Punjab River Water Dispute : शिरोमणी अकाली दल ने आज मुख्यमंत्री भगवंत मान पर आधुनिक समय के दरबारा सिंह (पूर्व कांग्रेस मुख्यमंत्री) की तरह काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वे अपनी कुर्सी बचाने के लिए पंजाब के जल अधिकारों से समझौता कर रहे हैं।
यहां एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए अकाली दल के वरिष्ठ नेता स. परमबंस सिंह रोमाणा ने कहा कि जिस तरह से पूर्व मुख्यमंत्री दरबारा सिंह ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के इशारे पर पंजाब के जल अधिकारों से समझौता किया था , ठीक उसी तरह मौजूदा मुख्यमंत्री भगवंत मान अपने बाॅस अरविंद केजरीवाल के निर्देश पर राज्य का पानी हरियाणा को देने के लिए तैयार हैं।
मुख्यमंत्री से यह सवाल पूछते हुए अकाली नेता ने कहा कि उन्होने यह क्यों नही कहा कि राज्य के पास एक भी बूंद देने के लिए नही बचा है, सरदार परमबंस सिंह रोमाणा ने कहा,‘‘ इससे स्पष्ट है कि पंजाब में आप सरकार हमारी नदियों का पानी हरियाणा को देने की तैयारी कर रही है।’’ उन्होने कहा कि मुख्यमंत्री ने यह कहकर इस बात पर मुहर लगा दी कि,‘‘ पहले हमें यह तय करने दीजिए कि कितना पानी देना है, उसके बाद हम सतलुज यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर बनाएंगें।’’
इस बात पर जोर देते हुए कि अकाली दल इस साजिश को कतई सफल नही होने देगा, अकाली नेता ने कहा,‘‘ हम पंजाब से पानी की एक भी बूंद हरियाणा में नही बहने देंगें।’’ उन्होने कहा कि अकाली दल अध्यक्ष सरदार सुखबीर सिंह बादल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अगली अकाली दल सरकार राजस्थान नहर में पानी का प्रवाह रोककर पंजाब के खेतों की ओर मोड़ेगी और राज्य के साथ हुए ऐतिहासिक अन्याय को दूर करेगी ।
सरदार रोमाणा ने यह भी साफ किया कि पंजाब और हरियाणा के बीच नदी जल विवाद को हल करने का केवल रिपेरियन सिद्धांत ही है। उन्होेने कहा कि इस सिद्धांत के अनुसार पंजाब में बहने वाले पानी का स्वामी केवल पंजाब है। उन्होने आगे कहा,‘‘ इसी सिद्धांत के आधार पर राजस्थान को नर्मदा नदी का पानी देने से इंकार किया । उन्होने कहा कि एक ही देश में दो कानून नही हो सकते।’’
हरियाणा के मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस के दौरान पंजाब के हितों को बेचने के अपनी सरकार के फैसले को समझाने के लिए धार्मिक उपमाओं को तोड़ -मरोड़कर पेश करने की कड़ी निंदा करते हुए सरदार रोमाणा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने भाई कन्हैया का उदाहरण दिया जो युद्ध के मैदान में दुश्मनों को पानी पिलाते थे,सच्चाई यह है कि भाई कन्हैया ने न सिर्फ अपने भाइयों बल्कि दुश्मनों को भी पानी पिलाया। उन्होने कहा,‘‘ मुख्यमंत्री को पता होना चाहिए कि हमारे गुरु साहिबाने ने हमें अपने अधिकारों के लिए लड़ना सिखाया है। हम आपको हमारे नदी अधिकरों को छीनने के लिए झूठी कहानी गढ़ने की बिल्कूल भी अनुमति नही देंगें।’’
सरदार रोमाणा ने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री द्वारा फैलाए गए झूठ के विपरीत कि एसवाईएल की समस्या ‘बुजूर्गों’ द्वारा पैदा की गई थी और वे इसे सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं, सच्चाई यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री सरदार परकाश सिंह बादल ने 1979 में पंजाब पुनर्गठन अधिनियम की धारा 78 की वैधता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक मामला दायर किया था, जिसे बाद में दरबारा सिंह की अगुवाई वाली सरकार ने वापिस ले लिया था। उन्होने कहा कि 2016 में मुख्यमंत्री के रूप में सरदार बादल ने एसवाईएल नहर के निर्माण वाली जमीन को निरस्त करके किसानों को वापिस लौटाकर आगे कदम बढ़ाया था। उन्होने कहा कि श्री भगवंत मान एक ऐसे मुददे को दोबारा खोलने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे बंद कर दिया गया है। उन्हे मुझे बताना चाहिए कि क्या वह अब हवा में एसवाईएल नहर का निर्माण करेंगें?
अकाली नेता ने साफ किया कि आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल 2017 से ही पंजाब का पानी हरियाणा और दिल्ली को सौंपने पर तुले हुए हैं और इस संबंध में उन्होने बयान भी दिए हैं और सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा भी दायर किया है। उन्होने कहा,‘‘ वे जितनी कोशिश कर सकते हैं कर लें, परंतु अकाली दल उनकी साजिश को हरगिज सफल नही होने देगा।’’
मुख्य बातें (Key Points)
अकाली दल ने भगवंत मान पर जल अधिकारों से समझौते का आरोप लगाया।
हरियाणा को पानी देने की तैयारी का दावा किया गया।
एसवाईएल नहर को लेकर मुख्यमंत्री के बयान पर आपत्ति।
अकाली दल ने पानी की एक भी बूंद बाहर न जाने देने का संकल्प दोहराया।








