Punjab Drug Crackdown के तहत पंजाब में नशे के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई सामने आई है, जिसमें सरकार ने नशा तस्करों की कमर तोड़ने का दावा किया है।
पंजाब में नशे के खिलाफ जारी जंग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। राज्य में सत्ता में आने के बाद सरकार ने बीते एक साल के भीतर नशा तस्करों के खिलाफ रिकॉर्ड स्तर पर केस दर्ज कराए हैं और हजारों तस्करों को सलाखों के पीछे पहुंचाया है। सरकार का दावा है कि यह कार्रवाई आज़ादी के बाद किसी भी राज्य में सबसे बड़ी है।
पंजाब में नशे के खिलाफ चल रही मुहिम को लेकर Arvind Kejriwal ने साफ कहा है कि नशे को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने पूरी ताकत झोंक दी है। उन्होंने बताया कि यह लड़ाई जल्दबाज़ी में नहीं, बल्कि पूरी तैयारी के साथ शुरू की गई ताकि नशा तस्करों के पूरे नेटवर्क को तोड़ा जा सके।
‘नशे के खिलाफ निर्णायक लड़ाई’
सरकार का कहना है कि शुरुआत में थोड़ा समय इसलिए लगा क्योंकि पूरे सिस्टम को तैयार करना जरूरी था। लेकिन पिछले साल 1 मार्च के बाद जिस गंभीरता और हौसले के साथ कार्रवाई शुरू हुई, उसने पूरे तंत्र की दिशा बदल दी। नशा बेचने वालों को लेकर यह कहा जाता था कि वे बेहद खतरनाक गैंगस्टर हैं, जो किसी को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं, लेकिन सरकार ने पीछे हटने से इनकार कर दिया।
28 हजार केस, 88% में जेल
बीते करीब 10 महीनों के भीतर नशा तस्करों के खिलाफ 28,000 केस दर्ज किए गए। यह आंकड़ा अपने आप में ऐतिहासिक बताया जा रहा है। सरकार के मुताबिक ये कोई फर्जी मामले नहीं हैं। जब ये केस अदालतों में पहुंचे तो 88% मामलों में आरोपियों को जेल भेजा गया, जो यह दिखाता है कि कार्रवाई ठोस सबूतों के आधार पर की गई।
42 हजार स्मगलर गिरफ्तार
इस अभियान के तहत करीब 42,000 स्मगलर्स को गिरफ्तार किया गया है। इनमें सिर्फ छोटे तस्कर ही नहीं, बल्कि 350 ऐसे बड़े तस्कर भी शामिल हैं, जिन्हें सरकार “हाई-प्रोफाइल” मानती है। दावा है कि इससे पहले किसी भी राज्य में इतने बड़े पैमाने पर तस्करों को नहीं पकड़ा गया।
आम लोगों पर असर
सरकार का तर्क है कि इस सख्त कार्रवाई का सीधा फायदा आम परिवारों और युवाओं को मिलेगा। नशे की जड़ पर प्रहार होने से आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने की कोशिश की जा रही है, ताकि बच्चों को नशे के दलदल से बाहर रखा जा सके।
सरकार का सियासी संदेश
इस मुहिम के जरिए सरकार ने यह संकेत भी दिया है कि वह दबाव, धमकी या डर से पीछे हटने वाली नहीं है। नशे के खिलाफ यह अभियान केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों से जुड़ा सवाल बताया जा रहा है।
जानें पूरा मामला
पंजाब में लंबे समय से नशा एक गंभीर सामाजिक समस्या रहा है। सत्ता में आने के बाद सरकार ने इसे प्राथमिकता बनाते हुए नशा तस्करों पर व्यापक कार्रवाई शुरू की। इसी के तहत केस दर्ज हुए, गिरफ्तारियां हुईं और अदालतों में सजा तक का आंकड़ा सामने आया।
मुख्य बातें (Key Points)
- पंजाब में नशा तस्करों के खिलाफ 28,000 केस दर्ज
- अदालतों में गए मामलों में 88% में जेल
- करीब 42,000 स्मगलर गिरफ्तार
- 350 बड़े तस्करों पर भी कार्रवाई








