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The News Air - NEWS-TICKER - Punjab Drug Arrests: 90,000 के दावे में 32,000 गिरफ्तारियां गायब, विपक्ष ने खोली पोल

Punjab Drug Arrests: 90,000 के दावे में 32,000 गिरफ्तारियां गायब, विपक्ष ने खोली पोल

पंजाब सरकार के नशा विरोधी अभियान पर उठे सवाल, मजीठिया और रंधावा ने आंकड़ों में गड़बड़ी का लगाया आरोप, मांगी ए-कैटेगरी तस्करों की सूची

The News Air Team by The News Air Team
शनिवार, 11 अप्रैल 2026
in NEWS-TICKER, पंजाब
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Bikram Singh Majithia
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Punjab Drug Arrests को लेकर पंजाब में सियासी घमासान शुरू हो गया है। आम आदमी पार्टी सरकार के “युद्ध नशों के विरुद्ध” अभियान में आंकड़ों की कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया है। विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान सरकार पर झूठे दावों और आंकड़ेबाजी का गंभीर आरोप लगाया है।

चंडीगढ़ में शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया और कांग्रेस के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने एक साथ सरकार को घेरते हुए कहा कि पंजाब भर में करोड़ों रुपये के विज्ञापन और होर्डिंग लगाकर 90,000 नशा तस्करों की गिरफ्तारी का दावा किया जा रहा है, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में केवल 58,136 गिरफ्तारियां ही दर्ज हैं। यानी 31,864 गिरफ्तारियां कागजों से गायब हैं।

दोनों नेताओं ने मांग की है कि सरकार स्पष्ट करे कि ये 32,000 के करीब गिरफ्तारियां कहां गईं और क्या यह आंकड़ों की हेराफेरी है।

मजीठिया का सवाल: 31,864 ड्रग तस्करों को ‘उड़ा’ दिया गया?

शिरोमणि अकाली दल के पूर्व मंत्री सरदार बिक्रम सिंह मजीठिया ने आज चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य सरकार पर बड़े आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भगवंत मान और कार्यकारी डीजीपी की इस मुहिम के तहत की गई गिरफ्तारियों की सच्चाई अब सामने आ रही है।

मजीठिया ने आरोप लगाया कि पंजाब भर में करोड़ों रुपये के विज्ञापन और होर्डिंग लगाकर सरकार 90,000 ड्रग तस्करों की गिरफ्तारी का दावा कर रही है। लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में 405वें दिन में युद्ध नशों विरुद्ध अभियान में केवल 58,136 गिरफ्तारियां ही दर्ज हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार के ताजा आधिकारिक प्रेस नोट में भी 58,136 गिरफ्तारियों की ही बात कही गई है। अब पूरा पंजाब यह सवाल पूछ रहा है कि आखिर 31,864 कथित गिरफ्तारियां कहां गईं। क्या मुख्यमंत्री और डीजीपी की मिलीभगत से इन आंकड़ों को भिंडर की तरह “उड़ा” दिया गया?

रंधावा का आरोप: नशा पीड़ितों को तस्कर बताया जा रहा

इसी मुद्दे पर पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री और गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ने इश्तिहार लगाकर अपनी बढ़ाई की है, लेकिन अगर सरकार ने इतने तस्कर पकड़ लिए हैं तो फिर पंजाब में नशे से मरने वालों की संख्या कम क्यों नहीं हो रही।

रंधावा ने कहा कि परिवारों के परिवार नशे के कारण उजड़ रहे हैं। सरकार को ऐसे संवेदनशील मामलों में अपनी बढ़ाई करने से बचना चाहिए। पंजाब को अब आंकड़े नहीं परिणाम चाहिए। सरकार चार सालों में आंकड़ों के साथ बहुत खेल चुकी है।

उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार स्पष्ट करे कि दावे के मुताबिक पकड़े गए नशा तस्करों में बेचने वाले और इसका इस्तेमाल करने वाले कितने लोग हैं। सच्चाई यह है कि सरकार की तरफ से गिरफ्तार किए गए इन नशा तस्करों में बहुत सारे लोग नशे की लत के शिकार हैं।

ए-कैटेगरी तस्करों की लिस्ट जारी करने की मांग

रंधावा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सरकार तुरंत बताए कि Punjab Drug Arrests में ए-कैटेगरी के कितने तस्कर पकड़े गए हैं। इन नामी तस्करों की लिस्ट भी जारी की जाए। इसके अलावा उनसे कितनी ड्रग बरामद की गई है, यह भी स्पष्ट किया जाए।

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उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी के अपने नेता बड़े ड्रग तस्करी मामलों में संलिप्त हैं और दो नेताओं को करोड़ों रुपए की हेरोइन के साथ पकड़ा गया है। सरकार पर तो ड्रग तस्करों को पासपोर्ट देकर विदेश भेजने के संगीन आरोप लग रहे हैं।

जवानी खत्म हो रही, नशा नहीं: रंधावा की चिंता

सुखजिंदर रंधावा ने भावुक होते हुए कहा कि पंजाब की जवानी खत्म हो रही है लेकिन नशा नहीं। सिर्फ आंकड़े दिखाकर अपनी पीठ थपथपाना बंद करे आम आदमी पार्टी सरकार।

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस तरह की इश्तिहारबाजी और बढ़ाई से देश में पंजाब की बदनामी होती है। सरकार को चाहिए कि वह नशा पीड़ितों के पुनर्वास और उनके इलाज पर ध्यान दे, ताकि उनको दोबारा मुख्यधारा में शामिल किया जा सके।

रंधावा ने चिंता जताई कि सरकार के दावों के बावजूद पंजाब में नशे से मरने वालों की संख्या कम नहीं हो रही है। एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत डराने वाली है। ऐसे में एक ही मोहल्ले से 20 युवाओं के नशे की बलि चढ़ना सरकार के दावों की हवा निकाल रहा है।

केजरीवाल को ‘ब्लफ मास्टर’ बताया

बिक्रम सिंह मजीठिया ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को “ब्लफ मास्टर” बताते हुए कहा कि उनके द्वारा दिल्ली और फिर पंजाब के लिए खड़ा किया गया झूठे आंकड़ों का महल अब पूरी तरह ढह चुका है।

उन्होंने कहा कि जैसे दिल्ली में, वैसे ही पंजाब में भी झाड़ू पार्टी हर क्षेत्र में झूठे आंकड़े पेश कर रही है। चाहे वह शिक्षा का क्षेत्र हो, नौकरियों का मामला, बिजली विभाग का घाटा या फिर ड्रग मामलों में गिरफ्तारियां।

मजीठिया ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी सरकार अब अपने ही बनाए आंकड़ों के जाल में फंसती नजर आ रही है। इन आंकड़ों का जमीनी हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है और यह केवल झूठी विज्ञापनबाजी के जरिए लोगों को गुमराह करने की कोशिश है।

विज्ञापनों पर करोड़ों खर्च, जमीन पर शून्य परिणाम

विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार ने “युद्ध नशों के विरुद्ध” अभियान के प्रचार पर करोड़ों रुपये खर्च किए हैं। राज्यभर में बड़े-बड़े होर्डिंग और विज्ञापन लगाए गए, जिनमें 90,000 गिरफ्तारियों का दावा किया गया।

लेकिन जब सरकारी रिकॉर्ड की पड़ताल की गई तो सच्चाई सामने आई कि केवल 58,136 गिरफ्तारियां ही दर्ज हैं। यह आंकड़ा सरकार के ताजा आधिकारिक प्रेस नोट में भी स्वीकार किया गया है।

इस तरह 31,864 गिरफ्तारियों का कोई रिकॉर्ड ही नहीं है। यह संख्या कुल दावे का लगभग 35 प्रतिशत है, जो एक बड़ी गड़बड़ी की ओर इशारा करती है।

कांग्रेस बोली: पंजाब की बदनामी नहीं होने देंगे

कांग्रेस नेता सुखजिंदर रंधावा ने कहा कि कांग्रेस हमेशा नशा तस्करी और नशा तस्करों के खिलाफ लड़ती रही है। आगे भी कांग्रेस की लड़ाई जारी रहेगी, लेकिन नशे को लेकर पंजाब की बदनामी नहीं होने दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि झूठे आंकड़ों पर हो रहे खेल का पर्दाफाश होना जरूरी है। सरकार जमीनी स्तर पर और सही तस्करों पर कार्रवाई करे। नशा सप्लाई की चेन को तोड़ा जाए।

रंधावा ने सरकार से मांग की कि वह नशा पीड़ितों के पुनर्वास और इलाज पर ध्यान दे, सिर्फ गिरफ्तारियों के आंकड़े गिनाने से कुछ नहीं होगा।

मजीठिया की अपील: ‘झूठी सरकार’ को उखाड़ फेंकें

बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि पंजाब के लोग अब इन झूठे दावों के झांसे में नहीं आने वाले। जल्द ही “दिल्ली और सतौज के नटवरलालों” की जोड़ी को उनकी “झूठी फौज” सहित पंजाब से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।

उन्होंने पंजाब के युवाओं, किसानों, कर्मचारियों और सभी वर्गों से अपील की कि वे राज्य के हितों की रक्षा के लिए आगे आएं और इस “झूठी सरकार” को उखाड़ फेंकें।

मजीठिया ने कहा कि ताकि भविष्य में कोई भी ऐसी “नटवरलालों की जोड़ी” झूठे सपने दिखाकर पंजाब को नुकसान न पहुंचा सके। पंजाबियों ने जो सपने पंजाब के प्रति देखे थे, वे पिछले चार सालों में टूटते रहे हैं। अब समय आ गया है कि वह सपने आने वाले समय में इन्हें भगाकर पूरे किए जा सकें।

आंकड़ों का खेल या राजनीतिक षड्यंत्र

Punjab Drug Arrests के इस पूरे मामले में अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर 31,864 गिरफ्तारियों का रिकॉर्ड कहां गया। क्या यह सिर्फ आंकड़ों में गड़बड़ी है या इसके पीछे कुछ और है।

विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने जनता को गुमराह करने के लिए जानबूझकर फर्जी आंकड़े पेश किए। करोड़ों रुपये के विज्ञापन और होर्डिंग लगाकर 90,000 की संख्या दिखाई गई, लेकिन असलियत में यह आधे से भी कम है।

अगर सरकार के पास सफाई है तो उसे तुरंत सभी गिरफ्तारियों का पूरा ब्योरा जारी करना चाहिए। हर गिरफ्तार व्यक्ति का नाम, पता, मामला और बरामद ड्रग्स की मात्रा सार्वजनिक की जानी चाहिए।

युद्ध नशों के विरुद्ध: सिर्फ नाम का अभियान

पंजाब में “युद्ध नशों के विरुद्ध” अभियान आम आदमी पार्टी सरकार की सबसे बड़ी घोषणाओं में से एक था। सत्ता में आने से पहले भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल ने पंजाब को नशामुक्त बनाने का वादा किया था।

सरकार बनने के बाद बड़े पैमाने पर अभियान चलाया गया। मुख्यमंत्री ने कई बार दावा किया कि हजारों ड्रग तस्कर पकड़े गए हैं और नशे के खिलाफ जंग जीती जा रही है।

लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और बयां करती है। नशे से होने वाली मौतों में कमी नहीं आई है। युवाओं की बर्बादी थमी नहीं है। परिवार अब भी उजड़ रहे हैं।

पंजाब का दर्द: एक परिवार में पांच मौतें

सुखजिंदर रंधावा ने जिक्र किया कि एक ही परिवार के पांच लोगों की नशे से मौत हो चुकी है। एक ही मोहल्ले से 20 युवाओं के नशे की बलि चढ़ने की खबरें आ रही हैं।

यह आंकड़े बताते हैं कि सरकार के सारे दावे खोखले हैं। अगर वाकई में 90,000 ड्रग तस्कर पकड़े गए होते तो नशे की सप्लाई चेन टूट जानी चाहिए थी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

यह साफ करता है कि या तो गिरफ्तारियां हुई ही नहीं, या फिर जो पकड़े गए वे असली तस्कर नहीं बल्कि नशे के आदी लोग थे, जिन्हें तस्कर बताकर आंकड़े बढ़ाए गए।

पुनर्वास नहीं, सिर्फ गिरफ्तारी

विपक्ष का यह भी आरोप है कि सरकार ने नशा पीड़ितों के पुनर्वास और इलाज पर कोई ध्यान नहीं दिया। सिर्फ गिरफ्तारियों के आंकड़े इकट्ठा किए गए, ताकि विज्ञापनों में दिखाया जा सके।

जो नशेड़ी पकड़े गए, उन्हें जेल भेज दिया गया। उनका इलाज नहीं कराया गया। उन्हें दोबारा मुख्यधारा में शामिल करने की कोई कोशिश नहीं की गई।

नतीजा यह हुआ कि जेल से छूटने के बाद वे फिर से नशे की चपेट में आ गए। यह एक दुष्चक्र है जो सिर्फ गिरफ्तारियों से नहीं टूट सकता।

दिल्ली की तरह पंजाब में भी आंकड़ेबाजी

बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली-पानी हर मामले में झूठे आंकड़े दिए। अब पंजाब में भी वही खेल दोहराया जा रहा है।

चाहे नौकरियों का मामला हो, बिजली विभाग का घाटा हो या फिर ड्रग मामलों में गिरफ्तारियां – हर जगह आंकड़ों में हेराफेरी का आरोप है।

मजीठिया ने कहा कि केजरीवाल द्वारा बनाया गया झूठे आंकड़ों का महल रेत के महल की तरह ढहने लगा है। दिल्ली में जनता ने उन्हें खारिज कर दिया, अब पंजाब की बारी है।

विपक्षी एकता का संकेत

इस मामले में एक दिलचस्प बात यह है कि शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस दोनों ने एक साथ सरकार पर हमला बोला है। दोनों दलों के शीर्ष नेताओं ने एक ही दिन Punjab Drug Arrests के आंकड़ों पर सवाल उठाए।

यह विपक्षी एकता का संकेत हो सकता है। आने वाले समय में दोनों दल मिलकर आम आदमी पार्टी सरकार को घेर सकते हैं।

हालांकि अभी तक कोई औपचारिक गठबंधन की बात नहीं हुई है, लेकिन मुद्दों पर साथ खड़े होना एक अहम राजनीतिक विकास है।

सरकार की चुप्पी चिंताजनक

Punjab Drug Arrests के इस पूरे विवाद में सबसे चिंताजनक बात यह है कि सरकार की तरफ से अब तक कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है। न मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कुछ कहा, न डीजीपी ने।

विपक्ष के गंभीर आरोपों के बाद सरकार को तुरंत सफाई देनी चाहिए थी। पूरे आंकड़े सार्वजनिक करने चाहिए थे। लेकिन अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ।

यह चुप्पी विपक्ष के आरोपों को और मजबूत कर रही है। जनता में यह धारणा बन रही है कि शायद सच में कुछ गड़बड़ है, तभी सरकार जवाब नहीं दे पा रही।

पंजाब के भविष्य पर सवाल

यह विवाद सिर्फ आंकड़ों का नहीं है, बल्कि पंजाब के भविष्य का है। नशा पंजाब की सबसे बड़ी समस्या है। यह समस्या राजनीति से ऊपर है।

अगर सरकार ने वाकई में इस मुद्दे पर झूठे दावे किए हैं तो यह बेहद गंभीर है। इससे जनता का भरोसा टूटता है और असली लड़ाई कमजोर होती है।

पंजाब को आंकड़ों की नहीं, परिणामों की जरूरत है। युवाओं को बचाने की जरूरत है। परिवारों को बर्बादी से रोकने की जरूरत है।


मुख्य बातें (Key Points):

  • पंजाब सरकार ने 90,000 नशा तस्करों की गिरफ्तारी का दावा किया, रिकॉर्ड में सिर्फ 58,136
  • 31,864 गिरफ्तारियों का कोई रिकॉर्ड नहीं, विपक्ष ने लगाया आंकड़ों की हेराफेरी का आरोप
  • बिक्रम सिंह मजीठिया और सुखजिंदर रंधावा ने एक साथ सरकार को घेरा
  • नशा पीड़ितों को तस्कर बताने का आरोप, ए-कैटेगरी तस्करों की लिस्ट मांगी
  • करोड़ों के विज्ञापन पर खर्च, जमीन पर कोई असर नहीं
  • एक परिवार में 5 लोगों की नशे से मौत, एक मोहल्ले से 20 युवा बर्बाद
  • केजरीवाल को ‘ब्लफ मास्टर’ बताया, दिल्ली जैसा खेल पंजाब में भी

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: Punjab Drug Arrests में कितनी गिरफ्तारियां हुईं?

पंजाब सरकार ने 90,000 नशा तस्करों की गिरफ्तारी का दावा किया है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में केवल 58,136 गिरफ्तारियां ही दर्ज हैं। 31,864 गिरफ्तारियों का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।

प्रश्न 2: विपक्ष ने क्या आरोप लगाया है?

शिरोमणि अकाली दल के बिक्रम सिंह मजीठिया और कांग्रेस के सुखजिंदर रंधावा ने आरोप लगाया है कि सरकार ने झूठे आंकड़े पेश कर जनता को गुमराह किया है। उन्होंने नशा पीड़ितों को तस्कर बताने और ए-कैटेगरी तस्करों की जानकारी छिपाने का भी आरोप लगाया है।

प्रश्न 3: पंजाब में नशे की स्थिति क्या है?

विपक्ष का कहना है कि सरकार के दावों के बावजूद पंजाब में नशे से मरने वालों की संख्या कम नहीं हुई है। एक ही परिवार में पांच लोगों की मौत और एक मोहल्ले से 20 युवाओं के नशे का शिकार होने की खबरें आ रही हैं।

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