमला करते हुए कहा कि अब यह पूरी तरह साफ हो गया है कि राज्य में बेअदबी करने वाले आम आदमी पार्टी और उसके नेता ही थे। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बेअदबी के दोषी पाए गए AAP MLA नरेश यादव समेत दूसरे आरोपियों को बचाने के लिए AAP के ऐसे नेता मैदान में उतरे जो पेशे से वकील भी थे।
मजीठिया ने आरोप लगाया कि इन वकील नेताओं को बाद में AAP सरकार में बड़ी-बड़ी कुर्सियां और मंत्री पद से नवाजा गया। यह इनाम उन्हें बेअदबी के आरोपियों को बचाने की कीमत पर दिया गया। मजीठिया ने कहा कि यह पूरा मामला दर्शाता है कि कैसे AAP ने बेअदबी की साजिश रची, उसे अंजाम दिया और फिर अपने ही लोगों को बचाने के लिए कानूनी लड़ाई भी खुद ही लड़ी।
AAP के मगरमच्छ आंसू और फास्ट-ट्रैक कोर्ट का खोखला वादा
मजीठिया ने Punjab Sacrilege Cases पर AAP सरकार के वादों की भी पोल खोली। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने से पहले अरविंद केजरीवाल, भगवंत मान और स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने मगरमच्छ के आंसू बहाकर सिख समुदाय की भावनाओं से खेला।
AAP ने सत्ता में आने पर बड़े-बड़े वादे किए थे कि सरकार बनने के कुछ ही दिनों में बेअदबी करने वालों को सजा देने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट में मामलों की सुनवाई होगी, तय समय में फैसले होंगे, दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। लेकिन मजीठिया ने कहा कि यह सब इसलिए नहीं हो सका क्योंकि बेअदबी करने वाली पार्टी AAP खुद थी और उसके खुलेआम जुर्म को छिपाने की लाखों कोशिशें की गईं।
मजीठिया बोले: गुरु साहिब ने सभी चेहरों से नकाब उतार दिया
मजीठिया ने बेहद भावनात्मक लहजे में कहा कि गुरु साहिब ने बेअदबी करने वालों और बेअदबी पर राजनीति करने वालों के सभी चेहरे सिख पंथ के आगे बेनकाब कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता की भूखी AAP के नेताओं ने सिर्फ कुर्सी के लालच में अकाली दल के खिलाफ गंदी साजिश रची और पवित्र ग्रंथ श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी जागदी ज्योत की बेअदबी करने में कोई संकोच नहीं किया।
मजीठिया ने कहा कि आज पूरी दुनिया के सिखों के सामने इन नेताओं के चेहरों से नकाब उतर गया है। उन्होंने दोहराया कि AAP सुप्रीमो केजरीवाल जिन्होंने खुद को “हार्ड कोर ईमानदार” का मेडल दिया है और उनके “कठपुतली” मुख्यमंत्री भगवंत मान को अब पंजाब के लोगों से सबके सामने माफी मांगनी चाहिए और मानना चाहिए कि उन्होंने सत्ता के लालच में यह गंभीर जुर्म किया।
Punjab Sacrilege Cases पर अकाली दल की राजनीतिक चाल कितनी कारगर?
Punjab Sacrilege Cases को लेकर मजीठिया का यह खुलासा पंजाब की राजनीति में बड़ा तूफान ला सकता है। अकाली दल ने सरकारी आंकड़ों और कोर्ट की सजा को अपने सबसे बड़े हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया है। बेअदबी का मुद्दा पंजाब की राजनीति में हमेशा से सबसे संवेदनशील रहा है और इसी मुद्दे ने 2017 में अकाली दल को सत्ता से बाहर किया था। अब अकाली दल उन्हीं आंकड़ों के सहारे AAP और कांग्रेस दोनों को घेरने की कोशिश कर रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि AAP और कांग्रेस इन आरोपों का क्या जवाब देते हैं और क्या ये आंकड़े पंजाब की जनता की राय बदलने में कामयाब होते हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- मजीठिया ने सरकारी आंकड़ों के हवाले से कहा कि पिछले 10 सालों में पंजाब में 597 बेअदबी के मामले दर्ज हुए, सिर्फ 44 में सजा हुई और 99 में आरोपी बरी हो गए।
- AAP MLA नरेश यादव को मालेरकोटला कोर्ट ने 2016 की बेअदबी में 2 साल जेल की सजा सुनाई, ₹90 लाख के ट्रांजैक्शन की भी जांच हुई।
- चुनावी साल 2021-2022 में बेअदबी के मामले तेजी से बढ़कर 80 तक पहुंचे, अमृतसर ग्रामीण 51 मामलों के साथ सबसे आगे।
- मजीठिया ने केजरीवाल, भगवंत मान और राजा वड़िंग से सिख कौम से माफी मांगने की मांग की, कहा: बेअदबी करने वाले भी AAP वाले, उनके वकील भी AAP वाले।













